
पटना | बिहार की सियासत में शुक्रवार को उस समय हलचल तेज हो गई, जब पूर्व मुख्यमंत्री एवं जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार की अचानक तबीयत बिगड़ने की सूचना सामने आई। इसके बाद उनके आवास के दरवाजे बंद कर दिए गए और मिलने पहुंचे नेताओं को अंदर जाने की अनुमति नहीं मिली।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ, जब जेडीयू के बड़ी संख्या में नाराज़ नेता नई प्रदेश कमेटी के गठन में कथित अनियमितताओं और संगठन में बढ़ते असंतोष की शिकायत लेकर नीतीश कुमार से मिलने पहुंचे थे। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या वास्तव में तबीयत खराब हुई या फिर असंतुष्ट नेताओं से मुलाकात टाल दी गई।
प्रदेश कमेटी गठन के बाद बढ़ा विवाद
दो दिन पहले ही जेडीयू की नई प्रदेश कमेटी की घोषणा की गई थी। नई सूची सामने आने के बाद पार्टी के भीतर विरोध तेज हो गया। कई नेताओं का आरोप है कि संगठन में लंबे समय से सक्रिय कार्यकर्ताओं की उपेक्षा कर कुछ चुनिंदा लोगों को तरजीह दी गई है।
नाराज़ नेताओं का दावा है कि प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा और अन्य नेताओं के प्रभाव में संगठन का गठन किया गया है, जिससे जमीनी कार्यकर्ताओं में असंतोष फैल गया है।
करीब 50 नेता मिलने पहुंचे, लेकिन नहीं मिली अनुमति
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार को लगभग 50 जेडीयू नेता नीतीश कुमार से मुलाकात कर अपनी शिकायतें रखना चाहते थे। हालांकि, उन्हें आवास में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली। इसके बाद पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को लेकर चर्चाएं और तेज हो गईं।
एक दिन पहले आवास पर हुआ था विवाद
गुरुवार को भी नीतीश कुमार के आवास पर संगठन को लेकर तनावपूर्ण स्थिति बन गई थी। पार्टी के एक नेता अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे, जहां उनकी एमएलसी संजय गांधी से तीखी बहस हो गई।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि सुरक्षा कर्मियों को हस्तक्षेप करना पड़ा। बाद में संबंधित नेता ने भी सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उनकी बहस हुई थी, हालांकि उन्होंने विस्तृत टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
प्रदेश कमेटी पर उठ रहे सवाल
पार्टी के असंतुष्ट नेताओं का आरोप है कि नई प्रदेश कमेटी में कई ऐसे लोगों को जिम्मेदारी दी गई है, जिन पर पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप लग चुके हैं। वहीं, वर्षों से संगठन के लिए काम करने वाले कई पुराने नेताओं को सूची से बाहर कर दिया गया।
कुछ नेताओं का यह भी आरोप है कि विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी के खिलाफ काम करने वालों को संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गई हैं, जबकि समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है।
संगठन के भीतर बढ़ती बेचैनी
नई प्रदेश कमेटी को लेकर उठे विवाद ने जेडीयू के भीतर बढ़ती असंतुष्टि को सार्वजनिक कर दिया है। पार्टी के कई वरिष्ठ और पुराने नेताओं के नाम नई सूची से बाहर होने के बाद संगठनात्मक फैसलों पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि नीतीश कुमार इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और असंतुष्ट नेताओं की शिकायतों पर पार्टी नेतृत्व आगे क्या कदम उठाता है।


