
बिहार सरकार में समाज कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभालते ही मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकार की प्राथमिकता समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े जरूरतमंद लोगों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। शुक्रवार को सचिवालय स्थित विभागीय मुख्यालय में पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने विभागीय योजनाओं की समीक्षा की और अधिकारियों को पारदर्शी तथा जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
पदभार ग्रहण समारोह के दौरान विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने मंत्री का स्वागत किया। समाज कल्याण विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह, सामाजिक सुरक्षा निदेशालय के निदेशक धर्मेंद्र कुमार, आईसीडीएस एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण निदेशालय के निदेशक योगेश कुमार सागर सहित कई वरिष्ठ अधिकारी इस मौके पर मौजूद रहे।
पदभार ग्रहण के बाद मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता ने विभागीय अधिकारियों के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक की। बैठक में विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति, उनके क्रियान्वयन और जमीनी स्तर पर आने वाली चुनौतियों पर चर्चा हुई।
मंत्री ने कहा कि समाज कल्याण विभाग का उद्देश्य केवल योजनाएं चलाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि उनका लाभ वास्तव में जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे। उन्होंने कहा कि गरीब, वंचित, असहाय, दिव्यांग और पिछड़े वर्ग के लोगों तक योजनाओं की पहुंच मजबूत करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होगी।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। हर पात्र लाभार्थी तक समय पर सहायता पहुंचनी चाहिए और इसके लिए विभागीय निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा।
डॉ. श्वेता गुप्ता ने महिलाओं, बच्चों, वृद्धजनों, विधवाओं और दिव्यांगजनों के कल्याण को विभाग की सबसे अहम प्राथमिकताओं में शामिल बताया। उन्होंने कहा कि इन वर्गों के लिए चल रही योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नई पहलें की जाएंगी।
मंत्री ने कहा कि महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए स्वयं सहायता समूहों, कौशल विकास और रोजगार आधारित योजनाओं को और मजबूत किया जाएगा ताकि महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
उन्होंने बाल विकास और पोषण से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य और पोषण के लिए जमीनी स्तर पर काम तेज किया जाएगा। खासकर ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में पोषण योजनाओं की प्रभावशीलता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
मंत्री ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी समाज कल्याण की मुख्य धारा से जोड़कर देखा जाएगा। सरकार चाहती है कि गरीब और कमजोर वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों।
बैठक में आईसीडीएस योजनाओं, वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग सहायता योजनाओं और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लाभार्थियों को योजनाओं का लाभ समय पर मिले और प्रक्रिया को अधिक सरल बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि कई बार लोग जानकारी के अभाव या प्रशासनिक जटिलताओं के कारण योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते। इसलिए विभाग को जागरूकता और जनसंपर्क अभियान भी मजबूत करना होगा।
डॉ. श्वेता गुप्ता ने फील्ड स्तर पर बेहतर समन्वय बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि केवल सचिवालय स्तर पर योजनाएं बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि जिला और प्रखंड स्तर पर भी सक्रिय निगरानी जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों को नियमित समीक्षा बैठकें करने और योजनाओं की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही तकनीक के उपयोग को बढ़ाने पर भी जोर दिया गया ताकि योजनाओं की निगरानी अधिक प्रभावी ढंग से की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे बड़े राज्य में समाज कल्याण विभाग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। राज्य में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो सरकारी सहायता योजनाओं पर निर्भर रहते हैं।
सामाजिक सुरक्षा, पोषण, महिला सशक्तिकरण और दिव्यांग सहायता जैसी योजनाएं सीधे गरीब और कमजोर वर्गों के जीवन को प्रभावित करती हैं। ऐसे में विभागीय कार्यप्रणाली की पारदर्शिता और प्रभावशीलता बेहद जरूरी मानी जाती है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि नई सरकार में समाज कल्याण योजनाओं को लेकर गंभीर संदेश देने की कोशिश की जा रही है। मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता के बयान को भी इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
पदभार ग्रहण के बाद मंत्री ने विभागीय कार्यालय का भ्रमण भी किया और कर्मचारियों से संवाद किया। उन्होंने कर्मचारियों से ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करने की अपील की।
उन्होंने कहा कि समाज कल्याण विभाग केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि मानव सेवा से जुड़ा विभाग है। इसलिए यहां काम करने वाले हर अधिकारी और कर्मचारी को समाज के कमजोर वर्गों की समस्याओं को समझते हुए काम करना होगा।
सामाजिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में महिला सशक्तिकरण, पोषण और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और अधिक मजबूत करने की जरूरत है। अगर सरकार इन क्षेत्रों में प्रभावी काम करती है तो इसका बड़ा सामाजिक असर देखने को मिल सकता है।
फिलहाल मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता के पदभार संभालने के बाद विभाग में नई योजनाओं और सुधारों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर महिलाओं, बच्चों और दिव्यांगजनों से जुड़ी योजनाओं को लेकर लोगों की उम्मीदें बढ़ी हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले महीनों में विभाग किस तरह योजनाओं के क्रियान्वयन में सुधार लाता है और क्या वास्तव में अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ प्रभावी तरीके से पहुंच पाता है या नहीं।
सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि समाज कल्याण विभाग को अधिक सक्रिय, जवाबदेह और जनकेंद्रित बनाया जाएगा ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर और पारदर्शी तरीके से सहायता मिल सके।


