बेगूसराय में सोनू-मोनू गिरफ्तारी विवाद: वायरल वीडियो के बाद पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल, विभागीय जांच शुरू

बेगूसराय: बिहार के बेगूसराय जिले में कुख्यात अपराधी सोनू और मोनू की गिरफ्तारी के बाद बलिया थाना पुलिस की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। गिरफ्तारी के दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।

वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद

वायरल वीडियो में एक पुलिसकर्मी गिरफ्तार आरोपी की कमर में पिस्टल रखते हुए दिखाई देता है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि हथियार पुलिस ने स्वयं रखकर फर्जी बरामदगी दिखाने की कोशिश की।

हालांकि, पुलिस अधिकारियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि बरामद हथियार आरोपियों का ही था।

पुलिस का पक्ष

बलिया डीएसपी सुबोध कुमार के अनुसार, 20 जून को बच्चों के विवाद के बाद दो पक्षों के बीच हुई झड़प में सोनू और मोनू ने मौके पर पहुंचकर फायरिंग की थी। घटनास्थल से कई खोखे बरामद हुए थे, जिसके आधार पर दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

डीएसपी का कहना है कि गिरफ्तारी के दौरान भी सोनू ने हथियार दिखाकर पुलिस को धमकाने की कोशिश की, जिसके बाद उसे काबू किया गया।

एसपी ने क्या कहा?

बेगूसराय के एसपी मनीष कुमार ने कहा कि बरामद पिस्टल अपराधियों की ही थी, लेकिन उसे आरोपी की कमर में रखकर वीडियो बनाना उचित पुलिस प्रक्रिया नहीं थी।

उन्होंने बताया कि पूरे मामले की विभागीय जांच कराई जाएगी और यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

एसपी के अनुसार, सोनू और मोनू दोनों के खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग सहित एक दर्जन से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

सीआईडी ने शुरू की जांच

विवाद बढ़ने के बाद मुंगेर रेंज के डीआईजी और सीआईडी की टीम ने बरियारपुर गांव पहुंचकर ग्रामीणों, परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ की। ग्रामीणों ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है।

फायरिंग का दूसरा वीडियो भी वायरल

इसी बीच सोशल मीडिया पर सोनू और मोनू का एक और वीडियो सामने आया है, जिसमें दोनों कथित तौर पर आधुनिक हथियारों से फायरिंग करते दिखाई दे रहे हैं।

पुलिस इस वीडियो की भी सत्यता की जांच कर रही है। यदि वीडियो प्रमाणित होता है तो दोनों के खिलाफ नए आपराधिक मामले भी दर्ज किए जा सकते हैं।

दो पहलुओं पर जांच

फिलहाल जांच दो बिंदुओं पर केंद्रित है—

  • गिरफ्तारी के दौरान पुलिस की कार्यप्रणाली।
  • सोशल मीडिया पर वायरल फायरिंग वीडियो की सत्यता।

जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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