​आसमान से मंडराते खतरे और अंधेरे के बीच बिहार की तैयारी: पटना समेत 6 जिलों में हवाई हमले और ब्लैकआउट की सफल मॉकड्रिल

पटना। आधुनिक युग की युद्धकालीन चुनौतियों और आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए बिहार सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग ने गुरुवार, 14 मई 2026 को अपनी प्रशासनिक मुस्तैदी का बड़ा प्रदर्शन किया। गृह मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देशों के आलोक में आपदा प्रबंधन विभाग, नागरिक सुरक्षा निदेशालय और संबंधित जिला प्रशासनों के साझा सहयोग से राज्य के छह महत्वपूर्ण जिलों—पटना, किशनगंज, बेगूसराय, पूर्णिया, अररिया और कटिहार—में हवाई हमले (Air Raid) और ब्लैकआउट से संबंधित एक वृहद मॉकड्रिल का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस पूरे अभ्यास का मुख्य केंद्र बिंदु यह परखना था कि यदि अचानक राज्य पर कोई हवाई खतरा मंडराता है या आपातकाल की स्थिति पैदा होती है, तो विभिन्न विभाग और सुरक्षा एजेंसियां किस प्रकार आपस में तालमेल बिठाकर जान-माल की रक्षा करेंगी। दिनभर चली इस कवायद का समापन शाम 07:00 बजे से 07:15 बजे के बीच आयोजित किए गए पूर्ण ब्लैकआउट के साथ हुआ, जिसने युद्धकालीन परिस्थितियों की सजीव झांकी प्रस्तुत की।

रणनीतिक मुस्तैदी: मुख्य सचिव और महानिदेशक की सीधी निगरानी

​इस जटिल अभ्यास को अमली जामा पहनाने के लिए प्रशासन के शीर्ष स्तर पर बड़ी तैयारी की गई थी। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत के स्पष्ट निर्देशों के आलोक में इस मॉकड्रिल का खाका खींचा गया था। नागरिक सुरक्षा निदेशालय के महानिदेशक डॉ. परेश सक्सेना स्वयं पटना स्थित कंट्रोल रूम में डटे रहे और वहां से लगातार हर जिले की स्थिति का बारीकी से जायजा लेते रहे। दूसरी ओर, आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल के मार्गदर्शन में विभाग के संयुक्त सचिव मो. नदीमुल गफ्फार सिद्दीकी ने ‘राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र’ (SEOC) से कमान संभाली। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से छह जिलों के जिला पदाधिकारियों से जुड़कर जमीनी स्तर पर हो रही गतिविधियों की समीक्षा की। इस अभ्यास का उद्देश्य केवल प्रक्रियाओं को दोहराना नहीं था, बल्कि संचार प्रणालियों की प्रभावशीलता और राहत कार्यों की गति की वास्तविक जांच करना भी था।

छह महत्वपूर्ण परिदृश्य: सायरन की गूँज और बचाव का जज्बा

​मॉकड्रिल के दौरान आपदा प्रबंधन विभाग ने छह अलग-अलग और चुनौतीपूर्ण परिदृश्यों पर काम किया। इसमें ‘एयर रेड अर्ली वार्निंग’ (हवाई हमले की पूर्व चेतावनी) के तहत सायरन बजाकर लोगों को सतर्क किया गया। इसके बाद ‘इवैक्युएशन एंड शेल्टरिंग’ (निकासी और आश्रय) का अभ्यास हुआ, जहाँ भीड़भाड़ वाले इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की प्रक्रिया दोहराई गई। बचाव कार्यों की कड़ी में ‘सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन’ चलाया गया ताकि मलबे में दबे या फंसे हुए लोगों को समय रहते निकाला जा सके।

​स्वास्थ्य विभाग की तत्परता जांचने के लिए ‘मेडिकल रिस्पॉन्स एंड कैजुअल्टी इवैक्युएशन’ का सहारा लिया गया, जिसमें घायलों को त्वरित प्राथमिक उपचार देकर अस्पताल पहुँचाने का प्रदर्शन हुआ। वहीं, आगजनी की स्थितियों से निपटने के लिए ‘फायर फाइटिंग’ और अंत में हवाई हमले के दौरान दुश्मन को भ्रमित करने के लिए ‘ब्लैकआउट मेजर्स’ का कड़ाई से पालन किया गया। इन सभी चरणों में नागरिक सुरक्षा के स्वयंसेवकों और आपदा प्रबंधन की टीमों ने पेशेवर दक्षता का परिचय दिया।

पटना से सीमांचल तक: प्रमुख केंद्रों पर चला ‘ऑपरेशन सुरक्षा’

​राजधानी पटना में इस मॉकड्रिल का प्रभाव व्यापक स्तर पर देखा गया। जिला प्रशासन ने समाहरणालय के मुख्य भवन, बिस्कोमान भवन, बांकीपुर बस स्टैंड और आईजीआईएमएस (IGIMS) परिसर जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले स्थानों को अभ्यास के लिए चुना। इन केंद्रों पर अचानक सायरन बजते ही सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाल लिया और लोगों को सुरक्षित निकासी का अभ्यास कराया गया।

