बिहार की कानून व्यवस्था पर सियासी घमासान: तेजस्वी यादव ने दागे गंभीर सवाल, सरकार ने गिनाए तकनीकी बदलाव और कड़े एक्शन

पटना, 19 मई 2026। बिहार के प्रादेशिक शासन और राजनीतिक गलियारों में विधि-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा के मानकों को लेकर एक बड़ा और तीखा वैचारिक टकराव सतह पर आ गया है। राज्य की कानून व्यवस्था की वर्तमान अवस्थिति और आपराधिक विचलनों के आंकड़ों को आधार बनाकर विपक्ष ने सत्तासीन गठबंधन के खिलाफ एक व्यापक और आक्रामक मोर्चा खोल दिया है। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य सरकार की प्रशासनिक कार्यशैली पर कड़े नीतिगत सवालिया निशान खड़े करते हुए सीधे तौर पर पूछा है कि सूबे के भीतर पनप रही इस बदहाल और असुरक्षित कानून व्यवस्था का असली विधिक दोषी कौन है। सोमवार को पटना मुख्यालय से एक विस्तृत और कड़ा आधिकारिक बयान जारी करते हुए प्रतिपक्ष के नेता ने राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के सांख्यिकीय दस्तावेजों का हवाला दिया और दावा किया कि वर्तमान समय में बिहार आपराधिक सूचकांकों के मामले में देश के शीर्ष पायदानों पर संधारित हो चुका है, जो सूबे की प्रशासनिक विफलता का प्रत्यक्ष विलेख है।

​विपक्ष के इन गंभीर और तीखे हमलों के समानांतर, राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय ने भी अपनी रक्षात्मक और सुधारात्मक कड़ियों को पूरी कड़ाई के साथ पटल पर रखा है। शासन का स्पष्ट मत है कि राज्य के भीतर सुसुज्जित सुशासन को बनाए रखने के लिए पुलिस बल के हाथों को पूरी तरह से स्वतंत्र कर दिया गया है और अपराधियों के खिलाफ उनकी ही भाषा में कड़े दंडात्मक विलेख तैयार किए जा रहे हैं। इस राजनीतिक और प्रशासनिक रस्साकशी ने संपूर्ण राज्य के भीतर कानून व्यवस्था की समीक्षा और सुरक्षात्मक ग्रिडों के आधुनिकीकरण पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

अपराध के आंकड़ों में रिकॉर्ड वृद्धि और दहशत का वातावरण: विपक्ष का कड़ा प्रहार

​नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने अपने जारी आधिकारिक बयान के भीतर पिछले कतिपय महीनों के दौरान घटित हुई आपराधिक वारदातों का एक विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने कड़े शब्दों में आरोप लगाया कि पिछले महज एक माह की अल्पावधि के भीतर संपूर्ण बिहार के विभिन्न प्रमंडलों में दुष्कर्म, मर्डर, सरेराह लूटपाट, डकैती और चोरी की घटनाओं में एक अप्रत्याशित व रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि दर्ज की गई है। विपक्ष के अनुसार, सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इतनी गंभीर विसंगतियों के बावजूद शासन का शीर्ष नेतृत्व अपनी प्रशासनिक गलतियों और नीतिगत खामियों को स्वीकार करने के लिए कतई तैयार नजर नहीं आ रहा है।

​बयान में यह गंभीर आरोप भी मढ़ा गया है कि बिहार की सड़कों पर वर्तमान समय में सत्ता संरक्षित और बेखौफ घूम रहे अपराधियों का एक ऐसा सिंडिकेट सक्रिय हो चुका है, जिसके मन से कानून का विधिक खौफ पूरी तरह ब्लॉक हो चुका है। इसके परिणामस्वरूप, मुख्य शहरी बाजारों और सुदूर ग्रामीण अंचलों में व्यापारियों, स्कूल-कॉलेजों के छात्रों, शिक्षकों, आम राहगीरों और महिलाओं को कहीं भी और कभी भी अपराधियों द्वारा निशाना बनाकर गोली मारी जा रही है। विभिन्न जिलों में दिनदहाड़े होने वाली अंधाधुंध फायरिंग, छिनतई, बड़े व्यावसायिक बैंकों में डकैती और राहगीरों से हथियार के बल पर लूटपाट जैसी संगीन वारदातों के कारण आम जनमानस के भीतर एक गहरे डर, असुरक्षा और मानसिक दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है, जिसने नागरिकों के ‘ईज ऑफ लिविंग’ के विन्यास को पूरी तरह से प्रभावित कर दिया है।

