सासाराम में CBI और रेल विजिलेंस का छापा: करोड़ों की रेलवे संपत्ति चोरी का मामला, चार गिरफ्तार

सासाराम (बिहार): बिहार के रोहतास जिले में रेलवे अफसरों द्वारा करोड़ों रुपए की रेलवे संपत्ति चोरी कर बेचने के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। पटना से आई केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम ने रेल विजिलेंस के साथ मिलकर डेहरी ऑन सोन नगर स्थित रेलवे कार्यालय पर छापेमारी की और एक वरिष्ठ रेल अधिकारी समेत तीन अन्य रेलकर्मियों को गिरफ्तार किया। सभी आरोपियों को पूछताछ के लिए पटना ले जाया गया है।

सीनियर सेक्शन इंजीनियर पर गंभीर आरोप

गिरफ्तार अधिकारी राजकुमार सिंह, पूर्व मध्य रेल के डेहरी स्थित पथ निर्माण कार्यालय में सीनियर सेक्शन इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष जनवरी में उनका तबादला दानापुर से डेहरी हुआ था। आरोप है कि उन्होंने दानापुर से लेकर डेहरी तक रेलवे की करोड़ों की संपत्ति चोरी छिपे बेच दी और अवैध रूप से भारी कमाई की।

CBI को पहले से थी शिकायत

बताया जा रहा है कि दो महीने पहले ही इस मामले की शिकायत CBI को मिल गई थी। इसके बाद टीम ने राजकुमार सिंह की गतिविधियों पर गहन नजर रखना शुरू कर दिया था। सूत्रों के मुताबिक, चुराई गई संपत्ति से मिली राशि का किस तरह और कहां-कहां इस्तेमाल किया जा रहा था, इसकी भी पूरी जानकारी एजेंसी को मिल चुकी थी।

सहकर्मियों का भी हुआ पर्दाफाश

जांच में सामने आया कि राजकुमार सिंह चोरी से कमाई गई मोटी रकम को अपने रेल सहकर्मी विनोद कुमार के बैंक खाते में ट्रांसफर करते थे। इसी कड़ी में, छापेमारी के दौरान CBI ने विनोद कुमार को भी डेहरी रेल परिसर से गिरफ्तार कर लिया। दोनों के अलावा दो अन्य रेलकर्मियों को भी हिरासत में लिया गया है।

जांच जारी, बड़े खुलासे की संभावना

CBI की टीम अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और इस घोटाले में शामिल अन्य लोगों की तलाश कर रही है। अनुमान लगाया जा रहा है कि इस छापेमारी और पूछताछ के बाद रेलवे विभाग में और भी बड़े नामों का खुलासा हो सकता है।

रेलवे संपत्ति की चोरी: एक गंभीर चुनौती

रेलवे संपत्ति की चोरी और उसमें विभागीय कर्मचारियों की संलिप्तता रेलवे प्रशासन के लिए एक गंभीर चुनौती बनती जा रही है। CBI और रेल विजिलेंस की इस कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई अब तेज हो गई है।

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