
बिहार की बैंकिंग और वित्तीय व्यवस्था ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। पहली बार राज्य का क्रेडिट-डिपॉजिट (CD) रेशियो 60 प्रतिशत के पार पहुंच गया है, जिसे बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इसी के साथ राज्य में कुल बैंक जमा राशि लगभग 6.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। यह उपलब्धि बिहार में वित्तीय गतिविधियों के विस्तार, बैंकिंग पहुंच में सुधार और निवेश क्षमता में वृद्धि का संकेत देती है। राज्य सरकार ने इस मौके पर किसानों को अधिक सरल और पारदर्शी ऋण सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से ‘बिहार किसान ऋण पोर्टल’ भी लॉन्च किया है।
पटना में आयोजित राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC), बिहार की 96वीं एवं 97वीं संयुक्त बैठक में उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने बिहार किसान ऋण पोर्टल का औपचारिक शुभारंभ किया। यह डिजिटल पोर्टल कृषि ऋण प्रणाली में बड़ा बदलाव लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैंकर्स समिति द्वारा विकसित इस पोर्टल के माध्यम से किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) व्यवस्था को बैंकों, जनसमर्थ पोर्टल और भविष्य में एग्री-स्टैक से जोड़ा जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म से कृषि ऋण वितरण अधिक पारदर्शी, तेज और तकनीक आधारित बनेगा। किसानों को बैंक शाखाओं के बार-बार चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी और ऋण प्रक्रिया अधिक सहज बनेगी। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह व्यवस्था बड़ी राहत साबित हो सकती है।
बैठक में बैंकिंग क्षेत्र की उपलब्धियों की समीक्षा करते हुए बताया गया कि राज्य में बैंकों की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां यानी एनपीए में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज हुई है। NPA घटकर 6.91 प्रतिशत पर आ गया है, जो बैंकिंग प्रणाली के बेहतर ऋण प्रबंधन और वसूली व्यवस्था को दर्शाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एनपीए में कमी आने से बैंक अधिक आत्मविश्वास के साथ ऋण वितरण बढ़ा सकेंगे।
वार्षिक साख योजना (ACP) के तहत बिहार ने 87 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की। इस दौरान MSME सेक्टर ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया और लगभग 84 प्रतिशत लक्ष्य हासिल किया। कृषि क्षेत्र में करीब 67 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज हुई। यह संकेत देता है कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम राज्य की आर्थिक वृद्धि में तेजी से महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार में बैंकिंग क्षेत्र की प्रगति उत्साहजनक है, लेकिन अभी भी राज्य की विशाल जमा राशि का अधिक प्रभावी उपयोग स्थानीय निवेश, उद्योग विस्तार और रोजगार सृजन के लिए किया जाना आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से बड़े बैंकों से ऋण वितरण बढ़ाने और CD Ratio को और बेहतर करने का आह्वान किया।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन बैंकों का CD Ratio 50 प्रतिशत से कम और ACP उपलब्धि 60 प्रतिशत से कम होगी, उनकी प्रत्येक छह माह पर समीक्षा की जाएगी। राज्य सरकार चाहती है कि बैंक केवल जमा संग्रह तक सीमित न रहें, बल्कि राज्य के आर्थिक विकास में सक्रिय भागीदार बनें।
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि पहली बार 60 प्रतिशत से अधिक CD Ratio हासिल करना बिहार की अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने कृषि वित्तपोषण में डिजिटल तकनीकों के व्यापक उपयोग पर जोर दिया और कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड, जनसमर्थ पोर्टल और एग्री-स्टैक के एकीकरण से किसानों के लिए ऋण प्रणाली अधिक सरल होगी।
उन्होंने बताया कि राज्य में एग्री-स्टैक आधारित ऋण वितरण की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं। हालांकि, कई क्षेत्रों में अभी अपेक्षित स्तर पर KCC वितरण नहीं हो पाया है। विशेष रूप से कृषि प्रधान क्षेत्रों की 312 बैंक शाखाओं में KCC वितरण को मजबूत करने की आवश्यकता बताई गई।
विकास आयुक्त ने निर्देश दिया कि KCC सेवाओं को सहयोग शिविरों के माध्यम से गांव-गांव तक पहुंचाया जाए। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर पात्र किसान को कृषि ऋण और वित्तीय सेवाओं का लाभ आसानी से मिल सके। साथ ही कृषि अवसंरचना कोष से जुड़े लंबित ऋण मामलों के त्वरित समाधान के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में पशुपालन और मत्स्य क्षेत्र के वित्तपोषण पर भी चर्चा हुई। पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री नंद किशोर राम ने कहा कि डेयरी और मत्स्यपालन से जुड़े किसानों को ऋण सुविधा शीघ्र उपलब्ध कराई जानी चाहिए। छोटे पशुपालकों और मत्स्य किसानों को अनावश्यक बैंक प्रक्रियाओं में उलझने से बचाने की जरूरत पर जोर दिया गया।
ग्रामीण विकास एवं सूचना एवं जनसंपर्क मंत्री श्रवण कुमार ने स्वयं सहायता समूहों की ऋण स्वीकृति प्रक्रिया पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि बिहार में लगभग 11.88 लाख स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला सशक्तिकरण की रीढ़ बन चुके हैं। उन्होंने बैंक सखी और जीविका दीदियों की भूमिका को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
नगर विकास एवं आवास तथा सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री नीतीश मिश्रा ने की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य में 3.37 लाख से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं। उन्होंने आवेदन और स्वीकृति के बीच अंतर कम करने और अस्वीकृत मामलों की समीक्षा करने पर बल दिया।
बैठक में विभिन्न केंद्रीय योजनाओं की प्रगति भी समीक्षा की गई। के तहत 122.53 प्रतिशत उपलब्धि दर्ज की गई, जबकि के तहत 72.47 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त हुआ। वहीं के अंतर्गत मई 2026 तक लगभग 3,700 ऋण स्वीकृत किए गए।
महिला किसानों के अंतरराष्ट्रीय वर्ष के अवसर पर डेयरी, मत्स्यपालन, कुक्कुट पालन और सब्जी उत्पादन से जुड़ी महिला किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी विशेष चर्चा हुई। बैंकिंग प्रणाली को महिला उद्यमिता, डिजिटल भुगतान और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया गया।
वित्त विभाग के सचिव संजय कुमार सिंह ने कहा कि बैंकों की भूमिका केवल लाभ कमाने तक सीमित नहीं है। राज्य के सामाजिक और आर्थिक विकास में उनकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बैंकिंग क्षेत्र के साथ अपनी साझेदारी को और मजबूत करेगी।
कुल मिलाकर, बिहार में बैंकिंग क्षेत्र की यह प्रगति राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत है। 6.5 लाख करोड़ रुपये की जमा राशि, CD Ratio का 60 प्रतिशत के पार पहुंचना, NPA में कमी और बिहार किसान ऋण पोर्टल की शुरुआत यह दर्शाती है कि राज्य अब डिजिटल वित्तीय समावेशन और समावेशी आर्थिक विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। आने वाले समय में इन पहलों का लाभ किसानों, उद्यमियों, महिला समूहों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़े स्तर पर मिलने की उम्मीद है।


