विक्रमशिला पुल संकट के बीच जाह्नवी घाट बना ‘लाइफलाइन’: जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने सुविधाओं का लिया जायजा; यात्रियों के लिए नि:शुल्क नाव और मेडिकल कैंप की व्यवस्था

भागलपुर/नवगछिया। विक्रमशिला महासेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद भागलपुर और नवगछिया के बीच उपजे भीषण परिवहन संकट को देखते हुए जिला प्रशासन अब ‘वार मोड’ में कार्य कर रहा है। गंगा के दोनों किनारों के बीच हजारों यात्रियों के सुरक्षित और सुगम आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए जाह्नवी (महादेवपुर) घाट को एक व्यवस्थित ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया गया है। गुरुवार, 07 मई 2026 को जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने स्वयं स्थल पर पहुंचकर व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत का निरीक्षण किया। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जब तक पुल की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक नदी मार्ग ही यात्रियों के लिए मुख्य सहारा है, इसलिए प्रशासन की प्राथमिकता यह है कि किसी भी मुसाफिर को घाट पर असुविधा या असुरक्षा का अहसास न हो। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि संसाधनों की कोई कमी नहीं होनी चाहिए और यात्रियों के फीडबैक के आधार पर व्यवस्थाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाए।

महादेवपुर घाट का कायाकल्प: कीचड़ से मुक्ति और सुगम मार्ग

​विक्रमशिला पुल टूटने के शुरुआती दिनों में घाटों पर कीचड़ और अव्यवस्थित रास्तों के कारण यात्रियों को काफी मशक्कत करनी पड़ रही थी। इसे गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने जाह्नवी घाट के पूरे इलाके का समतलीकरण करने का आदेश दिया था। वर्तमान में, घाट की रेतीली जमीन पर ईंटों और मिट्टी के माध्यम से एक समतल मार्ग तैयार किया गया है जो सीधे नावों के पड़ाव तक पहुँचता है। इससे बुजुर्गों, महिलाओं और बीमार यात्रियों को गंगा के किनारे तक पहुँचने में अब शारीरिक कष्ट नहीं झेलना पड़ रहा है। जिलाधिकारी ने पथ निर्माण और स्थानीय निकायों को निर्देश दिया कि नदी के जलस्तर में होने वाले बदलावों के अनुसार मार्ग को निरंतर दुरुस्त रखा जाए ताकि नाव तक पहुँचने में कोई बाधा न आए।

​निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि यात्रियों के बैठने और धूप से बचने के लिए बड़े शिविर (तंबू) लगाए गए हैं। इन शिविरों में पर्याप्त संख्या में कुर्सियों और पेयजल की व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि चिलचिलाती गर्मी को देखते हुए पेयजल की आपूर्ति निरंतर बनी रहनी चाहिए और शिविरों के भीतर पंखों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए ताकि प्रतीक्षा के दौरान लोगों को लू या गर्मी का प्रकोप न झेलना पड़े।

नि:शुल्क नाव सेवा: आम आदमी को आर्थिक बोझ से राहत

​इस आपदा की घड़ी में जिला प्रशासन द्वारा ली गई सबसे बड़ी राहतकारी पहल नि:शुल्क नाव सेवा है। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने बताया कि जाह्नवी घाट से बरारी पुल घाट के बीच चलने वाली सरकारी नावों के लिए यात्रियों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है। इसके लिए पर्याप्त संख्या में बड़ी नावों और स्टीमरों का अधिग्रहण किया गया है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया है कि किसी भी निजी नाव संचालक द्वारा अवैध वसूली की शिकायत मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

​यात्रियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए जिलाधिकारी ने ‘जीरो वेटिंग टाइम’ की रणनीति पर काम करने को कहा है। उन्होंने अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ), नवगछिया को निर्देश दिया कि जाह्नवी घाट पर नावों की ऐसी रोटेशन प्रणाली बनाई जाए कि जैसे ही एक नाव भरे, दूसरी नाव तुरंत घाट पर लग जाए। वर्तमान में बरारी घाट के अतिरिक्त जाह्नवी घाट पर भी परिवहन के पर्याप्त साधन उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे यात्रियों को नदी पार करने के लिए घंटों इंतजार नहीं करना पड़ रहा है। जिलाधिकारी ने स्वयं नावों के परिचालन समय और उनकी वहन क्षमता की जांच की ताकि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन न हो।

