
पटना। बिहार में हाशिए पर खड़े समाज के उत्थान और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग ने अपनी कमर कस ली है। गुरुवार, 14 मई 2026 को पटना में विभाग की एक अत्यंत महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता विभाग के मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने की। इस बैठक का मुख्य स्वर ‘जवाबदेही’ और ‘पारदर्शिता’ रहा। मंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि विभाग की योजनाएं केवल फाइलों की शोभा बढ़ाने के लिए नहीं हैं, बल्कि उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। बैठक में सबसे बड़ा निर्णय आगामी ‘जनजातीय गरिमा उत्सव’ को लेकर लिया गया, जिसके अंतर्गत 18 मई से 25 मई तक पूरे प्रदेश में ‘जनभागीदारी अभियान’ चलाया जाएगा। इस अभियान के माध्यम से विभाग सीधे जनता के द्वार तक पहुँचेगा और उनकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान करने का प्रयास करेगा।
जनभागीदारी अभियान: 18 से 25 मई तक दिखेगा योजनाओं का असर
लखेंद्र कुमार रौशन ने जिला कल्याण पदाधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि जनजातीय गरिमा उत्सव हमारे लिए केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक संकल्प है। 18 मई से शुरू होने वाले आठ दिवसीय जनभागीदारी अभियान के दौरान राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविर (हेल्थ कैंप) लगाए जाएंगे। इसके अलावा, विभाग द्वारा निर्मित सड़कों, भवनों और आंगनबाड़ी केंद्रों की स्थिति की समीक्षा की जाएगी और जहाँ भी सुधार की आवश्यकता है, उसे प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाएगा। मंत्री ने निर्देश दिया कि इस अभियान के दौरान अधिकारी एसी-एसटी टोलों में जाकर लोगों को उनके अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं के प्रति जागरूक करें। यह सुनिश्चित किया जाए कि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कोई भी योजना पात्र लाभुकों की पहुंच से बाहर न रहे।
शिक्षा पर ‘समीक्षात्मक प्रहार’: विद्यालयों में 100% उपस्थिति का लक्ष्य
बैठक के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में विभाग के प्रदर्शन पर मंत्री ने गहरी चिंता व्यक्त की। विशेष रूप से अनुसूचित जाति-जनजाति आवासीय विद्यालयों में छात्रों की कम उपस्थिति और डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से दी जाने वाली सहायता में हो रही देरी पर उन्होंने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। लखेंद्र कुमार रौशन ने कड़ा निर्देश दिया कि इसी माह के भीतर सभी आवासीय विद्यालयों में छात्रों की 100 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित की जाए। इसके लिए उन्होंने अधिकारियों को व्यापक प्रचार-प्रसार करने और अभिभावकों के साथ समन्वय स्थापित करने को कहा।
छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने एक बड़ा मानवीय निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि जो बच्चे अपने गृह जिले से बहुत दूर के जिलों में पढ़ रहे हैं, उन्हें उनके आसपास के जिलों के विद्यालयों में ही दाखिला लेने की अनुमति दी जाए, ताकि उन्हें और उनके परिजनों को परेशानी न हो। इसके साथ ही, विद्यालयों में शिक्षकों की कमी को दूर करने के लिए उन्होंने घोषणा की कि 2000 से अधिक रिक्त पदों पर शिक्षकों की बहाली की प्रक्रिया जल्द ही पूरी कर ली जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सरकार की पहली प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
छात्रावास और प्रशिक्षण केंद्र: सुरक्षा और गुणवत्ता पर पैनी नजर
