देसी मखाना, ग्लोबल पहचान: दरभंगा के श्रवण कुमार ने दिलाया अंतरराष्ट्रीय स्वाद

कॉरपोरेट करियर छोड़ ‘मखाना वाला’ ब्रांड को बनाया पैन इंडिया से अमेरिका तक प्रसिद्ध

पटना, 28 जून।दरभंगा के युवा उद्यमी श्रवण कुमार रॉय ने यह सिद्ध कर दिखाया है कि देसी उत्पादों को भी वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है। मात्र ₹15,000 से शुरू किए गए उनके स्टार्टअप “मखाना वाला” ने आज न केवल भारत बल्कि अमेरिका में भी बाज़ार बना लिया है।


कॉरपोरेट पैकेज छोड़ा, देसी ब्रांड चुना

श्रवण कुमार ने एक मल्टीनेशनल कंपनी की ₹8 लाख सालाना की नौकरी छोड़कर मिथिला के पारंपरिक मखाना को ब्रांडेड रूप में प्रस्तुत करने का संकल्प लिया। आज “एमबीए मखानावाला” ब्रांड के नाम से उनके उत्पाद देश-विदेश में लोकप्रिय हो चुके हैं।


G-20 सम्मेलन से दरभंगा एयरपोर्ट तक

  • G-20 सम्मेलन में मखाने से बने विशेष व्यंजनों की प्रस्तुति
  • दरभंगा एयरपोर्ट पर ‘मखाना सेंटर’ की स्थापना
  • ब्रांड के तहत मखाना डोसा, मखाना कुकीज़, खीर, और अन्य हेल्दी स्नैक्स की रेंज उपलब्ध

खाने में इनोवेशन: देसी स्वाद को नया ट्विस्ट

श्रवण ने पारंपरिक मखाने को नए स्वादों के साथ जोड़ते हुए डोसा, ढोकला और अन्य भारतीय व्यंजनों में इसका अनूठा फ्लेवर विकसित किया। यह मॉडल अब रेस्टोरेंट सेक्टर में भी अपनाया जा रहा है।


तीन बार आईआईटी फेल, लेकिन उद्यमिता में टॉप रैंक

श्रवण खुद बताते हैं कि वे तीन बार IIT प्रवेश परीक्षा में असफल हुए थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। यह असफलता ही उनकी प्रेरणा बनी और मखाना बेचने से शुरू हुआ उनका सफर आज एक ब्रांड की पहचान बन गया है।


100 से अधिक परिवारों को मिला रोजगार

  • प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से 100+ परिवारों को मिला आजीविका का सहारा
  • पैकेजिंग से लेकर डिलीवरी तक ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ी
  • दरभंगा, मधुबनी और सहरसा क्षेत्र के मखाना उत्पादकों को सीधा लाभ

संघर्ष और सम्मान: एक प्रेरणादायक यात्रा

प्रमुख चुनौतियां:

  • पारिवारिक असहमति और आर्थिक संकट
  • बैंक लोन में अड़चन
  • कोविड लॉकडाउन की बाधाएं

प्रमुख उपलब्धियां:

  • MSME ऑनर अवार्ड 2021
  • जिला आंत्रप्रेन्योरशिप अवार्ड 2022
  • भारत सरकार द्वारा जीआई टैग का अधिकृत उपयोगकर्ता

बिहार से अमेरिका तक: एक देसी कहानी की वैश्विक उड़ान

श्रवण कुमार की यह सफलता सिर्फ एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि बिहार के पारंपरिक उत्पादों की ताकत का प्रतीक है। मखाना आज वैश्विक बाजारों में जगह बना चुका है और मिथिला की पहचान को नई ऊंचाई दे रहा है।


 

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