नगर निकायों में लागू होगी बिहार खरीद अधिमानता नीति-2024, स्थानीय उद्यमों को मिलेगा लाभ

पटना: बिहार सरकार ने नगर निकायों में बिहार खरीद अधिमानता नीति-2024 को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया है। नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा कि विभाग के अधीन सभी नगर निकायों और संस्थानों को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी सभी निविदाओं और खरीद प्रक्रियाओं में इस नीति का पालन सुनिश्चित करें, ताकि स्थानीय उद्योगों और उद्यमों को निर्धारित अधिमानता (प्रेफरेंस) का लाभ मिल सके।

‘मेड इन बिहार’ को मिलेगा बढ़ावा

मंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत वस्तुओं और सेवाओं की सरकारी खरीद में बिहार के स्थानीय उद्यमों को प्राथमिकता दी जाएगी। वस्तुओं की खरीद के लिए संबंधित उद्यम का बिहार में पंजीकृत होना और उसकी उत्पादन इकाई का राज्य में स्थापित होना अनिवार्य होगा। इससे राज्य के स्थानीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहन मिलेगा।

खरीद में 15 प्रतिशत तक मिलेगा प्रेफरेंस

नीतीश मिश्रा ने बताया कि नीति के तहत वस्तुओं और सेवाओं की खरीद में 15 प्रतिशत तक का खरीद अधिमानता अंतर (पर्चेज प्रेफरेंस मार्जिन) निर्धारित किया गया है। इसके अलावा विशेष श्रेणी के स्थानीय उद्यमों को कई रियायतें भी दी गई हैं।

स्टार्टअप और एमएसएमई को मिलेंगी विशेष सुविधाएं

नीति के तहत स्थानीय उद्यमों को निःशुल्क निविदा प्रपत्र, बिड सिक्योरिटी से छूट, वार्षिक कारोबार, अनुभव और कंपनी की आयु संबंधी पात्रता शर्तों में सशर्त 50 प्रतिशत तक छूट तथा स्टार्टअप इकाइयों के लिए मनोनयन या सीमित निविदा के आधार पर खरीद जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

स्थानीय उद्योग और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा

मंत्री ने कहा कि यह नीति राज्य में उद्यमिता को बढ़ावा देने, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सशक्त बनाने और सरकारी खरीद प्रणाली में स्थानीय इकाइयों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर बिहार के लक्ष्य को नई गति मिलेगी।

सभी नगर निकायों को दिए गए निर्देश

नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी नगर निकायों और अधीनस्थ संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे बिहार खरीद अधिमानता नीति-2024 के सभी प्रावधानों का प्रभावी ढंग से अनुपालन सुनिश्चित करें, ताकि स्थानीय औद्योगिक इकाइयों और उद्यमों को सरकारी खरीद में पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से प्राथमिकता का लाभ मिल सके।

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