
बिहार की सियासत में एक बार फिर समीकरणों का शतरंज बिछ चुका है। विधानसभा चुनाव में हाई-वोल्टेज प्रचार कर सुर्खियों में रहे भोजपुरी फिल्मों के ‘पावरस्टार’ पवन सिंह की राजनीतिक पारी इस बार पावर कट का शिकार हो गई। सांसद बनने का उनका अरमान अधूरा रह गया, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी ने राज्यसभा की 5वीं सीट पर सहयोगी दल के नेता उपेंद्र कुशवाहा को दोबारा मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया।
पवन सिंह का दांव खाली गया
पिछले दिनों पवन सिंह की मुलाकात बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन से हुई थी। मीडिया के सवाल पर उन्होंने सियासी अंदाज में कहा—“सिपाही हूं, जो मालिक चाहेंगे वही होगा।” लेकिन राज्यसभा की सीटों की बिसात पर उनका दांव इस बार खाली चला गया।
दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पवन को आसनसोल से टिकट दिया था, लेकिन उन्होंने वह सीट लौटाकर काराकाट से निर्दलीय ताल ठोक दी। उसी सीट से एनडीए प्रत्याशी के तौर पर उपेंद्र कुशवाहा मैदान में थे। पवन के उतरने से कोइरी वोटरों में भ्रम पैदा हुआ और शाहाबाद से मगध तक एनडीए को सियासी नुकसान उठाना पड़ा।
राज्यसभा की पांचवीं सीट: मुकाबला दिलचस्प
बीजेपी ने अपने कोटे से नितिन नवीन और शिवेश राम को मैदान में उतारा। सहयोगी दलों के दबाव के बीच कुशवाहा का नाम फाइनल हुआ। माना जा रहा है कि चिराग पासवान और जीतनराम मांझी से मंथन के बाद यह फैसला लिया गया।
वहीं, राजद भी 5वीं सीट पर दांव खेलने की तैयारी में है। कुशवाहा के लिए यह टिकट जहां सियासी तोहफा है, वहीं अग्निपरीक्षा भी, क्योंकि एनडीए को जीत सुनिश्चित करने के लिए क्रॉस वोटिंग की दरकार होगी।
जदयू में भी तैयारी तेज
नीतीश कुमार अपने भरोसेमंद नेता रामनाथ ठाकुर को फिर मौका दे सकते हैं, जबकि निशांत कुमार की एंट्री की अटकलें भी तेज हैं।
स्पष्ट है कि बिहार की राजनीति में रंग बदलने की रफ्तार फागुन के त्योहार से कम नहीं है। पवन सिंह के लिए यह सबक है कि पर्दे की तालियां और सत्ता की ताकत दो अलग-अलग मैदान हैं।


