डेहरी में मानवता शर्मसार: बाजार गई नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म, आरोपित छोटन कुमार त्वरित गिरफ्तार, पॉक्सो एक्ट के तहत विधिक कार्रवाई शुरू

डेहरी/सासाराम, 19 मई 2026। रोहतास जिले के अंतर्गत आने वाले डेहरी प्रक्षेत्र के शहरी इलाके में महिला सुरक्षा और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देने वाली एक अत्यंत वीभत्स, निंदनीय और शर्मनाक वारदात प्रकाश में आई है। रविवार की देर शाम एक मासूम नाबालिग बच्ची को हवस का शिकार बनाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसके बाद संपूर्ण स्थानीय प्रक्षेत्र के भीतर तीव्र आक्रोश, सामाजिक चिंता और गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है। इस हृदयविदारक घटना की आधिकारिक सूचना मिलते ही डेहरी नगर थाना पुलिस ने संवेदनशीलता और कड़े विधिक कार्य-अनुशासन का परिचय देते हुए त्वरित दंडात्मक कार्रवाई संधारित की। पुलिस के विशेष खोजी दस्ते ने बिना कोई व्यावहारिक समय गंवाए जाल बिछाकर घटना में नामजद मुख्य आरोपित युवक को कुछ ही घंटों के भीतर उसके संभावित ठिकाने से दबोच कर विधिक अभिरक्षा में ले लिया है। इस त्वरित पुलिसिया दबिश के कारण प्रक्षेत्र के भीतर कानून-व्यवस्था की अवस्थिति को अनियंत्रित होने से समय रहते कड़ाई से ब्लॉक कर दिया गया।

बाजार जाने के क्रम में अपहरण सह दुष्कर्म का वीभत्स विन्यास

​इस दुखद और संवेदनशील घटनाक्रम के संदर्भ में संकलित किए गए प्राथमिक विवरणों और विधिक संचिकाओं के अनुसार, पीड़ित नाबालिग बच्ची रविवार की देर शाम अपने आवासीय परिसर से घरेलू उपयोग की आवश्यक सामग्रियों की खरीद-बिक्री के लिए स्थानीय मुख्य बाजार की ओर रवाना हुई थी। शाम के समय सड़कों पर आंशिक चहल-पहल के बीच डेहरी नगर थाना अंतर्गत जक्की बिगहा मोहल्ले का रहने वाला उद्दंड युवक छोटन कुमार पूर्व की योजना के तहत घात लगाए बैठा था। जैसे ही बच्ची सुनसान संरेखणों और मुख्य मार्ग के एक एकांत मोड़ के समीप पहुंची, आरोपित छोटन कुमार ने उसकी लाचारी और अकेलेपन का अनुचित लाभ उठाते हुए उसे बहला-फुसलाकर या डरा-धमकाने की प्रविष्टि के तहत किसी अन्य गुप्त और सुनसान स्थान की ओर जबरन स्थानांतरित कर दिया।

​उस एकांत और वीरान स्थान पर आरोपित ने मानवीय संवेदनाओं और कानून के कड़े खौफ का पूरी तरह परित्याग करते हुए मासूम नाबालिग बच्ची के साथ जबरन दुष्कर्म (यौन उत्पीड़न) की जघन्य वारदात को अंजाम दिया। इस वीभत्स आघात के कारण बच्ची गंभीर रूप से शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की अवस्थिति में चली गई। वारदात को मुकम्मल करने के बाद आरोपित युवक ने पीड़ित बच्ची को विधिक कानूनी कार्रवाई न करने की धमकी देते हुए मौके से फरार होने का प्रयास किया, परंतु रोती-बिलखती मासूम बच्ची ने किसी तरह अपने साहस को संचित किया और अपने पैतृक विन्यास (घर) की ओर वापस लौटी।

परिजनों का त्वरित संज्ञान और डेहरी नगर थाने में विधिक शिकायत

​अत्यंत बेसुध, धूल-धूसरित और डरी-सहमी अवस्था में जब नाबालिग बच्ची अपने घर के मुहाने पर पहुंची, तो उसकी शारीरिक स्थिति को देखकर माता-पिता और परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। आंतरिक संवेगात्मक माहौल के बीच जब माता-पिता ने आत्मीयता और कड़ाई के साथ बच्ची को ढांढस बंधाकर पूरी स्थिति को समझने का प्रयास किया, तो पीड़ित बच्ची ने अपने साथ घटित हुए इस घिनौने विलेख और जक्की बिगहा निवासी आरोपित छोटन कुमार के क्रूर कृत्य की बिंदुवार जानकारी रोते हुए साझा की।

​मासूम के साथ हुई इस बर्बरता को सुनने के बाद परिजनों का आक्रोश और दुख चरम पर संधारित हो गया। उन्होंने बिना किसी सामाजिक संकोच या अनावश्यक लिपिकीय देरी के इस विसंगति के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ने का कड़ा नीतिगत निर्णय लिया। परिजन अविलंब पीड़ित बच्ची को लेकर डेहरी नगर थाने पहुंचे और वहां तैनात महिला पुलिस अधिकारियों व थाना प्रभारी को घटना की लिखित विरणी हस्तगत कराई। एक नाबालिग बच्ची से जुड़े इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए थाना परिसर के भीतर तुरंत आपातकालीन रेड अलर्ट सक्रिय किया गया और वरीय पुलिस अधिकारियों को मामले के इनपुट्स डिजिटल ग्रिड के माध्यम से प्रेषित किए गए।

