
बिहार सरकार में सहकारिता विभाग की जिम्मेदारी संभालते ही मंत्री राम कृपाल यादव ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने को लेकर बड़ा विजन पेश किया है। शुक्रवार को पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने साफ कहा कि आने वाले समय में पैक्स, सहकारी बैंक, वेजफेड और उत्पादक समितियों को मजबूत बनाकर गांवों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी जाएगी।
पटना स्थित सहकारिता विभाग कार्यालय में आयोजित पदभार ग्रहण समारोह के दौरान विभागीय अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह, निबंधक सहयोग समितियां रजनीश कुमार सिंह, अपर सचिव अभय कुमार सिंह, वेजफेड के प्रबंध निदेशक डॉ. गगन और बिहार राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड के प्रबंध निदेशक मनोज कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
पदभार ग्रहण करने के बाद मंत्री राम कृपाल यादव ने विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक भी की। बैठक में विभाग की वर्तमान स्थिति, योजनाओं और भविष्य की कार्ययोजना को लेकर विस्तार से चर्चा हुई।
मंत्री ने कहा कि बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहकारिता व्यवस्था की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार सहकारिता केवल आर्थिक मॉडल नहीं, बल्कि सामाजिक सशक्तिकरण का भी प्रभावी माध्यम है।
उन्होंने कहा कि अगर सहकारी संस्थाओं को मजबूत किया जाए तो गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। साथ ही किसानों, महिलाओं और युवाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।
राम कृपाल यादव ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि सहकारिता मॉडल को गांव-गांव तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जाए। इसके लिए पैक्स और सहकारी समितियों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने पर विशेष जोर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग के माध्यम से केवल सहकारी समितियों का पंजीकरण ही नहीं, बल्कि उनके संचालन की निगरानी और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाना भी जरूरी है।
मंत्री ने बताया कि सहकारी बैंकों के जरिए किसानों को कृषि और गैर-कृषि ऋण उपलब्ध कराना सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। साथ ही खाद्यान्न अधिप्राप्ति के माध्यम से किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य दिलाने की दिशा में भी सहकारिता विभाग की अहम भूमिका है।
उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश होगी कि किसानों और ग्रामीण उत्पादकों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिले और उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराया जाए।
राम कृपाल यादव ने विभाग की भावी योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पैक्स को केवल अनाज खरीद केंद्र तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बहुआयामी केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कृषि इनपुट, भंडारण, खाद्य प्रसंस्करण, विपणन और अन्य व्यवसायिक गतिविधियों को पैक्स से जोड़ने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और गांवों की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
मंत्री ने स्पष्ट कहा कि पैक्स सहकारिता व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी है। इसलिए इसके सर्वांगीण विकास के लिए विशेष पहल की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में सहकारिता व्यवस्था को मजबूत करना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। राज्य की बड़ी आबादी अब भी कृषि और ग्रामीण व्यवसायों पर निर्भर है।
अगर पैक्स और सहकारी समितियों को आधुनिक सुविधाओं, तकनीक और बाजार से जोड़ा जाता है तो इसका सीधा फायदा किसानों और ग्रामीण युवाओं को मिल सकता है।
मंत्री ने महिलाओं की भागीदारी पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों और महिला उत्पादक समितियों को सहकारिता मॉडल से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से अधिक सक्षम बनाया जाएगा।
उन्होंने युवाओं के लिए भी नई संभावनाओं की बात कही। उनके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि आधारित उद्योग, भंडारण और प्रोसेसिंग इकाइयों को बढ़ावा देकर स्थानीय रोजगार तैयार किए जा सकते हैं।
राम कृपाल यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय योजनाओं को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल योजनाएं बनाना पर्याप्त नहीं, बल्कि उनका लाभ सही लोगों तक पहुंचना जरूरी है।
उन्होंने विभागीय कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और तकनीक आधारित बनाने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि डिजिटल व्यवस्था से भ्रष्टाचार और अनियमितताओं पर नियंत्रण लगाने में मदद मिलेगी।
राजनीतिक और आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में सहकारिता क्षेत्र को लंबे समय से नई ऊर्जा और मजबूत नेतृत्व की जरूरत थी। ऐसे में नई सरकार की यह पहल ग्रामीण विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार अगर सहकारिता मॉडल को सही तरीके से लागू किया जाए तो इससे छोटे किसानों, डेयरी उत्पादकों और ग्रामीण उद्यमियों को बड़ा लाभ मिल सकता है।
पदभार ग्रहण समारोह के दौरान अधिकारियों ने मंत्री को विभागीय योजनाओं और वर्तमान चुनौतियों की जानकारी दी। मंत्री ने सभी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से काम करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि सहकारिता व्यवस्था को केवल सरकारी ढांचे तक सीमित न रखा जाए, बल्कि इसे गांवों की आर्थिक ताकत बनाया जाए।
सामाजिक और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में सहकारी संस्थाओं की क्षमता काफी बड़ी है, लेकिन कई जगहों पर उन्हें आधुनिक संसाधन और बेहतर प्रबंधन नहीं मिल पाता। अगर सरकार इस दिशा में गंभीरता से काम करती है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा हो सकता है।
फिलहाल मंत्री राम कृपाल यादव के पदभार संभालने के बाद सहकारिता विभाग में नई रणनीतियों और योजनाओं को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। खासकर पैक्स को बहुउद्देश्यीय आर्थिक केंद्र बनाने की योजना को काफी अहम माना जा रहा है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले महीनों में विभाग इन योजनाओं को किस तरह जमीन पर उतारता है और क्या सहकारिता मॉडल वास्तव में बिहार के गांवों में आर्थिक बदलाव का माध्यम बन पाता है या नहीं।


