होर्मुज से तेहरान तक तबाही: अमेरिका की घेराबंदी में ईरान, युद्ध निर्णायक मोड़ पर

दिसंबर 2025 से अमेरिका द्वारा ईरान की सैन्य घेराबंदी के बाद अब हालात पूरी तरह युद्ध में बदल चुके हैं। 28 फरवरी 2026 को इजरायल के हमले के बाद शुरू हुआ यह संघर्ष 20 दिन पूरे कर चुका है। इस दौरान अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने ईरान की सैन्य संरचना को भारी नुकसान पहुंचाया है।

पश्चिम एशिया में बढ़ी अमेरिकी तैनाती

अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। पेंटागन ने USS Tripoli को तय समय से पहले 4-5 हजार मरीन सैनिकों के साथ रवाना कर दिया है। यह युद्धपोत क्षेत्र में रणनीतिक पोजिशन लेगा। वहीं USS Gerald Ford को आग से हुए नुकसान के बाद ग्रीस के क्रेटे स्थित बेस पर मरम्मत के लिए भेजा गया है।

होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नियंत्रण

अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की सुरक्षा फिलहाल अमेरिकी सेना संभाल रही है। दक्षिणी ईरान में A-10 फाइटर जेट और AH-64 अपाचे हेलीकॉप्टर सक्रिय हैं। इसके अलावा B-1, B-2 और B-52 बॉम्बर विमानों द्वारा ईरान के भीतर लंबी दूरी के हमले किए जा रहे हैं।

7000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले

अमेरिका का दावा है कि पिछले 20 दिनों में ईरान के 7000 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया है। रक्षा मंत्री के मुताबिक, यह अभियान अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है और युद्ध का अंत अमेरिका की शर्तों पर ही होगा।

ईरान की सैन्य क्षमता पर बड़ा असर

अमेरिकी दावों के अनुसार:

  • ईरान की मिसाइल क्षमता लगभग 90% तक खत्म हो चुकी है
  • ड्रोन हमलों में भी भारी कमी आई है
  • परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचा है
  • यूरेनियम संवर्धन और मिसाइल निर्माण क्षमता लगभग समाप्त हो गई है

समुद्री और सुरंग ठिकानों पर हमले

अमेरिका ने ईरान के भूमिगत सुरंग ठिकानों को भी निशाना बनाया है। 18 मार्च को 5000 पाउंड के पेनेट्रेटर बम गिराए गए। इसके अलावा, अमेरिकी सेना का दावा है कि ईरान के 120 जहाज भी नष्ट कर दिए गए हैं।

आगे क्या?

अमेरिका का कहना है कि वह युद्ध को लंबा नहीं खींचना चाहता, लेकिन अगर ईरान हमले जारी रखता है या आत्मसमर्पण नहीं करता, तो सैन्य कार्रवाई जारी रह सकती है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में तनाव चरम पर है और हालात लगातार बदल रहे हैं।


 

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