पूर्व रेलवे का ‘टिकट चेकिंग’ धमाका: बिना टिकट यात्रा करने वालों से वसूले रिकॉर्ड ₹100 करोड़; पिछले साल के मुकाबले राजस्व में 24% का बड़ा उछाल

कोलकाता। भारतीय रेलवे के सबसे महत्वपूर्ण और व्यस्ततम क्षेत्रों में से एक, ‘पूर्व रेलवे’ (Eastern Railway) ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के दौरान अपनी कार्यकुशलता और सख्त निगरानी का लोहा मनवाते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। रेलवे ने टिकट जांच के मोर्चे पर न केवल अपनी सतर्कता बढ़ाई है, बल्कि राजस्व की सुरक्षा के मामले में अब तक का सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन दर्ज किया है। सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को कोलकाता स्थित मुख्यालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पूर्व रेलवे ने बिना टिकट और अवैध तरीके से यात्रा करने वाले यात्रियों के खिलाफ चलाए गए सघन अभियानों के माध्यम से 100 करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित की है। यह आंकड़ा न केवल रेलवे के खजाने को मजबूती प्रदान कर रहा है, बल्कि उन ‘अनधिकृत’ यात्रियों के लिए एक कड़ा संदेश भी है जो रेल नियमों को ताक पर रखकर सफर करने की कोशिश करते हैं। रेलवे प्रशासन का यह कदम उन वैध यात्रियों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरा है, जो टिकट लेकर यात्रा करते हैं लेकिन बिना टिकट यात्रियों की भीड़ के कारण अपनी सीटों और सुविधाओं से वंचित रह जाते थे।

राजस्व की ‘सेंचुरी’ और मामलों की बढ़ती संख्या

​पूर्व रेलवे द्वारा जारी किए गए वित्तीय वर्ष 2025–26 के अंतिम आंकड़े चौंकाने वाले और उत्साहजनक हैं। रेलवे ने इस अवधि के दौरान टिकट जांच के माध्यम से कुल ₹100.67 करोड़ की आय दर्ज की है। अगर इसकी तुलना पिछले वित्तीय वर्ष से की जाए, तो इसमें 24.74% की उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है। यह वृद्धि दर्शाती है कि रेलवे का ‘इंटेलिजेंस’ और ‘ग्राउंड ऑपरेशन’ अब पहले से कहीं अधिक सटीक और प्रभावी हो चुका है।

​आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच अवैध या बिना टिकट यात्रा करने के कुल 24.39 लाख मामले दर्ज किए गए। पिछले वर्ष की तुलना में इन मामलों में 10.37% की बढ़ोतरी हुई है। यह बढ़ोतरी केवल यात्रियों की संख्या बढ़ने का संकेत नहीं है, बल्कि यह रेलवे के ‘पकड़’ (Detection) रेट में आए सुधार को भी रेखांकित करती है। प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक यू एस झा के मार्गदर्शन में चलाई गई इन मुहिमों ने रेलवे के राजस्व की सुरक्षा सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है।

प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों का तुलनात्मक विवरण

​पूर्व रेलवे के इस प्रदर्शन को बेहतर ढंग से समझने के लिए निम्नलिखित आंकड़े महत्वपूर्ण हैं:

विवरण

वित्तीय वर्ष 2025–26

विकास दर (पिछले वर्ष से)

टिकट जांच से कुल आय

₹100.67 करोड़

24.74% ↑

कुल दर्ज मामले

24.39 लाख

10.37% ↑

लक्ष्य प्राप्ति

शत-प्रतिशत

ऐतिहासिक सुधार

‘फोर्ट्रेस चेक’ और डेटा-आधारित रणनीति: कैसे मिली सफलता?

​पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर ने इस उपलब्धि के पीछे एक सुनियोजित रणनीति और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को मुख्य श्रेय दिया है। देऊस्कर ने स्पष्ट किया था कि केवल रैंडम चेकिंग से काम नहीं चलेगा, बल्कि ‘अनधिकृत’ यात्रा को रोकने के लिए डेटा का सहारा लेना होगा। इसी का परिणाम रहा कि रेलवे ने यातायात पैटर्न (Traffic Pattern) और व्यस्त समय (Peak Hours) का विश्लेषण किया। जिन खंडों और ट्रेनों में बिना टिकट यात्रियों की शिकायतें सबसे ज्यादा आती थीं, वहां डेटा के आधार पर टिकट जांच कर्मचारियों की विशेष तैनाती की गई।

