गया में 9 हजार रुपये रिश्वत लेते पंचायत चौकीदार गिरफ्तार, निगरानी विभाग की कार्रवाई से मचा हड़कंप; 2026 में अब तक 66 आरोपी दबोचे गए

गया/पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (विजिलेंस) की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में गया जिले के बेलागंज थाना क्षेत्र में एक पंचायत चौकीदार को 9 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया है। यह कार्रवाई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की विशेष टीम ने की, जिसने शिकायत के सत्यापन के बाद योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाकर आरोपी को पकड़ा। इस गिरफ्तारी के साथ ही राज्य में सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रहे अभियान को एक और बड़ी सफलता मिली है।

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की ओर से जारी जानकारी के अनुसार आरोपी की पहचान बेलागंज थाना क्षेत्र के पनारी पंचायत में कार्यरत चौकीदार मनीष कुमार के रूप में हुई है। आरोप है कि वह एक पुराने आपराधिक मामले में नाम हटाने और प्रशासनिक प्रक्रिया में मदद करने के नाम पर शिकायतकर्ता से रिश्वत मांग रहा था। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने पूरे मामले की जांच की और आरोपों को सही पाए जाने पर ट्रैप कार्रवाई को अंजाम दिया।

शिकायत के बाद हरकत में आया निगरानी विभाग

जानकारी के अनुसार बेलागंज थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति ने निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि उसके परिवार से जुड़े एक मामले में सहायता करने के बदले पंचायत चौकीदार द्वारा पैसे की मांग की जा रही है।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि उसके परिवार पर दर्ज एक मामले में बच्चों का नाम हटाने तथा प्रशासनिक स्तर पर मदद दिलाने के लिए चौकीदार लगातार रिश्वत मांग रहा था। शिकायत मिलने के बाद निगरानी विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और इसकी गोपनीय जांच शुरू कर दी।

सत्यापन में सही निकले आरोप

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने शिकायत की जांच की और यह पता लगाने का प्रयास किया कि रिश्वत की मांग वास्तव में की जा रही है या नहीं। जांच और सत्यापन के दौरान पर्याप्त साक्ष्य मिले कि आरोपी द्वारा पैसे मांगे जा रहे थे।

इसके बाद निगरानी अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए ट्रैप टीम का गठन किया। पूरी कार्रवाई की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर की गई ताकि आरोपी को रंगे हाथ पकड़ा जा सके।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में हुई गिरफ्तारी

निगरानी विभाग की टीम ने तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता को आरोपी के संपर्क में भेजा। जैसे ही आरोपी ने 9 हजार रुपये की रिश्वत की राशि स्वीकार की, पहले से मौजूद निगरानी टीम ने उसे पकड़ लिया।

बताया गया कि यह कार्रवाई बेलागंज स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में की गई। आरोपी को मौके पर ही हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी गई।

कार्रवाई इतनी गोपनीय तरीके से की गई कि आरोपी को इसका अंदाजा तक नहीं लग पाया। रिश्वत की राशि भी बरामद कर ली गई।

पूछताछ में जुटी जांच एजेंसी

गिरफ्तारी के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम आरोपी से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों का प्रयास है कि यह पता लगाया जाए कि आरोपी पहले भी ऐसे मामलों में शामिल रहा है या नहीं।

जांच एजेंसी आरोपी की भूमिका, उसके संपर्कों और संभावित वित्तीय लेन-देन की भी पड़ताल कर सकती है। यदि जांच में अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार पर बड़ा सवाल

इस घटना ने एक बार फिर पंचायत स्तर पर काम करने वाले कर्मियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत व्यवस्था आम लोगों के लिए प्रशासन का पहला संपर्क बिंदु होती है।

ऐसे में यदि पंचायत स्तर पर कार्यरत कर्मचारी या चौकीदार रिश्वत मांगते पाए जाते हैं तो इसका सीधा असर आम जनता के विश्वास पर पड़ता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता बढ़ाने और शिकायत निवारण व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

2026 में निगरानी विभाग की लगातार कार्रवाई

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जारी आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान लगातार जारी है।

विभाग के अनुसार इस वर्ष अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े 70वें और 71वें प्राथमिकी दर्ज करने की कार्रवाई की जा चुकी है। इनमें ट्रैप मामलों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

आंकड़ों के मुताबिक अब तक कुल 66 आरोपियों को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया जा चुका है। इन मामलों में लाखों रुपये की रिश्वत राशि भी बरामद की गई है।

विभाग का दावा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई की गति पहले की तुलना में अधिक तेज हुई है और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की जा रही है।

पिछले वर्ष भी हुई थीं बड़ी कार्रवाई

निगरानी विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2025 में भी भ्रष्टाचार के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया गया था।

उस दौरान 100 से अधिक ट्रैप मामलों में कार्रवाई की गई थी और बड़ी संख्या में सरकारी कर्मियों, अधिकारियों तथा अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। लाखों रुपये की रिश्वत राशि भी बरामद हुई थी।

विभाग का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा और किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

जनता से शिकायत दर्ज कराने की अपील

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी, अधिकारी या जनसेवक रिश्वत की मांग करता है तो उसकी सूचना तुरंत विभाग को दें।

विभाग ने इसके लिए हेल्पलाइन, लैंडलाइन, मोबाइल और व्हाट्सएप नंबर भी जारी किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में जनता की भागीदारी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि लोग शिकायत करने से पीछे नहीं हटेंगे तो भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में प्रयास

बिहार सरकार और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी प्रकार की रियायत नहीं दी जाएगी। चाहे अधिकारी हो, कर्मचारी हो या पंचायत स्तर का कोई कर्मी, दोषी पाए जाने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

गया में पंचायत चौकीदार की गिरफ्तारी इसी नीति का हिस्सा मानी जा रही है। इस कार्रवाई ने स्पष्ट कर दिया है कि छोटी से छोटी रिश्वत की शिकायत को भी गंभीरता से लिया जाएगा और दोषियों को कानून के दायरे में लाया जाएगा।

फिलहाल आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। जांच एजेंसियां मामले के अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही हैं। गया में हुई यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ बिहार में जारी सख्त अभियान की एक और महत्वपूर्ण कड़ी मानी जा रही है, जिसने सरकारी तंत्र को साफ संदेश दिया है कि रिश्वतखोरी अब पहले की तरह आसान नहीं रह गई है।

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