मद्यनिषेध कानून के प्रवर्तन पर तल्ख टिप्पणी और पुलिसिंग की विसंगतियां

​प्रशासनिक मशीनरी और थानों के स्तर पर जारी दैनिक पुलिसिंग की प्रविधियों पर तीखा कटाक्ष करते हुए तेजस्वी यादव ने राज्य के मद्यनिषेध (शराबबंदी) कानून के क्रियान्वयन की विधा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य का पूरा पुलिस महकमा और जमीनी खुफिया तंत्र बुनियादी कानून-व्यवस्था को संधारित करने और पेशेवर अपराधियों की धरपकड़ करने के अपने मूल विधिक उत्तरदायित्वों से पूरी तरह भटक चुका है। विपक्ष के अनुसार, थानों की बड़ी ऊर्जा और संसाधन केवल अवैध शराब की तस्करी को रोकने, ट्रकों की चेकिंग करने और कतिपय विसंगतिपूर्ण विलेखों के संधारण में ही ‘व्यस्त और मस्त’ हैं, जिसके कारण मुख्यधारा के अपराधियों को अपनी गतिविधियों का विस्तार करने का एक खुला और सुगम गलियारा हस्तगत हो गया है।

विपक्ष के मुख्य वक्तव्य का अंश:

“बिहार के भीतर वर्तमान समय में विधि-व्यवस्था का ढांचा पूरी तरह से चरमरा चुका है और सबसे बड़ी विडंबना यह है कि शासन के नीति-नियोजकों को आम जनता की इस शारीरिक व आर्थिक प्रताड़ना की कोई परवाह नहीं है। सरकार कानून व्यवस्था को लेकर रत्ती भर भी गंभीर नहीं दिखाई दे रही है, जिसका खामियाजा निर्दोष नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है।”

 

सरकार का संतुलित पलटवार: अपराधियों के खिलाफ जीरो टॉलरेंस और फ्री-हैंड की नीति

​विपक्ष द्वारा खड़े किए गए इस आक्रामक विमर्श के जवाब में सरकार के आला नीति-नियोजकों और गृह विभाग के सूत्रों ने राज्य में कानून-व्यवस्था की अवस्थिति को पूरी तरह से नियंत्रित, सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने का सुदृढ़ दावा पेश किया है। शासन के कप्तानों का साफ मत है कि अपराधियों और माफियाओं के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहिष्णुता) की नीति को कड़ाई से धरातल पर उतारा जा रहा है। सरकार के गठन के तुरंत बाद मुख्यमंत्री के स्तर से यह विधिक आदेश जारी किया जा चुका है कि अपराधियों को किसी भी प्रकार का राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण हस्तगत नहीं कराया जाएगा और पुलिस बल अपराधियों की विसंगतियों का जवाब पूरी कड़ाई के साथ उन्हीं की भाषा में देने के लिए विधिक रूप से स्वतंत्र है।

​हालिया दिनों में विभिन्न जिलों, जैसे कि भागलपुर, गया और रोहतास प्रक्षेत्रों में पुलिस द्वारा की गई त्वरित गिरफ्तारियों, एसटीएफ के साथ मिलकर नशा तस्करों के खिलाफ चलाए गए हाई-स्पीड चेस अभियानों और महिलाओं व बच्चों के खिलाफ अपराध करने वाले नामजद अभियुक्तों को महज कुछ ही घंटों के भीतर सलाखों के पीछे भेजने की प्रविधियों को सरकार अपनी प्रशासनिक मुस्तैदी के जीवंत साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत कर रही है। इसके अतिरिक्त, पुलिस महकमे के भीतर आचरण की शुचिता बनाए रखने के लिए दागदार और अमर्यादित व्यवहार करने वाले थानाध्यक्षों को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड करने की कड़क कार्रवाई भी शासन के न्यायप्रिय रुख को रेखांकित करती है।

अगले छह महीने में अपराध अनुसंधान का पूर्ण डिजिटलाइजेशन: सीआईडी का रोडमैप

​पारंपरिक पुलिसिंग की खामियों को दूर करने और जांच प्रणालियों को वैज्ञानिक व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से अपराध अनुसंधान विभाग (सीआईडी) के स्तर से एक अत्यंत क्रांतिकारी और व्यापक डिजिटल ग्रिड का निर्माण किया जा रहा है। सीआईडी के अपर महानिदेशक (एडीजी) पारसनाथ द्वारा साझा किए गए तकनीकी इनपुट्स के अनुसार, आगामी 5 से 6 महीनों के भीतर बिहार पुलिस की पूरी अपराध अनुसंधान प्रविधि को शत-प्रतिशत पेपरलेस और डिजिटल करने की योजना अंतिम चरण में संधारित है। इस महाअभियान के तहत अब तक कुल 6 अलग-अलग बैचों के माध्यम से राज्य के 2018 पुलिस पदाधिकारियों को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान का कड़ा प्रशिक्षण हस्तगत कराया जा चुका है, ताकि साक्ष्यों के संकलन में मानवीय भूल की गुंजाइश को पूरी तरह ब्लॉक किया जा सके।