​इस रणनीति का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा रहा ‘फोर्ट्रेस चेक’ (Fortress Check)। इसके तहत प्रमुख स्टेशनों के प्रवेश और निकास बिंदुओं पर सघन घेराबंदी की जाती है, जिससे बिना टिकट यात्रियों के बचने का कोई रास्ता नहीं बचता। व्यस्त समय के दौरान जब ट्रेनों में भारी भीड़ होती है, तब आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) के साथ घनिष्ठ समन्वय बनाकर इन अभियानों को अंजाम दिया गया। रेलवे ने संवेदनशील खंडों की पहचान की और वहां ‘सरप्राइज चेकिंग’ की आवृत्ति बढ़ा दी। इससे न केवल जुर्माना वसूला गया, बल्कि यात्रियों के मन में यह मनोवैज्ञानिक डर भी बैठा कि पकड़े जाने पर अब केवल जुर्माना नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है।

कर्मचारियों का समर्पण और प्रोत्साहन योजना

​इस बड़ी कामयाबी में पूर्व रेलवे के टिकट जांच कर्मचारियों का समर्पण सबसे प्रमुख रहा है। रेलवे ने यह सुनिश्चित किया कि जांच के दौरान वैध यात्रियों की गरिमा और सम्मान बना रहे। कर्मचारियों ने उत्कृष्ट व्यावसायिकता का प्रदर्शन करते हुए अनधिकृत व्यक्तियों को ट्रेन के डिब्बों में प्रवेश करने से रोका।

​कर्मचारियों के मनोबल को बनाए रखने के लिए प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक/पूर्व रेलवे द्वारा एक विशेष पुरस्कार योजना भी चलाई जा रही है। इसके तहत प्रत्येक दो माह में उन कर्मचारियों को सम्मानित और पुरस्कृत किया जाता है जिन्होंने टिकट जांच के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया हो। सभी मंडलों (हावड़ा, सियालदह, आसनसोल और मालदा) के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए यह पहल अत्यंत कारगर साबित हुई है। जब कर्मचारियों को पता होता है कि उनके अच्छे काम की पहचान सीधे मुख्यालय स्तर पर हो रही है, तो उनका प्रदर्शन स्वतः ही बेहतर हो जाता है।

जागरूकता अभियान: “जिम्मेदार रेल उपयोगकर्ता बनें”

​पूर्व रेलवे का उद्देश्य केवल जुर्माना वसूलना नहीं, बल्कि यात्रियों के व्यवहार में बदलाव लाना भी है। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिबराम माझि ने इस बात पर जोर दिया कि रेलवे एक सार्वजनिक संपत्ति है और इसकी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए नियमों का पालन करना हर नागरिक का कर्तव्य है। रेलवे ने “वैध टिकट के साथ यात्रा करें – जिम्मेदार रेल उपयोगकर्ता बनें” संदेश के साथ एक व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम शुरू किया है।

​स्टेशनों पर नियमित घोषणाओं, विज्ञापनों और डिजिटल मीडिया के माध्यम से यात्रियों को यह बताया जा रहा है कि बिना टिकट यात्रा करना न केवल एक दंडनीय अपराध है, बल्कि यह रेलवे की विकास परियोजनाओं को भी बाधित करता है। शिबराम माझि ने सभी यात्रियों से अपील की है कि वे अपनी यात्रा को सुरक्षित और आरामदायक बनाने के लिए हमेशा वैध टिकट खरीदें और चेकिंग के दौरान अपना उचित पहचान पत्र साथ रखें। रेलवे की मंशा साफ है—जो लोग नियम मानते हैं उन्हें सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं मिलें, और जो नियम तोड़ते हैं उन्हें कानून का सामना करना पड़े।

भविष्य की राह और सुलभ यात्रा का संकल्प

​20 अप्रैल 2026 की यह रिपोर्ट पूर्व रेलवे के लिए एक नई शुरुआत है। ₹100 करोड़ के इस आंकड़े को पार करने के बाद अब रेलवे का अगला लक्ष्य तकनीक के माध्यम से टिकट जांच प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाना है। आने वाले समय में पोर्टेबल टिकट चेकिंग डिवाइस और डिजिटल भुगतान प्रणालियों को और अधिक बढ़ावा दिया जाएगा ताकि ऑन-द-स्पॉट जुर्माने की वसूली में कोई विसंगति न रहे।

​पूर्व रेलवे का यह प्रदर्शन अन्य रेल मंडलों के लिए भी एक मिसाल पेश करता है। महाप्रबंधक मिलिंद देऊस्कर के नेतृत्व में रेलवे अब उन ‘संवेदनशील’ खंडों पर विशेष ध्यान दे रहा है जहाँ अभी भी सुधार की गुंजाइश है। यात्रियों के लिए यह खबर एक आश्वासन है कि पूर्व रेलवे उनकी सुविधा के लिए हर संभव कदम उठा रहा है। बिना टिकट यात्रियों पर लगाम लगने से ट्रेनों में सुरक्षा बढ़ेगी और अवैध विक्रेताओं व असामाजिक तत्वों के प्रवेश पर भी अंकुश लगेगा। पूर्व रेलवे का यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ भविष्य के अनुशासित और समृद्ध भारतीय रेलवे की नींव रख रहा है।

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