पुलिस का कड़ा रणनीतिक चक्रव्यूह: आरोपित छोटन कुमार सलाखों के पीछे

​महिला एवं बाल सुरक्षा के कड़े कानूनी प्रावधानों के आलोक में डेहरी नगर थाना पुलिस ने इस मामले में अभूतपूर्व मुस्तैदी का परिचय दिया। लिखित आवेदन प्राप्त होते ही पुलिस कप्तानों के निर्देश पर एक विशेष कड़क छापेमारी टीम का गठन किया गया, जिसमें महिला पुलिस कर्मियों और जासूसी विंग के तकनीकी प्रबंधकों को शामिल किया गया। पुलिस की टीम ने आरोपित के मूल निवास स्थान जक्की बिगहा प्रक्षेत्र की चारों तरफ से घेराबंदी कर दी।

​पुलिस के बूटों की कड़क धमक और खुफिया इनपुट्स के दबाव के कारण आरोपित छोटन कुमार को शहर से बाहर भागने का कोई विधिक मार्ग हस्तगत नहीं हो सका। महज कुछ ही घंटों के भीतर पुलिस की रेस्क्यू और रेडिंग टीम ने आरोपित को एक छिपे हुए ठिकाने से रंगे हाथ दबोच कर अपनी विधिक अभिरक्षा में ले लिया। पुलिस मुख्यालय के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपित युवक से नगर थाने के कड़े विमर्श कक्ष में ले जाकर सघन पूछताछ की गई है, जहां उसने प्राथमिक साक्ष्यों के सामने अपने इस विधिक अपराध को स्वीकार किया है। पुलिस ने उसके पास से घटना के समय प्रयुक्त मोबाइल और अन्य तकनीकी विलेखों को भी अपने नियंत्रण में ले लिया है।

सदर अस्पताल सासाराम में मेडिकल परीक्षण और पॉक्सो एक्ट की सख्त कड़ियां

​पीड़ित बच्ची को विधिक न्याय दिलाने और न्यायालय के समक्ष अकाट्य वैज्ञानिक साक्ष्य प्रस्तुत करने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन ने त्वरित गति से मेडिकल प्रोटोकॉल की प्रणालियों को सक्रिय किया। डेहरी नगर थाने की महिला पुलिस अभिरक्षा के तहत पीड़ित नाबालिग बच्ची को ससमय रोहतास जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल, सासाराम के विशेष फॉरेंसिक और गायनोकोलॉजी वार्ड में स्थानांतरित कराया गया। सदर अस्पताल के विशेषज्ञ डॉक्टरों के एक पैनल द्वारा बच्ची की संपूर्ण शारीरिक, चिकित्सीय और फॉरेंसिक जांच (मेडिकल एग्जामिनेशन) पूरी कड़ाई और वैज्ञानिक शुचिता के साथ मुकम्मल की गई है। इस चिकित्सीय विलेख के पूर्ण होने और प्राथमिक उपचार के उपरांत बच्ची को उसके माता-पिता और परिजनों के सुरक्षित संरक्षण में सौंप दिया गया है, जहां महिला पुलिस की काउंसलिंग विंग द्वारा बच्ची को मानसिक अवसाद से बाहर निकालने के उपाय संधारित किए जा रहे हैं।

​कानूनी मोर्चे की बात करें तो डेहरी नगर थाना पुलिस ने इस संदर्भ में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत और कड़ी धाराओं के साथ-साथ विशेष लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो एक्ट – POCSO Act) के तहत एक सुदृढ़ और गैर-जमानती प्राथमिकी दर्ज की है। इस कड़े कानून के शामिल होने के कारण अब आरोपित को विधिक रूप से कोर्ट से बेल मिलना पूरी तरह से ब्लॉक हो चुका है। पुलिस के आला नीति-नियोजकों ने स्पष्ट किया है कि सासाराम सदर अस्पताल से प्राप्त होने वाली अंतिम मेडिकल रिपोर्ट और फॉरेंसिक नमूनों की रासायनिक जांच रिपोर्ट को केस डायरी के मुख्य विन्यास के साथ एकीकृत किया जाएगा। इस मामले के अनुसंधान के लिए एक विशेष महिला पुलिस उपाधीक्षक को मॉनिटरिंग का जिम्मा सौंपा गया है, जिसका मुख्य ध्येय आगामी निश्चित दिनों के भीतर न्यायालय के समक्ष एक मजबूत चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर स्पीडी ट्रायल (त्वरित सुनवाई) के माध्यम से दोषी छोटन कुमार को कानून की किताब में दर्ज अधिकतम व कड़े दंडात्मक विलेखों के तहत सलाखों के पीछे संधारित कराना है।

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