
पटना: बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) में जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त हो गई है। जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) ने सर्वसम्मति से हड़ताल वापस लेने का फैसला किया, जिसके बाद सभी डॉक्टर अपने काम पर लौट गए हैं। हालांकि, हड़ताल खत्म होने के बावजूद डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और मरीज के परिजनों के गंभीर आरोपों को लेकर विवाद जारी है।
सुरक्षा और संसाधनों की कमी को लेकर हड़ताल
JDA ने डॉक्टरों की सुरक्षा, अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और लंबित वेतन-स्टाइपेंड संशोधन की मांग को लेकर हड़ताल शुरू की थी। एसोसिएशन का कहना है कि पिछले कुछ दिनों में डॉक्टरों के साथ हिंसा और धमकी की घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
JDA अध्यक्ष सत्यम कुमार के अनुसार, अस्पताल में जीवनरक्षक दवाओं, आईसीयू बेड, मॉनिटर, ट्रॉली, एम्बुलेंस और अन्य आवश्यक चिकित्सा संसाधनों की भारी कमी है। इन व्यवस्थागत कमियों का गुस्सा मरीजों के परिजन डॉक्टरों पर निकालते हैं, जिससे कार्यस्थल असुरक्षित होता जा रहा है।
वेतन-स्टाइपेंड संशोधन भी बना बड़ा मुद्दा
एसोसिएशन ने आरोप लगाया कि पोस्ट ग्रेजुएट रेजिडेंट डॉक्टरों के स्टाइपेंड और सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के वेतन संशोधन का मामला महीनों से लंबित है। यह संशोधन जनवरी 2026 से लागू होना था, लेकिन अब तक सरकार की ओर से कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया।
JDA की चार प्रमुख मांगें
जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं—
- अस्पताल परिसर में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों की तैनाती।
- डॉक्टरों पर हमले की हर घटना में अनिवार्य FIR।
- दवाओं, आईसीयू बेड और अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की तत्काल उपलब्धता।
- संशोधित वेतन और स्टाइपेंड को जनवरी 2026 से लागू करना।
JDA अध्यक्ष सत्यम कुमार ने कहा कि डॉक्टरों का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाएं बाधित करना नहीं, बल्कि उन्हें बेहतर बनाना है।
मरीज के परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
इसी बीच पीएमसीएच एक नए विवाद में भी घिर गया। पटना ग्रामीण निवासी प्रणय कुमार ने आरोप लगाया कि रविवार रात उनके पिता की तबीयत बिगड़ने पर काफी देर तक कोई डॉक्टर उपलब्ध नहीं था। उनका दावा है कि समय पर इलाज और नेबुलाइजर नहीं मिलने से उनके पिता की मौत हो गई।
प्रणय कुमार ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने डॉक्टरों की लापरवाही की शिकायत की, तो उन्हें दूसरे कक्ष में भेजा गया, जहां मौजूद जूनियर और सीनियर डॉक्टरों ने उनके और उनके भाई के साथ लोहे की रॉड और फाइटर से मारपीट की। दोनों के घायल होने का भी दावा किया गया है।
विवाद अभी खत्म नहीं
एक ओर डॉक्टर अस्पताल की सुरक्षा और संसाधनों की कमी का मुद्दा उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मरीज के परिजनों ने इलाज में लापरवाही और मारपीट जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। ऐसे में हड़ताल भले समाप्त हो गई हो, लेकिन PMCH की व्यवस्था, सुरक्षा और जवाबदेही को लेकर सवाल अभी भी बरकरार हैं।


