– राज्य को स्वच्छ ऊर्जा का हब बनाने की तैयारी, एलएंडटी-एनटीपीसी जैसी कंपनियों से 5,337 करोड़ का निवेश
– सौर, वायु, बॉयोमास और जल से बनेगी हरित बिजली, निवेशकों को मिलेंगी बड़ी छूटें
पटना, 2 अगस्त: बिहार सरकार ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में ऐतिहासिक छलांग लगाते हुए वर्ष 2029-30 तक 23,968 मेगावाट स्वच्छ बिजली उत्पादन और 6,100 मेगावाट घंटे ऊर्जा भंडारण का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसका उद्देश्य राज्य को हरित ऊर्जा का राष्ट्रीय केंद्र बनाना और देश के 2070 तक ‘नेट ज़ीरो’ लक्ष्य में ठोस योगदान देना है। इसके लिए राज्य सरकार ने हाल ही में दो नई नीतियों – ‘बिहार नई एवं अक्षय ऊर्जा स्रोत प्रोत्साहन नीति 2025’ और ‘बिहार पंप्ड स्टोरेज परियोजना प्रोत्साहन नीति 2025’ – के तहत चार बड़ी कंपनियों के साथ 5,337 करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं।
स्वच्छ ऊर्जा का खाका: सौर, वायु, बॉयोमास और जल
इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सरकार ने बहुआयामी योजना तैयार की है:
- 18,448 मेगावाट – जमीन आधारित सौर परियोजनाओं से
- 900 मेगावाट – बड़े सौर पार्कों से
- 495 मेगावाट – फ्लोटिंग सोलर प्लांट से
- 400 मेगावाट – ऊंचे सौर संयंत्र (तालाबों पर) से
- 500 मेगावाट – छतों पर सौर संयंत्र से
- 1,975 मेगावाट – ऑन-ग्रिड अक्षय ऊर्जा
- 340 मेगावाट – ऑफ-ग्रिड संयंत्र
- 250 मेगावाट – लघु जल विद्युत परियोजनाओं से
ऊर्जा भंडारण के लिए:
- 1,600 मेगावाट – पंप्ड स्टोरेज क्षमता
- 4,500 मेगावाट – बैटरी स्टोरेज क्षमता
निवेशकों को मिलेंगी कई रियायतें
ऊर्जा मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि ये योजनाएं बिहार को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाएंगी। वहीं विभागीय सचिव मनोज कुमार सिंह ने बताया कि निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सरकार कई प्रकार की छूट और सुविधाएं दे रही है:
- औद्योगिक भूमि पर 100% स्टांप व रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट
- भूमि उपयोग परिवर्तन शुल्क माफ
- ट्रांसमिशन व व्हीलिंग शुल्क में राहत
- बिजली शुल्क से छूट
- सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, फीड-इन टैरिफ, ग्रीन टैरिफ
- कार्बन क्रेडिट और ऊर्जा बैंकिंग की सुविधा
बड़े निवेशक जुड़ रहे हैं
राज्य सरकार ने एलएंडटी, एनटीपीसी, अवाडा ग्रुप और सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के साथ 2,357 मेगावाट बिजली उत्पादन हेतु 5,337 करोड़ रुपये के निवेश समझौते किए हैं। इन परियोजनाओं के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी बिहार अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (BREDA) को सौंपी गई है।


