नई दिल्ली, 14 अगस्त 2025: 79वें स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं और लोकतांत्रिक मूल्यों व संवैधानिक सिद्धांतों को सर्वोपरि बताया।
लोकतंत्र और संविधान सर्वोपरि
राष्ट्रपति ने कहा —
“आजादी के बाद हमने ऐसा लोकतंत्र अपनाया जिसमें हर वयस्क को मताधिकार मिला। भारत के लोगों ने अपने भाग्य को आकार देने का अधिकार स्वयं को दिया। हमारे लिए, हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सबसे ऊपर है।”
विभाजन की पीड़ा को याद किया
उन्होंने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का उल्लेख करते हुए कहा —
“देश के विभाजन से मिले दर्द को हम कभी नहीं भूल सकते। लाखों लोग हिंसा के शिकार हुए और विस्थापित हुए। आज हम उन सभी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।”
समानता और मानवीय गरिमा पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि संविधान के चार मूल स्तंभ — न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व — हमारे सभ्यतागत सिद्धांत हैं।
“प्रत्येक मनुष्य समान है और सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार होना चाहिए। स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और अवसरों तक समान पहुंच हर नागरिक का अधिकार है।”
भारत की प्रगति और आत्मनिर्भरता की राह
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय भारत घोर गरीबी में था, लेकिन पिछले 78 वर्षों में देश ने सभी क्षेत्रों में असाधारण प्रगति की है और अब आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़े आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।


