विक्रमशिला सेतु संकट के बीच नई राहत: इंग्लिश फरक्का घाट से महादेवपुर घाट तक शुरू होगी जलयान सेवा

भागलपुर, 21 मई 2026। विक्रमशिला सेतु संकट के बीच भागलपुर और नवगछिया के बीच आवागमन को सुचारु बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन लगातार नई वैकल्पिक व्यवस्थाएं तैयार कर रहा है। इसी क्रम में अब इंग्लिश फरक्का घाट से महादेवपुर घाट तक जलयान सेवा शुरू करने की अनुमति दे दी गई है। प्रशासन के इस फैसले को क्षेत्र के व्यापार, माल परिवहन और आम जनजीवन के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।

भागलपुर समाहरणालय से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद गंगा नदी के रास्ते लोगों और वाहनों की आवाजाही को बढ़ावा दिया जा रहा है। पहले से ही बरारी घाट से महादेवपुर घाट तक कई नाव, स्टीमर और जलयान संचालित किए जा रहे हैं। अब इस व्यवस्था को और विस्तारित करते हुए इंग्लिश फरक्का घाट से महादेवपुर घाट तक जलयान संचालन की अनुमति प्रदान की गई है।

जानकारी के अनुसार झारखंड के साहिबगंज स्थित मेसर्स जय बजरंगबली स्टोन वर्क्स की मांग पर यह अनुमति दी गई है। कंपनी ने प्रशासन से अनुरोध किया था कि बरारी घाट के अलावा इंग्लिश फरक्का घाट से भी महादेवपुर घाट तक जल परिवहन की सुविधा उपलब्ध कराई जाए, ताकि मालवाहक गतिविधियों को सुचारु रूप से संचालित किया जा सके।

जिला प्रशासन ने इस मांग पर विचार करने के बाद जलयान संचालन की अनुमति दे दी। अधिकारियों का कहना है कि इससे न केवल व्यापारिक गतिविधियों को गति मिलेगी, बल्कि विक्रमशिला सेतु पर बढ़े दबाव को कम करने में भी मदद मिलेगी।

विक्रमशिला सेतु के पाया संख्या 133 में आई तकनीकी खराबी के बाद भागलपुर और सीमांचल क्षेत्र में यातायात व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई थी। भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगने के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबारियों और व्यापारियों को लंबी दूरी तय करनी पड़ रही थी। कई ट्रकों को दूसरे जिलों से घूमकर गुजरना पड़ रहा था, जिससे समय और परिवहन लागत दोनों बढ़ गए थे।

स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गंगा नदी को वैकल्पिक परिवहन मार्ग के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया। इसके बाद बरारी घाट से महादेवपुर घाट तक नाव, स्टीमर और कार्गो जहाज सेवा शुरू की गई। अब इंग्लिश फरक्का घाट से जलयान सेवा शुरू होने से यह नेटवर्क और मजबूत होगा।

अधिकारियों के अनुसार नई सेवा शुरू होने से विशेष रूप से पत्थर, निर्माण सामग्री और भारी माल की ढुलाई में सुविधा मिलेगी। साहिबगंज और आसपास के इलाकों से आने वाले मालवाहक वाहन अब जलमार्ग का उपयोग कर आसानी से गंगा पार कर सकेंगे।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु संकट के कारण व्यापार पर काफी असर पड़ा था। कई जरूरी सामानों की आपूर्ति में देरी हो रही थी। अब जलयान सेवा के विस्तार से राहत मिलने की उम्मीद है। व्यापारियों के अनुसार जल परिवहन सड़क मार्ग की तुलना में कई मामलों में अधिक किफायती और सुविधाजनक साबित हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में जल परिवहन की अपार संभावनाएं हैं। गंगा नदी के जरिए बड़े पैमाने पर माल और यात्री परिवहन विकसित किया जा सकता है। विक्रमशिला सेतु संकट के दौरान प्रशासन द्वारा उठाए गए कदम इस दिशा में महत्वपूर्ण पहल माने जा रहे हैं।

जिला प्रशासन ने कहा है कि जलयान सेवा के संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाएगा। घाटों पर प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती की जाएगी और यात्रियों तथा वाहन चालकों की सुविधा के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे।

इसके अलावा मेडिकल सहायता और आपातकालीन सेवाओं की व्यवस्था भी घाटों पर उपलब्ध रहेगी। प्रशासन ने कहा है कि जल परिवहन व्यवस्था को व्यवस्थित और सुरक्षित तरीके से संचालित करना प्राथमिकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा के रास्ते आवागमन शुरू होने से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है। पहले जहां लोगों को कई घंटे लंबा सफर तय करना पड़ रहा था, वहीं अब जलमार्ग से यात्रा अपेक्षाकृत आसान हो गई है।

इंग्लिश फरक्का घाट से महादेवपुर घाट तक जलयान सेवा शुरू होने के बाद सीमांचल और झारखंड के बीच व्यापारिक संपर्क भी मजबूत होने की उम्मीद है। इससे भागलपुर क्षेत्र के बाजारों को भी फायदा मिल सकता है।

प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विक्रमशिला सेतु पर बेली ब्रिज निर्माण कार्य भी तेजी से चल रहा है, लेकिन जब तक स्थायी समाधान पूरी तरह तैयार नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक जल परिवहन व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।

जिला प्रशासन लगातार नए विकल्पों पर काम कर रहा है ताकि लोगों को कम से कम परेशानी हो। अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर आने वाले दिनों में और भी जलयान सेवाएं शुरू की जा सकती हैं।

भागलपुर और सीमांचल क्षेत्र के लिए यह नई जलयान सेवा फिलहाल राहत की बड़ी खबर मानी जा रही है। व्यापारियों, वाहन चालकों और आम लोगों को उम्मीद है कि इससे यात्रा और माल ढुलाई दोनों आसान होंगे तथा क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां दोबारा सामान्य गति पकड़ सकेंगी।

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