नालंदा : पावापुरी में कर्ज से परेशान परिवार ने खाया जहर, दो बेटियों की मौत, तीन अस्पताल में भर्ती

कपड़े का कारोबार करता था परिवार, 5 लाख रुपये के कर्ज से था परेशान

नालंदा (पावापुरी) | पावापुरी में शुक्रवार शाम एक दर्दनाक घटना सामने आई जब कर्ज के बोझ तले दबे एक ही परिवार के पांच लोगों ने सामूहिक रूप से जहर खा लिया। इस हृदयविदारक हादसे में दो नाबालिग बेटियों की मौत हो गई, जबकि माता-पिता और एक पुत्र की हालत गंभीर है। सभी को पावापुरी बिम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना जलमंदिर के समीप किराए के एक मकान की है, जहां यह परिवार पिछले छह महीनों से रह रहा था। मृतकों में शामिल हैं 16 वर्षीय अरिका कुमारी और 14 वर्षीय दीपा कुमारी, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई।


कपड़े का व्यवसाय, 5 लाख का कर्ज बना मौत की वजह

परिवार शेखपुरा जिले के पुरनकामा गांव का मूल निवासी है। मुखिया 43 वर्षीय धर्मेन्द्र कुमार, उनकी पत्नी 38 वर्षीय सोनी देवी, बेटा 15 वर्षीय शिवम कुमार, और दो बेटियां अरिका व दीपा यहां कपड़े का छोटा व्यवसाय कर जीवनयापन कर रहे थे।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, परिवार लगभग 5 लाख रुपये के कर्ज में डूबा था और कर्जदाताओं का लगातार दबाव बना हुआ था। इसी आर्थिक तनाव ने परिवार को आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर कर दिया।


छोटा बेटा बच गया, घटना के वक्त घर पर नहीं था

परिवार का सबसे छोटा बेटा 11 वर्षीय भोला कुमार घटना के समय घर के बाहर था, जिस कारण उसकी जान बच गई। बताया जा रहा है कि शुक्रवार की शाम परिवार के अन्य सदस्यों ने जहर खाया और तबीयत बिगड़ने लगी। आसपास के लोगों को इसकी भनक लगी तो तुरंत पुलिस को सूचना दी गई।


स्थानीय प्रशासन जांच में जुटा

सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और सभी को अस्पताल पहुंचाया। अरिका और दीपा की जान नहीं बचाई जा सकी, जबकि तीन अन्य का इलाज चल रहा है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, साथ ही आत्महत्या के पीछे के संभावित कारणों की भी पड़ताल की जा रही है।


सवाल: छोटे व्यवसायियों के लिए कर्ज से उबरने की क्या व्यवस्था है?

यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि आर्थिक संकट से जूझ रहे छोटे कारोबारियों को आत्महत्या से बचाने के लिए सरकारी या सामाजिक सहयोग कितना प्रभावी है? अगर समय रहते हस्तक्षेप होता, तो शायद इस परिवार की दो बच्चियों की जान बचाई जा सकती थी।


 

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