​वर्तमान समय में राज्य के कुल 968 थाने सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क सिस्टम) पोर्टल से लाइव एकीकृत हो चुके हैं, जिसके माध्यम से किसी भी दर्ज प्राथमिकी (FIR), केस डायरी के दैनिक लॉग्स, चार्जशीट और अंतिम विलेखों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग सीधे मुख्यालय स्तर से की जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, सीसीटीएनएस पर केस डायरी प्रविष्टि का संचयी ग्राफ अप्रैल माह तक बढ़कर 1 लाख 14 youth हजार 552 के रिकॉर्ड स्तर पर संधारित हो चुका है, जो जांच की गति में आई तेजी का वैज्ञानिक प्रमाण है।

ई-साक्ष्य, नाफिस और आईसीजेएस के अभेद्य डिजिटल सुरक्षा कवच का विन्यास

​तकनीकी मोर्चे पर अपनी पकड़ को सुदृढ़ करते हुए बिहार पुलिस भारत सरकार द्वारा विकसित किए गए विशिष्ट “ई-साक्ष्य” (e-Sakshya) पोर्टल का सघन उपयोग कर रही है, जिसके तहत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स, मोबाइल फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों की विधिक शुचिता व पारदर्शिता को कड़े नियमों के तहत सुरक्षित रखा जा रहा है। चालू वर्ष की पहली तिमाही के भीतर ही इस पोर्टल पर 68 हजार 844 से अधिक केसों के दस्तावेजों को सुरक्षित रूप से अपलोड किया जा चुका है। इसके साथ ही, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के “नाफिस” (NAFIS) वेब आधारित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली की मदद से जेलों और थानों के भीतर बंद शातिर अपराधियों और संदिग्धों के उंगलियों के निशानों का डिजिटल मिलान किया जा रहा है, जिससे अंतर-प्रादेशिक अपराधियों के छिपने के ठिकाने पूरी तरह ध्वस्त हो रहे हैं।

​इसके समानांतर, इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के माध्यम से माननीय अदालतों, पुलिस स्थापना, फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL), सरकारी अस्पतालों और कारागारों के बीच एक अभेद्य डेटा शेयरिंग नेटवर्क लाइव हो चुका है, जिससे मुकदमों के स्पीडी ट्रायल और दोषियों को त्वरित सजा दिलाने के विलेखों को ससमय मुकम्मल किया जा रहा है।

पंचायत स्तरीय सहयोग शिविरों से जमीनी विवादों के ऑन-स्पॉट निपटारे का नया विन्यास

​ग्रामीण अंचलों में होने वाले छोटे-मोटे विवादों और भूमि संबंधी विसंगतियों को संगीन आपराधिक वारदातों में तब्दील होने से पहले ही स्थानीय स्तर पर ब्लॉक करने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एक अभूतपूर्व प्रशासनिक प्रयोग की शुरुआत की जा रही है। प्रत्येक महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में आयोजित होने वाले विशेष “सहयोग शिविर” प्रक्रम के तहत भूमि विवादों, म्यूटेशन की विसंगतियों, स्थानीय मापी और अन्य नागरिक शिकायतों का ऑन-स्पॉट पारदर्शी निपटारा सुनिश्चित किया जा रहा है।

​इस व्यवस्था को विधिक रूप से बाध्यकारी बनाने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय ने साफ निर्देश जारी किया है कि शिविरों में प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों का अधिकतम 30 दिनों की कड़ी समय-सीमा के भीतर निष्पादन करना अनिवार्य होगा। यदि कोई लोक सेवक बिना किसी विधिक कारण के इस समय-सीमा का उल्लंघन करता है, तो 31वें दिन उसके सीधे निलंबन (सस्पेंशन) का कड़ा प्रावधान संधारित किया गया है। इन सभी एकीकृत तकनीकी, प्रशासनिक और न्यायिक सुधारों के बल पर शासन का यह दृढ़ संकल्प है कि विपक्ष की सभी आशंकाओं का निवारण धरातल पर कड़े नतीजों और पारदर्शी सुशासन की प्रविष्टि के माध्यम से ससमय मुकम्मल कर दिया जाए।

  • ये भी पढ़े..

    होर्मुज क्षेत्र में बढ़ता समुद्री संकट: चार दिनों में तीसरे पोत पर हमला, भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

    Share Add as a preferred…

    बिहार में सरकारी शिक्षकों पर सख्ती, कोचिंग और निजी ट्यूशन में पढ़ाने पर तत्काल प्रभाव से लगा प्रतिबंध

    Share Add as a preferred…