
दरभंगा: बिहार के दरभंगा में हुए बम विस्फोट में गंभीर रूप से घायल मजदूर रामबाबू पासवान की इलाज के दौरान मौत हो गई। उनकी मौत के बाद इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। गुस्साए परिजनों और स्थानीय लोगों ने मुआवजे, घायल मजदूर के बेहतर इलाज और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़क जाम कर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों ने चंदनपट्टी चौक के पास लहेरियासराय-बहेड़ी मुख्य मार्ग और देकुली-सिसौनी सड़क को पूरी तरह जाम कर दिया, जिससे दोनों मार्गों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और आवागमन ठप हो गया।
बेहतर इलाज नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि बम विस्फोट में घायल रामबाबू पासवान और भोला पासवान को पहले दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (डीएमसीएच) में भर्ती कराया गया था, लेकिन वहां समुचित इलाज नहीं मिलने के कारण दोनों को पटना स्थित पीएमसीएच रेफर कर दिया गया।
परिजनों का आरोप है कि पीएमसीएच में भी समय पर बेहतर इलाज नहीं मिल सका, जिसके कारण रामबाबू की मौत हो गई।
स्थानीय जनप्रतिनिधि मणिकांत झा ने कहा—
“बम धमाके में घायल रामबाबू को अस्पताल लाया गया, लेकिन पीएमसीएच में भी उन्हें बेहतर इलाज नहीं मिल सका, जिसके कारण उनकी मौत हो गई।”
अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप
मृतक के परिजनों और ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि समय पर उचित इलाज मिलता तो रामबाबू की जान बचाई जा सकती थी।
प्रदर्शनकारियों ने मृतक के परिवार को पर्याप्त मुआवजा, घायल मजदूर के बेहतर इलाज और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
पुलिस ने संभाला मोर्चा
सड़क जाम की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन लोग अपनी मांगों पर अड़े रहे।
प्रशासन ने आश्वासन दिया कि पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और सरकार तक पीड़ित परिवार की मांग पहुंचाई जाएगी।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
ग्रामीणों का कहना है कि रामबाबू पासवान की मौत से उनके परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया है। परिवार का मुख्य कमाने वाला सदस्य खोने के बाद अब उनके सामने रोजी-रोटी का भी संकट खड़ा हो गया है।
क्या है पूरा मामला?
7 जुलाई को दरभंगा में एक निर्माणाधीन चहारदीवारी के पास रखे एक झोले में अचानक विस्फोट हुआ था। इस घटना में दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। विस्फोट इतना तेज था कि एक मजदूर का हाथ उड़ गया, जबकि दूसरे के सिर में गंभीर चोट लगी।
प्रारंभिक जांच में जमीन विवाद का एंगल भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार वर्ष 2008 में यह जमीन नेयाज से मोहम्मद शाहिद ने खरीदी थी। बाद में उसी जमीन की दोबारा बिक्री को लेकर विवाद की बात सामने आई है। हालांकि पुलिस अभी सभी पहलुओं की जांच कर रही है और विस्फोट के वास्तविक कारणों का पता लगाने में जुटी हुई है।


