विश्व पर्यावरण दिवस पर सहकारिता मंत्री का संदेश: पर्यावरण बचेगा तो मानव जीवन सुरक्षित रहेगा, हर नागरिक लगाए एक पौधा

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर बिहार की राजधानी पटना में पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास को लेकर विशेष संदेश दिया गया। सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव ने गांधी मैदान में वृक्षारोपण कर राज्यवासियों से प्रकृति संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और मानव जीवन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं और यदि पर्यावरण सुरक्षित नहीं रहेगा तो मानव जीवन का अस्तित्व भी खतरे में पड़ सकता है।

विश्व पर्यावरण दिवस पर आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने लोगों से अधिक से अधिक वृक्ष लगाने, पर्यावरण के प्रति जागरूक रहने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने का संकल्प लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज का दिन केवल औपचारिक कार्यक्रमों का नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति हमारी जिम्मेदारियों को समझने और उन्हें निभाने का अवसर है।

गांधी मैदान में किया गया वृक्षारोपण

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में सहकारिता मंत्री ने गांधी मैदान परिसर में पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की। वृक्षारोपण के दौरान उन्होंने कहा कि एक पौधा केवल हरियाली का प्रतीक नहीं होता, बल्कि वह जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरणीय संतुलन का आधार भी होता है।

उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक वृक्ष वर्षों तक लोगों को छाया, ऑक्सीजन और जीवनदायिनी ऊर्जा प्रदान करता है, उसी प्रकार प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस दौरान विभिन्न सामाजिक संगठनों, विभागीय अधिकारियों और नागरिकों ने भी पर्यावरण जागरूकता का संदेश दिया।

पर्यावरण और मानव जीवन का गहरा संबंध

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राम कृपाल यादव ने कहा कि पर्यावरण और मानव जीवन एक-दूसरे के पूरक हैं। दोनों का अस्तित्व एक-दूसरे पर निर्भर करता है। यदि जंगल कम होंगे, नदियां प्रदूषित होंगी और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन होगा, तो इसका सीधा प्रभाव मानव जीवन पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया जलवायु परिवर्तन, बढ़ते प्रदूषण और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है। इन समस्याओं के समाधान के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी होगी।

मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण कोई विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है। यदि आज प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकटों का सामना करना पड़ सकता है।

जलवायु परिवर्तन पर जताई चिंता

अपने संबोधन में मंत्री ने जलवायु परिवर्तन को वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि अत्यधिक गर्मी, अनियमित वर्षा, बाढ़, सूखा और प्राकृतिक आपदाओं की बढ़ती घटनाएं पर्यावरणीय असंतुलन के स्पष्ट संकेत हैं।

उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल पर्यावरण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य और सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है। इसलिए इस चुनौती का मुकाबला सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऊर्जा की बचत करें, प्राकृतिक संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करें और पर्यावरण के अनुकूल जीवनशैली अपनाएं।

प्रकृति के साथ खिलवाड़ रोकना जरूरी

राम कृपाल यादव ने कहा कि प्रकृति के साथ लगातार हो रहा अंधाधुंध दोहन पर्यावरणीय संकट को और बढ़ा रहा है। जंगलों की कटाई, प्लास्टिक प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरण संतुलन को नुकसान पहुंचा रहा है।

उन्होंने कहा कि समय की मांग है कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ बंद किया जाए और विकास तथा पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन ऐसा विकास जो प्रकृति को नुकसान पहुंचाए, वह लंबे समय तक टिकाऊ नहीं हो सकता।

मंत्री ने कहा कि यदि आज पर्यावरण की रक्षा नहीं की गई तो भविष्य में मानव जीवन और जैव विविधता दोनों गंभीर संकट में पड़ सकते हैं।

प्लास्टिक के उपयोग को कम करने की अपील

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने लोगों से प्लास्टिक के उपयोग को कम करने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एकल उपयोग वाले प्लास्टिक उत्पाद पर्यावरण के लिए बड़ी समस्या बन चुके हैं।

उन्होंने लोगों से कपड़े के थैले, पुनः उपयोग योग्य सामग्री और पर्यावरण अनुकूल विकल्प अपनाने की अपील की। उनका कहना था कि छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाकर भी पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार प्लास्टिक प्रदूषण मिट्टी, जल और वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। ऐसे में इसके उपयोग को सीमित करना समय की आवश्यकता है।

“एक पेड़ मां के नाम” अभियान का किया समर्थन

सहकारिता मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए “एक पेड़ मां के नाम” अभियान की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि यह अभियान पर्यावरण संरक्षण को भावनात्मक और सामाजिक सरोकार से जोड़ने का एक अभिनव प्रयास है।

उन्होंने कहा कि मां जीवन का आधार होती है और यदि किसी व्यक्ति द्वारा अपनी मां के सम्मान में एक पौधा लगाया जाता है, तो वह केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं बल्कि भावनात्मक जुड़ाव का भी प्रतीक बन जाता है।

मंत्री ने राज्य के सभी नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी माता के सम्मान में कम-से-कम एक पौधा अवश्य लगाएं और उसकी देखभाल का संकल्प लें।

हर परिवार लगाए एक पौधा

राम कृपाल यादव ने कहा कि यदि राज्य का प्रत्येक परिवार एक पौधा लगाकर उसके संरक्षण की जिम्मेदारी ले ले तो हरित बिहार का सपना आसानी से साकार हो सकता है।

उन्होंने कहा कि वृक्षारोपण केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं होना चाहिए। पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

मंत्री ने कहा कि कई बार बड़े पैमाने पर पौधारोपण तो किया जाता है, लेकिन पौधों की देखभाल नहीं होने के कारण वे जीवित नहीं रह पाते। इसलिए संरक्षण को प्राथमिकता देना जरूरी है।

जैव विविधता संरक्षण पर भी दिया जोर

कार्यक्रम के दौरान मंत्री ने जैव विविधता के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर मौजूद विभिन्न प्रकार के पौधे, जीव-जंतु और प्राकृतिक संसाधन पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यदि जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है तो उसका प्रभाव पूरे पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है। इसलिए वृक्षारोपण के साथ-साथ प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण पर भी ध्यान देना आवश्यक है।

जनआंदोलन बने पर्यावरण संरक्षण

अपने संबोधन के अंत में मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसे जनभागीदारी और जनआंदोलन का स्वरूप देना होगा।

उन्होंने कहा कि जब तक आम लोग इसमें सक्रिय रूप से शामिल नहीं होंगे, तब तक पर्यावरण संरक्षण के लक्ष्य पूरी तरह हासिल नहीं किए जा सकते। उन्होंने युवाओं, छात्रों, सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों से इस अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने की अपील की।

विश्व पर्यावरण दिवस पर गांधी मैदान में आयोजित यह कार्यक्रम पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को प्रकृति से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बना। सहकारिता मंत्री के संदेश ने यह स्पष्ट किया कि पर्यावरण की रक्षा केवल वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाले भविष्य को सुरक्षित रखने का भी संकल्प है। यदि समाज और सरकार मिलकर कार्य करें तो हरित, स्वच्छ और सुरक्षित बिहार का सपना साकार किया जा सकता है।

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