
भागलपुर: गंगा नदी के संरक्षण और उसके प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में भागलपुर में एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय परियोजना की शुरुआत होने जा रही है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों के अनुरूप गंगा तट पर एक बड़े बायोडायवर्सिटी पार्क के निर्माण की योजना तैयार की गई है। इसके लिए कम से कम 50 एकड़ भूमि की आवश्यकता होगी। भूमि चयन की प्रक्रिया तेज करने के उद्देश्य से जल्द ही जिला प्रशासन और वन विभाग के अधिकारियों की संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार प्रस्तावित पार्क का निर्माण गंगा के तटीय क्षेत्र में किया जाएगा, ताकि नदी के प्राकृतिक आवास, जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन को संरक्षित किया जा सके। इस परियोजना को गंगा संरक्षण अभियान के तहत एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
जिलाधिकारी को भेजा गया प्रस्ताव
जानकारी के अनुसार वन प्रमंडल पदाधिकारी ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पत्र भेजकर उपयुक्त भूमि चिन्हित करने की प्रक्रिया में तेजी लाने का आग्रह किया है। साथ ही जिला स्तर पर सभी संबंधित विभागों की बैठक बुलाने का भी अनुरोध किया गया है, ताकि परियोजना की रूपरेखा तय कर आगे की कार्रवाई शुरू की जा सके।
वन विभाग का कहना है कि एनजीटी द्वारा गठित रिवर रिजुवनेशन कमेटी के निर्देशों का पालन करना प्राथमिकता है। इसी के तहत भूमि चयन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और निर्माण की रूपरेखा तैयार की जाएगी।
गंगा तट पर विकसित होगा पार्क
प्रस्तावित बायोडायवर्सिटी पार्क गंगा नदी के किनारे विकसित किया जाएगा। इसका उद्देश्य नदी के आसपास के प्राकृतिक वातावरण को संरक्षित करना, मिट्टी के कटाव को कम करना और स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा देना है। अधिकारियों का मानना है कि इस परियोजना से गंगा तटीय क्षेत्रों की पारिस्थितिकी व्यवस्था को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
कम से कम 50 एकड़ भूमि की जरूरत
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार इस पार्क के निर्माण के लिए न्यूनतम 50 एकड़ भूमि आवश्यक होगी। प्रशासन अब ऐसे उपयुक्त स्थानों की तलाश में जुट गया है, जहां पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप इस परियोजना को विकसित किया जा सके। भूमि चयन के बाद निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
क्या होगा बायोडायवर्सिटी पार्क का लाभ?
प्रस्तावित पार्क केवल हरियाली बढ़ाने की परियोजना नहीं होगा, बल्कि यह गंगा के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
- स्थानीय पेड़-पौधों, वनस्पतियों और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का संरक्षण होगा।
- विलुप्त या संकटग्रस्त स्थानीय प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन में सहायता मिलेगी।
- वायु और जल की गुणवत्ता में सुधार के साथ पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होगा।
- शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और आम लोगों के लिए पर्यावरण शिक्षा और जागरूकता का प्रमुख केंद्र विकसित होगा।
- गंगा किनारे होने वाले भूमि कटाव को रोकने और नदी तंत्र को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना समयबद्ध तरीके से पूरी होती है, तो भागलपुर गंगा संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मॉडल के रूप में उभर सकता है। इससे न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भविष्य में इको-टूरिज्म और शोध गतिविधियों को भी नई दिशा मिलेगी। जिला प्रशासन और वन विभाग अब भूमि चयन की प्रक्रिया पूरी कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जल्द धरातल पर उतारने की तैयारी में जुटे हैं।