घाट पर स्वास्थ्य और सुरक्षा का अभेद्य कवच

​गंगा के किनारे हजारों लोगों की आवाजाही को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने जाह्नवी घाट पर एक अस्थाई चिकित्सा शिविर स्थापित किया है। जिलाधिकारी ने इस शिविर का निरीक्षण किया और वहां मौजूद दवाओं के स्टॉक की जानकारी ली। आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए घाट पर स्ट्रेचर और एंबुलेंस की चौबीसों घंटे उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। जिलाधिकारी ने सिविल सर्जन को निर्देश दिया कि भीषण गर्मी के कारण डिहाइड्रेशन या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं से जूझने वाले यात्रियों को तत्काल प्राथमिक उपचार मिले।

​सुरक्षा के दृष्टिकोण से पूरे जाह्नवी घाट को जिला पुलिस और एसडीआरएफ की निगरानी में रखा गया है। घाट पर एक जिला नियंत्रण कक्ष (Control Room) सक्रिय किया गया है, जहाँ से हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि लाउडस्पीकर के माध्यम से यात्रियों को निरंतर सूचनाएं दी जाएं ताकि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या भगदड़ की स्थिति से बच सकें। रात के समय भी यात्रियों की आवाजाही सुगम बनी रहे, इसके लिए पूरे घाट क्षेत्र में हाई-मास्ट लाइटें और जनरेटर के माध्यम से बिजली की समुचित व्यवस्था की गई है। जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सूर्यास्त के बाद भी घाट पर पर्याप्त रोशनी रहनी चाहिए ताकि सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो।

प्रशासनिक समन्वय और अधिकारियों की जवाबदेही

​जाह्नवी घाट के इस निरीक्षण के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), नवगछिया सहित अंचल अधिकारी और पुलिस के वरीय पदाधिकारी मौजूद थे। जिलाधिकारी ने एसडीओ नवगछिया को इस पूरे ट्रांजिट पॉइंट का नोडल प्रभारी नियुक्त करते हुए दैनिक रिपोर्टिंग के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ समन्वय बिठाकर यह सुनिश्चित किया जाए कि घाट के पास ऑटो और ई-रिक्शा का स्टैंड व्यवस्थित हो, ताकि यात्री नाव से उतरने के बाद सीधे अपने गंतव्य के लिए वाहन प्राप्त कर सकें।

​जिलाधिकारी ने मौके पर मौजूद यात्रियों से भी बातचीत की और उनका हालचाल जाना। यात्रियों ने प्रशासन द्वारा किए गए इंतजामों पर संतोष व्यक्त किया, विशेषकर नि:शुल्क नाव और घाट पर रोशनी की व्यवस्था को सराहा गया। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को चेतावनी दी कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई या यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायत मिली, तो संबंधित पदाधिकारी की जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि विक्रमशिला पुल की मरम्मत होने तक जाह्नवी घाट भागलपुर की परिवहन व्यवस्था का मुख्य केंद्र बना रहेगा, इसलिए यहाँ की व्यवस्थाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

आगामी चुनौतियां और निरंतर निगरानी

​गंगा के जलस्तर में उतार-चढ़ाव और आने वाले मानसूनी मौसम को देखते हुए जिलाधिकारी ने तकनीकी विशेषज्ञों को भी सतर्क रहने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिया कि घाट के किनारे जो एप्रोच रोड बनाए गए हैं, उन्हें वाटरप्रूफ और मजबूत बनाया जाए ताकि बारिश की स्थिति में वहां फिसलन न हो। जिलाधिकारी ने आपदा प्रबंधन विभाग को भी सक्रिय रहने को कहा है ताकि किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में त्वरित राहत पहुँचाई जा सके।

​वर्तमान में जाह्नवी घाट पर की गई ये व्यवस्थाएं उन हजारों लोगों के लिए एक वरदान साबित हो रही हैं जो मजबूरी में इस पार से उस पार जा रहे हैं। जिलाधिकारी नवल किशोर चौधरी ने अंत में कहा कि प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि पुल टूटने का असर आम जनता की दैनिक दिनचर्या और आर्थिक गतिविधियों पर कम से कम पड़े। आने वाले दिनों में यदि भीड़ और बढ़ती है, तो नावों की संख्या में और इजाफा किया जाएगा। जिला प्रशासन की यह मुस्तैदी भागलपुर के नागरिकों को यह भरोसा दिला रही है कि संकट की इस घड़ी में तंत्र उनके साथ खड़ा है।

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