
बिहार के किसानों के लिए महत्वपूर्ण मिट्टी जांच योजना को केंद्र सरकार से बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2026-27 के लिए 6 लाख मिट्टी नमूनों की जांच का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन केंद्र ने इसमें भारी कटौती करते हुए केवल 1.5 लाख नमूनों की जांच को मंजूरी दी है। इस फैसले के बाद राज्य का कृषि विभाग अब जिलावार नए लक्ष्य तय करने में जुट गया है, जिन्हें दोबारा केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
पिछले वर्षों की तुलना में भी मिट्टी जांच के लक्ष्य में लगातार कमी देखी गई है। वर्ष 2025-26 में बिहार को 3 लाख नमूनों की जांच का लक्ष्य मिला था, जो उससे पहले के वर्ष के मुकाबले लगभग आधा था। वहीं 2024-25 में 5 लाख और 2023-24 में 2 लाख नमूनों की जांच का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, राज्य ने हर साल दिए गए लक्ष्य को समय पर पूरा किया है।
मिट्टी जांच योजना राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत संचालित होती है, जिसमें 60 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार और 40 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है। इस योजना के तहत मिट्टी की गुणवत्ता का आकलन कर किसानों को डिजिटल स्वायल हेल्थ कार्ड जारी किया जाता है।
यह कार्ड किसानों को उनकी जमीन में पोषक तत्वों की स्थिति की जानकारी देता है और उसी के आधार पर फसलों के लिए उर्वरक की सिफारिश की जाती है। इससे किसानों को जरूरत के अनुसार ही खाद का उपयोग करने में मदद मिलती है, जिससे उत्पादन बढ़ता है और रासायनिक उर्वरकों का अनावश्यक उपयोग कम होता है।
बिहार में सभी 38 जिलों में मिट्टी जांच की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा प्रमंडल स्तर पर भी प्रयोगशालाएं संचालित की जा रही हैं, जिससे किसानों को इस योजना का लाभ आसानी से मिल सके।


