बिहार वोटर लिस्ट वेरिफिकेशन: सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर रोक लगाने से किया इनकार, 65 लाख नाम हटाए गए

नई दिल्ली/पटना | 28 जुलाई 2025:बिहार में चल रहे वोटर लिस्ट विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को इनकार कर दिया। साथ ही अदालत ने चुनाव आयोग से कहा है कि वह आधार कार्ड और वोटर आईडी को SIR में वैध दस्तावेज के रूप में रखने पर विचार करे।

राशन कार्ड पर चुनाव आयोग की आपत्ति

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से बताया गया कि राशन कार्ड को SIR में पहचान के दस्तावेज के रूप में शामिल नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह बड़े पैमाने पर बनता है और इसमें फर्जीवाड़े की आशंका अधिक होती है।

कोर्ट का स्पष्ट निर्देश: “SIR पर फिलहाल कोई रोक नहीं”

जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने यह स्पष्ट किया कि फिलहाल SIR की प्रक्रिया पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है। कोर्ट ने कहा कि “SIR पर कोई रोक नहीं, यह खबर जल्दी सार्वजनिक करें।” साथ ही अदालत ने यह भी बताया कि अगली विस्तृत सुनवाई की तिथि मंगलवार को तय की जाएगी।


क्या है SIR और क्यों मचा है राजनीतिक घमासान?

बिहार में चुनाव आयोग की ओर से वोटर लिस्ट की शुद्धता जांचने के लिए SIR प्रक्रिया चलाई जा रही है, जिसमें बड़े पैमाने पर फर्जी, मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया के पहले चरण के आंकड़े 27 जुलाई को जारी किए गए, जिनके अनुसार:

  • पहले कुल मतदाता: 7.89 करोड़
  • वर्तमान संख्या: 7.24 करोड़
  • हटाए गए नाम: 65 लाख
    • मृतक: 22 लाख
    • स्थानांतरित: 36 लाख
    • अन्य क्षेत्र के निवासी: 7 लाख

चुनाव आयोग का कहना है कि यह संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे आगामी चुनावों की पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।


राजनीतिक दलों की आपत्तियां और कोर्ट में याचिकाएं

इस प्रक्रिया के खिलाफ राजद सांसद मनोज झा, TMC सांसद महुआ मोइत्रा समेत 11 नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और गोपाल शंकर नारायण ने दलील दी कि इस प्रक्रिया के दौरान वंचित तबकों, खासकर दलितों और अल्पसंख्यकों के नाम बड़े पैमाने पर हटाए जा रहे हैं।

हालांकि, बेंच ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया पर कोई अंतरिम रोक की मांग नहीं की है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से 21 जुलाई तक जवाब मांगा था और मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई तय की गई थी।


क्या है आगे की दिशा?

कोर्ट अब मंगलवार को यह तय करेगा कि इस संवेदनशील और राजनीतिक रूप से अहम मुद्दे पर विस्तृत सुनवाई कब और कैसे होगी। फिलहाल, चुनाव आयोग की ओर से SIR प्रक्रिया जारी है और आधार व वोटर आईडी जैसे पहचान पत्रों की मान्यता पर विचार किया जा रहा है।


 

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