अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बयान इन दिनों अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है। शुक्रवार को व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ कहा कि वह ईरान के साथ चल रहे संघर्ष में युद्धविराम (सीजफायर) के पक्ष में नहीं हैं।
ट्रंप ने कहा, “हम बातचीत कर सकते हैं, लेकिन मैं युद्धविराम नहीं चाहता। जब आप दूसरे पक्ष को पूरी तरह से कमजोर कर रहे हों, तब सीजफायर का कोई मतलब नहीं होता।” उनके इस बयान ने मिडिल ईस्ट में जारी तनाव को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप ने कहा कि यह एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है और समय आने पर यह खुद ही खुल जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है। ट्रंप ने खास तौर पर चीन और जापान का जिक्र करते हुए कहा कि अगर ये देश इसमें शामिल हों तो स्थिति बेहतर हो सकती है।
इसके अलावा, ट्रंप ने नाटो (NATO) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि संगठन मदद कर सकता है, लेकिन अब तक उसने ऐसा करने की हिम्मत नहीं दिखाई। उन्होंने ब्रिटेन की भी आलोचना करते हुए कहा कि उसे ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में तेजी दिखानी चाहिए थी।
जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद इज़रायल युद्ध खत्म करेगा, तो उन्होंने उम्मीद जताई कि ऐसा संभव है।
ट्रंप के इस बयान से साफ है कि मिडिल ईस्ट में तनाव कम होने के बजाय आने वाले समय में और बढ़ सकता है, खासकर जब उन्होंने युद्धविराम से साफ इनकार कर दिया है।


