
सारण: बिहार के सारण जिले के मांझी प्रखंड अंतर्गत तख्त बरवां गांव की बेटी दीक्षा कुमारी ने एमबीबीएस की डिग्री हासिल कर अपने गांव की पहली महिला डॉक्टर बनने का गौरव प्राप्त किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे परिवार, गांव और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।
दीक्षा ने हरियाणा के अंबाला स्थित महर्षि मार्कण्डेय विश्वविद्यालय से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। मेडिकल शिक्षा के दौरान उन्होंने सोनीपत और करनाल में भी प्रशिक्षण प्राप्त किया। उनकी सफलता को ग्रामीण बेटियों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि माना जा रहा है।
दीक्षा बताती हैं कि जब वह आठवीं कक्षा में थीं, तब अपनी दादी हीरा देवी को बीमारी के दौरान असहाय देखकर उनके मन में डॉक्टर बनने का सपना जगा। तभी उन्होंने तय कर लिया कि वह डॉक्टर बनकर जरूरतमंद और विशेष रूप से बुजुर्ग मरीजों की सेवा करेंगी।
दीक्षा ने कहा, “जब मैं आठवीं कक्षा में थी, तब अपनी बीमार दादी को देखकर डॉक्टर बनने का संकल्प लिया था। अब मेरी कोशिश रहेगी कि जरूरतमंद लोगों को बेहतर और संभव हो सके तो निःशुल्क चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराऊं।”
बेटी की सफलता से परिवार बेहद गौरवान्वित है। पिता देवेंद्र सिंह, जो एक निजी कंपनी में महाप्रबंधक (जीएम) के पद पर कार्यरत हैं, और माता अमृता सिंह ने इस उपलब्धि पर भगवान का आभार व्यक्त करते हुए गांव के प्रसिद्ध बाबा सुखारी नाथ मंदिर में रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना कराई।
दीक्षा के दादा उमाशंकर सिंह (जवाहर सिंह) ने कहा कि पोती की सफलता से उनका सपना पूरा हुआ है और अब उन्हें विश्वास है कि वह समाज की सेवा करेगी। वहीं चचेरे दादा धर्मेंद्र कुमार सिंह ने दीक्षा को आगे एमडी कराने तथा परिवार के अन्य बच्चों को भी चिकित्सा क्षेत्र में आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।
दीक्षा की इस उपलब्धि पर समाजसेवी, जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उन्हें बधाई दी। लोगों ने इसे पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण बताया।
दीक्षा की सफलता यह संदेश देती है कि कठिन परिश्रम, परिवार के सहयोग और दृढ़ संकल्प के बल पर सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं।


