
पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने एक बड़े और चर्चित मामले में बड़ी सफलता हासिल की है। सरकारी ठेकों, कमीशनखोरी और पद के दुरुपयोग से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान विशेष निगरानी इकाई ने सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता, वित्त विभाग के एक संयुक्त सचिव और एक कार्यपालक अभियंता को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं इस मामले में नामजद एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी फिलहाल फरार बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश जारी है।
इस कार्रवाई को बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का दावा है कि सरकारी परियोजनाओं और टेंडर आवंटन में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं, जिसके बदले भारी कमीशन और रिश्वत का लेन-देन हुआ। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कई अधिकारियों और निजी कंपनी संचालकों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।
अप्रैल 2025 में दर्ज हुआ था मामला
विशेष निगरानी इकाई के अनुसार यह मामला अप्रैल 2025 में दर्ज किया गया था। प्राथमिकी में एक निजी इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी से जुड़े कारोबारी और कई सरकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया गया था।
जांच के दौरान एजेंसी को ऐसे दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड और बयान मिले, जिनसे यह संकेत मिला कि सरकारी टेंडरों और विकास परियोजनाओं में नियमों की अनदेखी कर विशेष लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया था।
जांचकर्ताओं का कहना है कि मामला केवल रिश्वत तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सरकारी गोपनीय सूचनाओं के दुरुपयोग, पद के दुरुपयोग और संगठित भ्रष्टाचार के पहलू भी शामिल हैं।
सरकारी टेंडरों में मिली अनियमितताओं के संकेत
विशेष निगरानी इकाई की जांच में यह बात सामने आई कि कई विभागों में परियोजनाओं के टेंडर आवंटन के दौरान नियमों को प्रभावित करने का प्रयास किया गया।
जांच एजेंसियों के अनुसार जल संसाधन विभाग, भवन निर्माण विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग तथा अन्य सरकारी संस्थाओं में ठेका प्राप्त करने के लिए कथित तौर पर प्रभाव और आर्थिक लेन-देन का इस्तेमाल किया गया।
आरोप है कि कुछ अधिकारियों और निजी पक्षों के बीच ऐसा गठजोड़ विकसित हुआ जिसने सरकारी परियोजनाओं के आवंटन को प्रभावित किया।
करोड़ों रुपये की बरामदगी के बाद तेज हुई जांच
इस पूरे मामले की जांच के दौरान पहले भी कई महत्वपूर्ण खुलासे हो चुके हैं। जांच एजेंसियों द्वारा की गई अलग-अलग छापेमारी में बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई थी।
सूत्रों के अनुसार कुछ अधिकारियों के आवासों से करोड़ों रुपये नकद बरामद किए गए थे। इन बरामदगियों ने जांच एजेंसियों को मामले की गहराई तक जाने का आधार दिया।
यही कारण है कि विशेष निगरानी इकाई ने पूरे नेटवर्क की पड़ताल शुरू की और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज तथा डिजिटल साक्ष्य जुटाए।
कमीशनखोरी के आरोपों की जांच
जांच के दौरान कई ऐसे बयान सामने आए जिनमें विभिन्न परियोजनाओं में कमीशन दिए जाने के आरोप लगाए गए।
जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ सरकारी परियोजनाओं में टेंडर स्वीकृति, बिल भुगतान और अन्य प्रक्रियाओं को प्रभावित करने के लिए प्रतिशत के आधार पर कमीशन तय किए जाने के संकेत मिले हैं।
हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया और विस्तृत जांच के बाद ही होगी, लेकिन अब तक जुटाए गए साक्ष्यों को एजेंसियां काफी महत्वपूर्ण मान रही हैं।
कई विभाग जांच के दायरे में
इस मामले की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जांच केवल एक विभाग तक सीमित नहीं है।
भवन निर्माण विभाग, वित्त विभाग, नगर विकास एवं आवास विभाग और अन्य एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
विशेष निगरानी इकाई यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित भ्रष्टाचार का नेटवर्क कितना व्यापक था और इसमें कितने लोग शामिल थे।
ताबड़तोड़ छापेमारी के बाद गिरफ्तारियां
10 जून 2026 की सुबह विशेष निगरानी इकाई ने कई स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।
चार अलग-अलग टीमों का गठन कर अधिकारियों और आरोपियों के आवास तथा कार्यालयों पर कार्रवाई की गई।
इस दौरान सेवानिवृत्त मुख्य अभियंता तारणी दास, वित्त विभाग से जुड़े संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी मुग्ध कुमार चौधरी और कार्यपालक अभियंता उमेश कुमार सिंह को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी के बाद सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जांच जारी है।
आईएएस अधिकारी की तलाश जारी
मामले में नामजद वरिष्ठ आईएएस अधिकारी संजीव हंस फिलहाल जांच एजेंसियों की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं।
विशेष निगरानी इकाई ने उनके संभावित ठिकानों पर भी कार्रवाई की, लेकिन वे नहीं मिले।
अब एजेंसियां उनकी तलाश में जुटी हैं और उनके खिलाफ आगे की कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।
संजीव हंस का नाम सामने आने के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आ गया है, क्योंकि वे राज्य प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों में गिने जाते रहे हैं।
भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार का सख्त संदेश
बिहार सरकार लगातार यह कहती रही है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। विशेष निगरानी इकाई और निगरानी विभाग को ऐसे मामलों में स्वतंत्र और प्रभावी कार्रवाई की जिम्मेदारी दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वरिष्ठ अधिकारियों की गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि जांच एजेंसियां अब बड़े मामलों में भी कार्रवाई करने से पीछे नहीं हट रही हैं।
प्रशासनिक तंत्र में बढ़ी हलचल
इस कार्रवाई के बाद प्रशासनिक और इंजीनियरिंग सेवाओं से जुड़े विभागों में हलचल तेज हो गई है।
कई अधिकारी अब अपने पुराने निर्णयों और परियोजनाओं को लेकर सतर्क नजर आ रहे हैं। वहीं सरकार भी विभिन्न विभागों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई निगरानी व्यवस्था पर काम कर रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष और व्यापक तरीके से आगे बढ़ती है तो इससे सरकारी परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। जांच एजेंसियां वित्तीय लेन-देन, टेंडर प्रक्रियाओं और अन्य संबंधित दस्तावेजों की गहन जांच कर रही हैं।
संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। यदि जांच में अन्य अधिकारियों या निजी व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही इस बड़ी कार्रवाई ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी धन और सार्वजनिक परियोजनाओं में अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसियां अब अधिक आक्रामक रुख अपना रही हैं और बड़े पदों पर बैठे लोगों को भी कानून के दायरे में लाने की कोशिश की जा रही है।


