भागलपुर : कॉमरेड अर्जुन प्रसाद यादव की प्रथम पुण्यतिथि पर संकल्प सभा; हक की लड़ाई को निरंतर जारी रखने का लिया गया प्रण

भागलपुर। बिहार के मजदूर आंदोलनों के प्रखर चेहरे और शोषित-वंचितों की आवाज बुलंद करने वाले जुझारू नेता कॉमरेड अर्जुन प्रसाद यादव की प्रथम स्मृति सभा सोमवार को भागलपुर के सुरखीकल स्थित यूनियन कार्यालय में आयोजित की गई। भाकपा (माले) के पूर्व जिला कमिटी सदस्य और बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के पूर्व राज्य व जिला सचिव रहे अर्जुन प्रसाद यादव की याद में आयोजित इस कार्यक्रम ने एक बार फिर जिले के श्रमिक वर्ग को संगठित होने का संदेश दिया। इस अवसर पर भाकपा (माले) और ऐक्टू (AICCTU) के कार्यकर्ताओं ने उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति की प्रार्थना की और सबसे महत्वपूर्ण रूप से उनके द्वारा छोड़े गए संघर्ष के अधूरे कार्यों को मंजिल तक पहुँचाने का दृढ़ संकल्प लिया। यह आयोजन केवल एक श्रद्धांजलि सभा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वर्तमान समय में मजदूरों के सामने खड़ी चुनौतियों से लड़ने के लिए एक रणनीतिक विमर्श का केंद्र भी बन गया।

एक समर्पित जीवन: सरकारी सेवा से जन-संघर्ष के मैदान तक

​कॉमरेड अर्जुन प्रसाद यादव का जीवन संघर्ष और सादगी का एक ऐसा अनूठा उदाहरण था, जो आज की पीढ़ी के राजनैतिक कार्यकर्ताओं के लिए एक मार्गदर्शिका की तरह है। वे मूल रूप से कृषि विभाग में ग्रामसेवक (VLW) के पद पर कार्यरत थे। अक्सर देखा जाता है कि सरकारी सेवा में रहने वाले लोग सेवानिवृत्ति के बाद शांतिपूर्ण जीवन बिताना पसंद करते हैं, लेकिन अर्जुन प्रसाद यादव की मिट्टी अलग थी। अपने सेवा काल के दौरान ही उन्होंने कर्मचारियों की समस्याओं को समझा और कई कर्मचारी आंदोलनों का सफल नेतृत्व किया। वे जानते थे कि तंत्र के भीतर रहकर भी हक की आवाज उठाई जा सकती है।

​सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपनी दूसरी पारी और भी अधिक जोश के साथ शुरू की। उन्होंने महसूस किया कि संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों की तुलना में असंगठित क्षेत्र के मजदूर, विशेषकर निर्माण कार्य में लगे श्रमिक, सबसे अधिक शोषण का शिकार हैं। इसी सोच के साथ उन्होंने ऐक्टू के साथ मिलकर काम करना शुरू किया और बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के पहले जिला सचिव की जिम्मेदारी संभाली। उनकी मेहनत और संगठन क्षमता का ही परिणाम था कि उन्हें बाद में राज्य सचिव जैसी महत्वपूर्ण भूमिका दी गई। उन्होंने अपना पूरा जीवन इसी धुन में बिता दिया कि समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी उसका कानूनी और मानवीय अधिकार मिल सके।

मजदूरों के ‘मसीहा’ और सामाजिक सुरक्षा के पैरोकार

​स्मृति सभा की अध्यक्षता कर रहे भाकपा (माले) के नगर प्रभारी और ऐक्टू के राज्य सचिव मुकेश मुक्त ने अर्जुन प्रसाद यादव के योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आज निर्माण मजदूरों को जो भी सामाजिक सुरक्षा, बीमा या अन्य सरकारी लाभ मिल रहे हैं, उसके पीछे अर्जुन प्रसाद यादव जैसे नेताओं का दशकों लंबा संघर्ष छिपा है। उन्होंने सड़कों पर उतरकर प्रशासन को मजबूर किया कि निर्माण मजदूरों के लिए कल्याण बोर्ड का गठन हो और उन्हें सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिले।

​मुकेश मुक्त ने उनके व्यक्तित्व के उस पहलू की भी चर्चा की जो उन्हें दूसरे नेताओं से अलग बनाता था। उन्होंने कहा कि अर्जुन प्रसाद यादव अत्यंत मृदुभाषी और सरल स्वभाव के व्यक्ति थे। उनके पास जाने वाला कोई भी मजदूर कभी निराश होकर नहीं लौटता था। चाहे वह प्रशासनिक पेच हो या निजी समस्या, वे हमेशा एक अभिभावक की तरह खड़े रहते थे। मजदूरों और कर्मचारियों के बीच उनका सम्मान किसी पद के कारण नहीं, बल्कि उनके निष्काम व्यवहार और ईमानदारी के कारण था। आज जब पूंजीवादी व्यवस्था मजदूरों के अधिकारों को सिकोड़ रही है, तब अर्जुन प्रसाद यादव जैसे समर्पित नेताओं की कमी और भी अधिक खलती है।

वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य और संघर्ष की प्रासंगिकता

​श्रद्धांजलि सभा के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर भी जोर दिया कि कॉमरेड अर्जुन प्रसाद यादव को सच्ची श्रद्धांजलि तभी दी जा सकती है, जब हम उनके द्वारा स्थापित मूल्यों की रक्षा करें। वर्तमान दौर में श्रम कानूनों में किए जा रहे बदलावों और मजदूरों की छंटनी जैसी समस्याओं पर चिंता व्यक्त की गई। कार्यकर्ताओं ने संकल्प लिया कि वे गांव-गांव और मोहल्ले-मोहल्ले जाकर निर्माण मजदूरों को संगठित करेंगे और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करेंगे।

​ऐक्टू के जिला संयुक्त सचिव अमर कुमार और बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन के संयुक्त जिला सचिव चंचल पंडित ने कहा कि अर्जुन प्रसाद यादव ने हमें सिखाया था कि बिना संगठन के कोई भी लड़ाई नहीं जीती जा सकती। उन्होंने जिले के हर कोने में यूनियन की शाखाएं खड़ी कीं और मजदूरों को यह अहसास कराया कि वे भी इस देश के नागरिक हैं और उनका श्रम सम्मान के योग्य है। आज उनके न रहने पर यह जिम्मेदारी हम सभी की है कि हम उस मशाल को बुझने न दें जिसे उन्होंने अपनी मेहनत से जलाया था।

श्रद्धांजलि सभा में शामिल रहे प्रमुख गणमान्य

​सुरखीकल स्थित कार्यालय में आयोजित इस स्मृति दिवस कार्यक्रम में भागलपुर के विभिन्न क्षेत्रों से आए कार्यकर्ताओं की उपस्थिति रही। श्रद्धांजलि देने वालों में मुख्य रूप से निम्नलिखित नेता और कार्यकर्ता शामिल थे:

  • मुकेश मुक्त: ऐक्टू राज्य सचिव व भाकपा (माले) नगर प्रभारी।
  • अमर कुमार: ऐक्टू जिला संयुक्त सचिव।
  • चंचल पंडित: संयुक्त जिला सचिव, बिहार राज्य निर्माण मजदूर यूनियन।
  • लुटान तांती: भाकपा (माले) नसरतखानी ब्रांच सचिव।
  • पूनम देवी व बुधनी उरांव: नगर कमिटी सदस्य।

​इनके अलावा करण कुमार, कविता देवी, सुनील कुमार गुप्ता, किरण देवी, पार्वती देवी, चैतन्य कुमार यादव और प्रशांत किशोर जैसे सक्रिय कार्यकर्ताओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और कॉमरेड अर्जुन प्रसाद यादव के पदचिन्हों पर चलने की शपथ ली। कार्यक्रम के अंत में सभी ने एक स्वर में उनके द्वारा शुरू किए गए आंदोलनों को और अधिक तीव्र करने का निर्णय लिया।

निष्कर्ष की ओर: एक अमिट विरासत

​कॉमरेड अर्जुन प्रसाद यादव की प्रथम स्मृति सभा ने यह सिद्ध कर दिया कि वे भले ही शारीरिक रूप से हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और संघर्ष की गाथा आज भी भागलपुर के हवाओं में मौजूद है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि एक व्यक्ति यदि संकल्पित हो, तो वह पूरी व्यवस्था को बदलने की ताकत रख सकता है। निर्माण मजदूरों की छोटी-छोटी खुशियों और उनकी सुरक्षा के लिए लड़ी गई उनकी हर लड़ाई को आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेंगी।

​यूनियन कार्यालय में हुई यह सभा केवल एक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह मजदूरों के उस सामूहिक विश्वास का प्रतीक थी जिसे अर्जुन प्रसाद यादव ने सींचा था। भागलपुर के मजदूर वर्ग के लिए वे केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक भरोसा थे। आज उनके अनुयायियों ने यह तय किया है कि वे शोषण के खिलाफ अपनी आवाज को और बुलंद करेंगे, यही उस महान क्रांतिकारी को सबसे बड़ी और सच्ची श्रद्धांजलि होगी। मजदूरों की एकता और उनके संघर्ष का यह कारवां अब और भी मजबूती से आगे बढ़ेगा, यही आज की सभा का मुख्य संदेश रहा।

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