छात्रावासों और प्राक परीक्षा प्रशिक्षण केंद्रों (PETC) की समीक्षा करते हुए मंत्री ने छात्रों की सुरक्षा और सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि छात्रावास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य के निर्माण का केंद्र होने चाहिए। वहाँ छात्रों को स्वच्छ वातावरण, सुरक्षा और अध्ययन के लिए पर्याप्त सुविधाएं मिलनी चाहिए।
प्रशिक्षण केंद्रों के बारे में बात करते हुए रौशन ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को किसी भी प्रकार की शैक्षणिक समस्या नहीं होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र संचालकों और वहां पढ़ाने वाले प्रोफेसरों को आगाह किया कि वे केवल खानापूर्ति न करें, बल्कि अभ्यर्थियों को उच्च कोटि की शिक्षा प्रदान करें। उन्होंने विभाग को महीने में दो बार इन केंद्रों की औचक समीक्षा करने का निर्देश दिया ताकि वहां की वास्तविक स्थिति का पता चल सके।
सामाजिक न्याय और रोजगार: सूरज कुमार को मिला नियुक्ति पत्र
अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (POA) की समीक्षा करते हुए मंत्री ने लंबित मामलों पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि न्याय में देरी, न्याय न मिलने के समान है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जितने भी मामले अब तक लंबित हैं, उन्हें तुरंत संज्ञान में लेकर लाभुकों तक मुआवजा और सहायता पहुँचाना सुनिश्चित करें। इसी क्रम में, लखेंद्र कुमार रौशन ने एक मिसाल पेश करते हुए लखीसराय जिले के सूरज कुमार को मौके पर ही नियुक्ति पत्र प्रदान किया। सूरज कुमार को अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत रोजगार का अधिकार मिला था, जिसे मंत्री ने व्यक्तिगत रुचि लेकर संपन्न कराया। उन्होंने अन्य रिक्त पदों पर भी जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए ताकि पीड़ित परिवारों को आर्थिक संबल मिल सके।
महादलित विकास मिशन: 3 महीने में पूरे होंगे सामुदायिक भवन
बिहार महादलित विकास मिशन के तहत चल रही योजनाओं की समीक्षा करते हुए मंत्री ने निर्माणाधीन सामुदायिक भवन-सह-वर्कशेड की स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने पाया कि कई भवनों का निर्माण कार्य लंबे समय से अधूरा है। इस पर उन्होंने सख्त समय-सीमा तय करते हुए निर्देश दिया कि अगले तीन महीनों के भीतर सभी निर्माणाधीन सामुदायिक भवनों का कार्य पूर्ण कर लिया जाए। इन भवनों का उपयोग समाज के लोग अपने सामाजिक कार्यों और कौशल विकास के लिए कर सकेंगे। मंत्री ने दोहराया कि कोई भी पात्र व्यक्ति या क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से वंचित नहीं रहना चाहिए।
ईंधन बचत का संदेश: समीक्षा भवन के बजाय ऑनलाइन मोड में बैठक
बैठक के समापन पर मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। दरअसल, यह बैठक पहले विभाग के मुख्यालय में भौतिक रूप से आयोजित होनी थी, जिसमें सभी जिलों के कल्याण पदाधिकारियों को पटना आना था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की अपील को ध्यान में रखते हुए मंत्री ने अंतिम समय में इसे ‘ऑनलाइन मोड’ (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग) में करने का निर्णय लिया।
मंत्री ने कहा कि डिजिटल माध्यम से जुड़कर हमने न केवल सरकारी धन और ईंधन की बचत की है, बल्कि अधिकारियों का कीमती समय भी बचाया है, जिसे वे अब अपने क्षेत्रों में जनसेवा में लगा सकेंगे। इस ऑनलाइन समीक्षा बैठक में विभाग के सचिव संदीप आर पुडकलकट्टी, निदेशक प्रियंका रानी और अन्य वरीय विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में योजनाओं की बेहतर निगरानी, शिकायत निवारण तंत्र को सुदृढ़ करने और लक्षित लाभार्थियों तक पहुंच बढ़ाने के लिए नई तकनीकी रणनीतियों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। विभाग अब पूरी तरह से एलर्ट मोड पर है और 18 मई से शुरू होने वाला अभियान बिहार के वंचित वर्गों के लिए एक नई सुबह लेकर आएगा।


