
वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 16 जुलाई 2025 — अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष को रोकने का दावा किया है। शुक्रवार को व्हाइट हाउस में रिपब्लिकन सांसदों के साथ एक रात्रिभोज कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि मई में दोनों देशों के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें पांच लड़ाकू विमान मार गिराए गए थे। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वे विमान भारत के थे या पाकिस्तान के।
ट्रंप ने कहा,
“एक तरफ भारत था, दूसरी तरफ पाकिस्तान। दोनों के पास परमाणु हथियार हैं और वे एक-दूसरे पर हमले कर रहे थे। चार या पांच फाइटर जेट गिराए जा चुके थे। स्थिति बहुत गंभीर हो चुकी थी। हमने व्यापार के जरिये तनाव को कम किया।”
कांग्रेस का सवाल: मोदी संसद में जवाब दें
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान के बाद भारत में विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से संसद में स्पष्टीकरण मांगा है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ (पूर्व ट्विटर) पर लिखा:
“संसद के सत्र से ठीक पहले ट्रंप मिसाइल फिर से दागी गई। मोदी सरकार अब भी चुप क्यों है?”
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी प्रधानमंत्री से सवाल किया:
“मोदी जी, पांच जहाजों का सच क्या है? देश को जानने का हक है!”
पहलगाम आतंकी हमले के बाद बढ़ा था तनाव
गौरतलब है कि अप्रैल में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। भारत ने इस हमले का सीधा जिम्मा पाकिस्तान पर डाला और मई में पाकिस्तानी आतंकी ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इसी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और सीमावर्ती इलाकों में सैन्य गतिरोध देखा गया।
भारत ने नकारा अमेरिकी हस्तक्षेप
भारत सरकार ने ट्रंप के पहले भी किए गए दावों को खारिज किया था। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सभी मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय बातचीत से होना चाहिए, और किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता की जरूरत नहीं है।
ट्रंप का दावा: “छह महीने में कई युद्ध रोके”
डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनके कार्यकाल में अमेरिका ने केवल छह महीनों में कई गंभीर युद्धों को रोका, जो अन्य प्रशासन वर्षों में नहीं कर पाए। उन्होंने कहा:
“हमें गर्व है कि हमने कई युद्ध रुकवाए और दुनिया को बड़े सैन्य संकट से बाहर निकाला।”
ट्रंप के इन बयानों ने एक बार फिर भारत की विदेश नीति और आंतरिक सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि क्या मोदी सरकार संसद में इस पर जवाब देती है या नहीं।


