भागलपुर। बिहार राज्य प्राथमिक शिक्षक संघ (गोपगुट) भागलपुर जिला का चतुर्थ सम्मेलन वृन्दावन गार्डन में धूमधाम से संपन्न हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष अशोक कुमार गुप्ता ने की, जबकि संचालन अनिल कुमार दीपक ने किया।
कार्यक्रम की शुरुआत

सम्मेलन की शुरुआत झंडोत्तोलन से हुई, जिसे जिला अध्यक्ष ने सम्पन्न कराया। इसके बाद शहीदों की स्मृति में बलि बेदी पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई और सामूहिक दीप प्रज्ज्वलन के माध्यम से कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।
मुख्य अतिथि और संबोधन

सम्मेलन के खुले सत्र का उद्घाटन महासचिव नागेंद्र सिंह ने किया तथा प्रतिनिधि सत्र का उद्घाटन राज्य अध्यक्ष रघुवर रजक ने किया। इस अवसर पर कई गणमान्य शिक्षक नेता एवं समाजसेवी मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं –
- रघुवर रजक (राज्य अध्यक्ष)
- नागेंद्र सिंह (महासचिव)
- डॉ. मनोज कुमार बंधु (प्रमंडलीय अध्यक्ष)
- ब्रजराज चौधरी (प्रमंडलीय सचिव)
- श्याम नंदन सिंह (जिला सचिव)
- नंदनी कुमारी (महिला जिला अध्यक्षा)
- डॉ. वीना यादव (पूर्व मेयर एवं समाजसेवी)
- रंजन कुमार (मुंगेर जिला अध्यक्ष)
- कुणाल जी (अरवल अध्यक्ष)
भारी संख्या में शिक्षकों की उपस्थिति

सम्मेलन में प्रखंड, अनुमंडल, प्रमंडल एवं जिला स्तर के प्रतिनिधियों सहित हजारों शिक्षकों ने भाग लिया।
जिला इकाई का पुनर्गठन
सम्मेलन के दौरान जिला इकाई का पुनर्गठन किया गया, जिसमें निर्वाचित पदाधिकारी इस प्रकार हैं –
- सम्मानित अध्यक्ष: अशोक कुमार गुप्ता
- जिला अध्यक्ष: मिथलेश कुमार यादव
- जिला सचिव: श्याम नंदन सिंह
- कोषाध्यक्ष: नरेंद्र कुमार
- जिला उपाध्यक्ष: ब्रजराज चौधरी
शिक्षकों की प्रमुख मांगें
सम्मेलन में शिक्षकों ने सरकार से कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख हैं –
- पुरानी पेंशन योजना लागू करना
- सभी श्रेणी के शिक्षकों को सहायक शिक्षक के रूप में नामित करना
- आठवां वेतन आयोग लागू करना
- शिक्षा के निजीकरण का विरोध
- बायोमैट्रिक प्रणाली लागू करना
- सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष करना
- समय पर वेतन भुगतान एवं कार्यालयों को भ्रष्टाचार मुक्त करना
- बीपीएससी शिक्षकों के लिए ₹4200 ग्रेड पे लागू करना
- प्रधान शिक्षक का मूल वेतन ₹40,500 तय करना
- शिक्षकों का शीघ्र स्थानांतरण सुनिश्चित करना
- आवास भत्ता, महंगाई भत्ता एवं वार्षिक वेतन वृद्धि का लाभ उपलब्ध कराना
आंदोलन की चेतावनी
सम्मेलन में शिक्षकों ने संकल्प लिया कि यदि उनकी मांगों पर सरकार जल्द निर्णय नहीं लेती, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।