​सीमांचल के जिलों में भी इसकी गंभीरता वैसी ही दिखी। किशनगंज में समाहरणालय और बस स्टैंड के साथ-साथ गांधी चौक पर मॉकड्रिल आयोजित की गई। पूर्णिया में विश्वविद्यालय परिसर, जिला स्कूल, रंगभूमि मैदान और गुलाब बाग मंडी जैसे आर्थिक और शैक्षणिक केंद्रों पर अभ्यास किया गया। कटिहार जिले में रेलवे स्टेशन जैसे महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र और ट्रेंड्स मॉल व सत्कार होटल जैसे सार्वजनिक स्थलों पर बचाव कार्यों की कसरत की गई। अररिया जिले में इसका दायरा और भी बड़ा था, जहाँ जिला कृषि कार्यालय से लेकर फारबिसगंज, जोगबनी और जोकीहाट जैसे नगर निकायों और पंचायतों तक में प्रशासनिक सक्रियता देखी गई।

बेगूसराय का औद्योगिक सुरक्षा चक्र: रिफाइनरी और थर्मल पावर पर विशेष नजर

​बेगूसराय जिला, जो बिहार का औद्योगिक हृदय स्थल माना जाता है, वहां इस मॉकड्रिल की संवेदनशीलता काफी अधिक थी। यहाँ सदर अस्पताल और इंजीनियरिंग कॉलेज के अलावा देश की ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े संस्थानों—आईओसीएल (IOCL) बरौनी, एनटीपीसी (NTPC) बरौनी और हर्ल (HURL) बरौनी में विशेष अभ्यास किया गया। औद्योगिक क्षेत्रों में हवाई हमले के दौरान रसायनों और ज्वलनशील पदार्थों की सुरक्षा एक बड़ी चुनौती होती है, जिसे देखते हुए दमकल विभाग और औद्योगिक सुरक्षा बलों ने समन्वित प्रयास किए। इन संस्थानों के भीतर ब्लैकआउट और आपातकालीन शटडाउन की प्रक्रियाओं को भी परखा गया ताकि किसी भी वास्तविक संकट की स्थिति में भारी नुकसान से बचा जा सके।

ब्लैकआउट: 15 मिनट का सन्नाटा और लाइव स्ट्रीमिंग की निगरानी

​शाम के सात बजते ही पटना के जिलाधिकारी त्यागराजन एस.एम. और कटिहार के जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी स्वयं सिमुलेशन स्थलों पर मौजूद रहे। 07:00 से 07:15 के बीच जब निर्धारित क्षेत्रों में लाइटें बंद की गईं और ब्लैकआउट लागू हुआ, तो पूरा मंजर बदल गया। इस दौरान शहरों की रोशनी बुझाकर यह देखा गया कि आपातकालीन सेवाएं अंधेरे में किस तरह अपना काम जारी रखती हैं।

​राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) से इस पूरी प्रक्रिया की लाइव स्ट्रीमिंग की गई। जिलाधिकारियों ने अपनी-अपनी विवरणी प्रस्तुत करते हुए बताया कि ब्लैकआउट के दौरान नागरिकों ने किस तरह सहयोग किया और आवश्यक सेवाओं—जैसे अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड और कंट्रोल रूम—में किस तरह की वैकल्पिक व्यवस्थाएं काम कर रही थीं। अधिकारियों के अनुसार, लाइव स्ट्रीमिंग के माध्यम से मुख्यालय को हर गतिविधि की रीयल-टाइम जानकारी मिली, जिससे भविष्य की योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी।

समन्वित प्रयास और भविष्य की रणनीति

​इस वृहद आयोजन को सफल बनाने में नागरिक सुरक्षा निदेशालय के पुलिस अधीक्षक हिमांशु शंकर त्रिवेदी, आपदा प्रबंधन के उप सचिव कुमार विजयेंद्र, और नगर विकास एवं आवास विभाग के तकनीकी सचिव अबुल कलाम आजाद की भूमिका अहम रही। नागरिक सुरक्षा निदेशालय के अवर सचिव राकेश रंजन सिन्हा सहित अन्य अधिकारियों ने फील्ड और कंट्रोल रूम के बीच सेतु का कार्य किया।

​प्रशासन का मानना है कि इस तरह की मॉकड्रिल से न केवल सरकारी मशीनीरी की कमियां उजागर होती हैं, बल्कि आम जनता में भी आपदा के प्रति जागरूकता बढ़ती है। हवाई हमले जैसी स्थितियों में घबराहट के कारण होने वाले नुकसान को कम करने के लिए जन-भागीदारी और नियमित अभ्यास अनिवार्य है। बिहार जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य के लिए, जिसकी सीमाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़ी हैं, इस प्रकार की युद्धकालीन तैयारी प्रशासनिक ढांचे को और अधिक सुदृढ़ बनाती है। 14 मई का यह अभ्यास यह साबित करने में सफल रहा कि बिहार का आपदा प्रबंधन तंत्र किसी भी अनहोनी के लिए पूरी तरह ‘एलर्ट मोड’ पर है।

  • ये भी पढ़े..

    तकनीकी शिक्षा, स्टार्टअप और डिजिटल विकास से बिहार को मिलेगी नई रफ्तार: मुख्यमंत्री

    Share Add as a preferred…

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किए 75 अमृत भारत स्टेशन, भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण को मिली नई गति

    Share Add as a preferred…