
समाचार के मुख्य बिंदु: अपनों के बीच शुरू हुई ‘सियासी’ जंग
- बड़ी मांग: बांका जदयू जिलाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार सिंह ने सांसद गिरधारी यादव की पार्टी सदस्यता रद्द करने के लिए आलाकमान को पत्र लिखा।
- गंभीर आरोप: विधानसभा चुनाव के दौरान सांसद पर अपने पुत्र चाणक्य प्रकाश को राजद (RJD) के टिकट पर बेलहर से चुनाव लड़ाने और विपक्षी दल का प्रचार करने का आरोप।
- जनता की नाराजगी: जिलाध्यक्ष का दावा— “जीतने के बाद सांसद ने क्षेत्र की सुध नहीं ली और सांसद कोटे की राशि का विकास कार्यों में उपयोग नहीं किया।”
- संसदीय कार्रवाई: जदयू संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सांसद को निलंबित करने की मांग की है।
- बहिष्कार: मुख्यमंत्री की ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत कटोरिया में आयोजित कार्यक्रम से भी सांसद को दूर रखा गया था।
- VOB इनसाइट: यह विवाद केवल एक जिलाध्यक्ष और सांसद की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह बांका में जदयू के भीतर ‘वर्चस्व’ और आगामी चुनावों के लिए ‘क्लीन-अप’ ऑपरेशन का संकेत है।
बांका / शंभूगंज | 27 मार्च, 2026
बिहार की राजनीति में ‘डबल इंजन’ की सरकार और गठबंधन धर्म की चर्चाओं के बीच बांका जिले से जदयू के भीतर एक बड़ा ‘विस्फोट’ हुआ है। बांका के वर्तमान सांसद गिरधारी यादव पर उनकी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार को शंभूगंज में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान जदयू जिलाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार सिंह ने सांसद पर ‘पार्टी विरोधी’ गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाते हुए उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने की मांग की है।
“पुत्र मोह” और “राजद प्रेम”: जिलाध्यक्ष के तीखे प्रहार
जिलाध्यक्ष अमरेंद्र कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता में सांसद गिरधारी यादव की कार्यशैली पर सिलसिलेवार हमले किए। उनके आरोपों का केंद्र सांसद का परिवार और उनकी कथित विपक्षी निष्ठा रही।
मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:
- विपक्ष के लिए काम: जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान गिरधारी यादव ने एनडीए के साथ होने के बावजूद अपने पुत्र चाणक्य प्रकाश को बेलहर विधानसभा सीट से राजद (RJD) के टिकट पर चुनाव लड़वाया।
- जदयू की सभाओं से दूरी: आरोप है कि चुनाव के दौरान सांसद ने जदयू या एनडीए की किसी भी आधिकारिक चुनावी सभा में हिस्सा नहीं लिया, बल्कि पर्दे के पीछे से राजद का प्रचार-प्रसार किया।
- विकास की तिलांजलि: जिलाध्यक्ष के अनुसार, चुनाव जीतने के बाद सांसद कभी क्षेत्र की जनता के बीच नहीं पहुँचे। उन्होंने सांसद कोटे से मिलने वाली करोड़ों की राशि का उपयोग भी बांका के विकास में नहीं किया, जिससे जनता में भारी आक्रोश है।
पुरानी रंजिश: लोकसभा टिकट से ही शुरू था ‘संग्राम’
अमरेंद्र कुमार सिंह ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि गिरधारी यादव के प्रति अविश्वास आज की बात नहीं है।
- मुख्यमंत्री से गुहार: पिछले लोकसभा चुनाव से पहले बांका के सभी 11 प्रखंड अध्यक्षों के साथ जिलाध्यक्ष पटना पहुँचे थे और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से गिरधारी यादव को दोबारा प्रत्याशी न बनाने की मांग की थी।
- मजबूरी में समर्थन: उस समय मुख्यमंत्री ने विशेष परिस्थितियों का हवाला देते हुए प्रत्याशी बदलने से इनकार कर दिया था। पार्टी के अनुशासन का पालन करते हुए कार्यकर्ताओं ने उन्हें जीत दिलाई, लेकिन अब धैर्य जवाब दे चुका है।
- डबल इंजन का सहारा: जिलाध्यक्ष ने तंज कसते हुए कहा कि जनता ने तो उन्हें पहले ही नकार दिया था, लेकिन ‘डबल इंजन’ (NDA गठबंधन) की लहर में वे बाल-बाल बच गए और विजयी हुए।
संवैधानिक और संगठनात्मक कार्रवाई की तैयारी
यह मामला अब केवल जिला स्तर तक सीमित नहीं रह गया है। पटना से लेकर दिल्ली तक इस पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
- लोकसभा अध्यक्ष को पत्र: जदयू संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामत ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को औपचारिक पत्र लिखकर गिरधारी यादव को निलंबित करने की मांग की है।
- समृद्धि यात्रा से दूरी: पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान कटोरिया में हुए सरकारी और सांगठनिक कार्यक्रम में सांसद को आमंत्रित नहीं किया गया था।
- एकजुटता: प्रेस वार्ता के दौरान प्रखंड जदयू उपाध्यक्ष दिनेश मंडल और पूर्व अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सहित कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं ने जिलाध्यक्ष की मांग का समर्थन किया।
VOB का नजरिया: बांका की राजनीति में बढ़ता ‘तापमान’
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि जदयू जिलाध्यक्ष का यह सार्वजनिक हमला एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।
- क्लीन इमेज की कोशिश: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अपनी पार्टी की ‘सुशासन’ वाली छवि को लेकर गंभीर हैं। अगर कोई सांसद विपक्षी दल (राजद) के साथ साठगांठ करता है, तो पार्टी उसे बर्दाश्त नहीं करेगी।
- अगले चुनाव की बिसात: जिलाध्यक्ष का यह बयान संकेत देता है कि बांका जदयू अब गिरधारी यादव के विकल्प की तलाश कर रही है।
- सांसद का पक्ष: अभी तक इस पूरे मामले पर सांसद गिरधारी यादव की ओर से कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है। उनके पक्ष के बिना यह विवाद एकतरफा लग सकता है, लेकिन ‘पुत्र मोह’ वाला तर्क राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा में है।
सुशासन और अनुशासन की अग्निपरीक्षा
बांका जदयू में मची यह रार अब आलाकमान के पाले में है। अगर गिरधारी यादव पर कार्रवाई होती है, तो यह बिहार की राजनीति में एक बड़ा संदेश होगा कि पार्टी हितों के ऊपर पारिवारिक हितों को रखने वाले नेताओं की जगह अब जदयू में नहीं है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस मामले में मुख्यमंत्री की अगली कार्रवाई, लोकसभा अध्यक्ष के फैसले और बांका जदयू के भीतर होने वाली हलचल की हर ताज़ा अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।


