
पटना। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बिहार में पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को लेकर व्यापक संदेश दिया गया। राजधानी पटना स्थित संजय गांधी जैविक उद्यान (पटना जू) में आयोजित विशेष कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत पौधारोपण कर लोगों को प्रकृति संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें समाज के प्रत्येक व्यक्ति की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विश्व पर्यावरण दिवस केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं, बल्कि प्रकृति के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं स्वच्छ वातावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लेने का अवसर है। इस मौके पर मंत्री ने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनके संरक्षण की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया।
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान बना आकर्षण का केंद्र
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण “एक पेड़ मां के नाम” अभियान रहा। इस अभियान के माध्यम से लोगों को अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाने और उसकी देखभाल करने के लिए प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। अधिकारियों का कहना था कि यह अभियान केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को प्रकृति से भावनात्मक रूप से जोड़ने का प्रयास भी है।
मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने स्वयं रुद्राक्ष का पौधा लगाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि एक पौधा केवल हरियाली नहीं देता, बल्कि वह जीवन, स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक भी होता है।
पर्यावरण संरक्षण को जनआंदोलन बनाने की अपील
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि पर्यावरणीय चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण, जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय बन चुका है।
उन्होंने कहा कि सरकार अपनी ओर से कई योजनाएं चला रही है, लेकिन केवल सरकारी प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण का लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी।
उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में एक पौधा लगाकर उसकी देखभाल करने का संकल्प ले तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। हर नागरिक की छोटी-छोटी पहलें मिलकर बड़े परिणाम दे सकती हैं।
हरित बिहार और स्वच्छ भारत के निर्माण पर जोर
डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने कहा कि बिहार सरकार हरित बिहार और स्वच्छ भारत के लक्ष्य को लेकर गंभीरता से काम कर रही है। राज्य में वृक्षारोपण, वन संरक्षण और जैव विविधता संवर्धन के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि बढ़ती आबादी और शहरीकरण के दौर में हरित क्षेत्र को बचाना और बढ़ाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। वृक्ष न केवल पर्यावरण को संतुलित रखते हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन, स्वच्छ हवा और प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपने घर, विद्यालय, कार्यालय और सार्वजनिक स्थानों पर पौधे लगाएं तथा उन्हें वृक्ष बनने तक संरक्षित रखें।
बिहार में 5 करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य
कार्यक्रम के दौरान प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरविंदर सिंह ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी हरित योजना की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान बिहार में हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से 5 करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके लिए विभाग द्वारा राज्यभर में व्यापक स्तर पर पौधारोपण अभियान चलाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि पिछले वर्षों में भी राज्य में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया है और उसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। अब अगले चरण में वन क्षेत्र और हरित आवरण को और अधिक बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
अरविंदर सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल वन विभाग का कार्य नहीं है। इसमें पंचायतों, शैक्षणिक संस्थानों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों की भागीदारी भी आवश्यक है।
पर्यावरणविदों को किया गया सम्मानित
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले 10 पर्यावरणविदों को सम्मानित भी किया गया।
मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने इन पर्यावरण प्रेमियों को स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। अधिकारियों ने बताया कि इन लोगों ने वृक्षारोपण, जैव विविधता संरक्षण, जल संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किए हैं।
कार्यक्रम में कहा गया कि ऐसे लोगों का सम्मान समाज को प्रेरित करता है और अन्य नागरिकों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने का संदेश देता है।
जलवायु परिवर्तन से निपटने की चुनौती
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों ने कहा कि बढ़ता वैश्विक तापमान, अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं जलवायु परिवर्तन के गंभीर संकेत हैं।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते पर्यावरण संरक्षण के प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वृक्षारोपण, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, जल प्रबंधन और सतत विकास की अवधारणाओं को अपनाकर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
पटना जू बना पर्यावरण जागरूकता का केंद्र
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पटना जू में आयोजित कार्यक्रम ने पर्यावरण जागरूकता का विशेष माहौल बनाया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।
इस दौरान लोगों को जैव विविधता संरक्षण, वन्यजीव सुरक्षा और हरित जीवनशैली के महत्व के बारे में भी जानकारी दी गई। उपस्थित लोगों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया।
वरिष्ठ अधिकारियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरविंदर सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक-सह-मुख्य वन्य प्राणी प्रतिपालक अभय कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा) सुरेंद्र सिंह, मुख्य वन्य संरक्षक (आईटी) एस. चंद्रशेखर, विशेष सचिव आलोक कुमार, बिहार राज्य जैव विविधता परिषद के सचिव अमित कुमार, वन संरक्षक (मुख्यालय) सत्यजीत कुमार और पटना जू के निदेशक हेमंत पाटील सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सभी अधिकारियों ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की और लोगों से इस अभियान को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया।
हरित भविष्य की दिशा में मजबूत कदम
विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर व्यापक जनजागरूकता का माध्यम बना। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान और 5 करोड़ पौधारोपण के लक्ष्य ने यह संकेत दिया कि बिहार सरकार हरित विकास को प्राथमिकता दे रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार, सामाजिक संगठन और आम नागरिक मिलकर पर्यावरण संरक्षण के लिए कार्य करें तो आने वाले वर्षों में बिहार हरित विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस पर लिया गया यह संकल्प आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, सुरक्षित और हरित वातावरण प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार और पर्यावरण विभाग को उम्मीद है कि जनता की सक्रिय भागीदारी से हरित बिहार का सपना जल्द ही वास्तविकता में बदल सकेगा।


