
छपरा, बिहार के छपरा में आयोजित जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री का कड़ा रुख देखने को मिला। भूमि विवाद से जुड़े मामलों में लगातार मिल रही शिकायतों पर उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि गलत जमाबंदी और अवैध कब्जे के मामलों में सीधे एफआईआर दर्ज की जाए।
जनसंवाद में उठे जमीन विवाद के गंभीर मामले
भूमि सुधार विभाग की पहल पर आयोजित इस जनसंवाद कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। कई फरियादियों ने जमीन से जुड़े विवाद, गलत रिकॉर्ड और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर शिकायतें दर्ज कराईं।
इसी दौरान एक व्यक्ति ने उपमुख्यमंत्री के सामने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि पिछले करीब पांच वर्षों से वह गलत जमाबंदी के कारण परेशान हैं। उनके अनुसार, उनकी पैतृक जमीन पर अवैध कब्जा कर पक्का मकान तक बना लिया गया है, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अधिकारियों से जवाब-तलब, जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए विजय सिन्हा ने मौके पर मौजूद अंचलाधिकारी से जवाब मांगा और पूछा कि आखिर किस आधार पर गलत जमाबंदी दर्ज की गई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने निर्देश दिया कि पूरे मामले की विस्तृत जांच कर यह तय किया जाए कि गलती किस स्तर पर हुई है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।
‘गलती मिली तो तय होगी जिम्मेदारी’
डिप्टी सीएम ने साफ कहा कि अगर जांच में किसी अधिकारी की लापरवाही या मिलीभगत सामने आती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि वास्तविक जमीन मालिक को न्याय दिलाना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
अवैध कब्जे पर सीधे कार्रवाई के निर्देश
विजय सिन्हा ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि यदि किसी ने अवैध रूप से जमीन पर कब्जा कर निर्माण किया है, तो उसके खिलाफ तुरंत कानूनी कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में देरी या ढिलाई बिल्कुल स्वीकार नहीं की जाएगी।
लोगों में जगी उम्मीद
डिप्टी सीएम के सख्त रुख के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों में उम्मीद जगी है कि लंबे समय से लंबित भूमि विवादों का अब तेजी से समाधान हो सकेगा।
प्रशासन को चेतावनी, काम में देरी बर्दाश्त नहीं
कार्यक्रम के अंत में उपमुख्यमंत्री ने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता की शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निपटारा किया जाए। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
फिर उठे सवाल: जमीन विवादों में क्यों होती है देरी?
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जमीन से जुड़े मामलों में आम लोगों को न्याय पाने के लिए वर्षों तक इंतजार क्यों करना पड़ता है। अब देखना होगा कि डिप्टी सीएम के निर्देशों के बाद प्रशासनिक व्यवस्था में कितना बदलाव आता है।


