सीएम सम्राट चौधरी का बड़ा फैसला: 234 राजस्व अधिकारियों का निलंबन रद्द; विजय सिन्हा के आदेश को पलटते हुए जनगणना 2027 को दी प्राथमिकता

पटना। बिहार की सत्ता में हुए बड़े फेरबदल के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रशासनिक गलियारों में एक ऐसी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ की है, जिसने न केवल कर्मचारियों के बीच राहत की लहर पैदा की है, बल्कि राज्य सरकार के बदले हुए तेवरों को भी स्पष्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार, 21 अप्रैल 2026 को पूर्व उपमुख्यमंत्री और पूर्व राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा के उस कड़े फैसले को पलट दिया है, जिसके तहत 234 राजस्व अधिकारियों को निलंबित किया गया था। सरकार ने जनगणना 2027 जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को निर्बाध रूप से संपन्न कराने के लिए इन सभी अधिकारियों के निलंबन को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राज्य में स्वगणना (Self-Enumeration) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और इसमें अनुभवी अधिकारियों की अनुपस्थिति बर्दाश्त नहीं की जा सकती। मुख्यमंत्री का यह कदम यह संकेत देता है कि नई सरकार अनुशासन के साथ-साथ व्यावहारिक कार्यकुशलता और जनकल्याणकारी लक्ष्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है।

विजय सिन्हा का सख्त रुख बनाम सम्राट का राहत भरा फैसला

​गौरतलब है कि कुछ समय पहले जब विजय कुमार सिन्हा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग का प्रभार संभाल रहे थे, तब उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली को पटरी पर लाने के लिए बेहद सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने सामूहिक अवकाश और हड़ताल पर गए अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी थी कि सरकारी काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी। इसी सख्ती के क्रम में, हड़ताल पर रहने और विभागीय निर्देशों की अवहेलना करने के आरोप में 234 राजस्व पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था।

​हालांकि, 15 अप्रैल 2026 को सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद विभाग की प्राथमिकताओं में बदलाव देखा गया है। नई सरकार ने माना कि राजस्व पदाधिकारियों की एक बड़ी संख्या का निलंबन राज्य के महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्यों, विशेषकर भूमि सर्वेक्षण और जनगणना की तैयारियों को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर विभाग ने अब पुरानी कड़वाहट को भुलाते हुए अधिकारियों को काम पर वापस लौटने का सुनहरा मौका दिया है।

जनगणना 2027: राष्ट्रीय कार्य के लिए प्रशासनिक लामबंदी

​बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा जारी पत्र में यह रेखांकित किया गया है कि जनगणना 2027 का कार्य अब अपने महत्वपूर्ण चरण में पहुँच चुका है। सरकार ने इस कार्य को समय पर पूरा करने को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हड़ताली राजस्व कर्मियों की वापसी का रास्ता साफ किया गया है।

​आधिकारिक आदेश के अनुसार:

  • हड़ताल अवधि का समायोजन: सरकार ने घोषणा की है कि कर्मचारियों की हड़ताल की अवधि, जो 11 फरवरी 2026 से 19 अप्रैल 2026 तक रही, उसे ‘विशेष परिस्थिति’ में अवकाश (Leave) के रूप में समायोजित किया जाएगा।
  • तत्काल बहाली: सभी 234 राजस्व पदाधिकारियों के निलंबन को रद्द करते हुए उन्हें तुरंत अपने-अपने कार्यस्थल (अंचलों) पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है।
  • जिलाधिकारियों को निर्देश: राज्य के सभी जिलाधिकारियों (DM) को आदेश दिया गया है कि वे अपने स्तर पर इन अधिकारियों की सुचारू वापसी सुनिश्चित करें और उन्हें तुरंत जनगणना से जुड़े कार्यों में लगाएं।

स्वगणना (Self-Enumeration) पर जोर और अंचल अधिकारियों की भूमिका

​बिहार में जनगणना के पहले चरण के तहत स्वगणना (Self-Enumeration) की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। सरकार का मानना है कि इस डिजिटल प्रक्रिया की सफलता के लिए अंचल स्तर पर मजबूत प्रशासनिक नेतृत्व का होना अनिवार्य है। अंचल अधिकारियों और राजस्व पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे तुरंत अपना कार्यभार संभालें और जनता को पोर्टल के माध्यम से डेटा भरने के लिए प्रेरित करें।

​हड़ताली कर्मचारी संयुक्त मोर्चा के साथ हुई लंबी बातचीत और मुख्यमंत्री के दखल के बाद यह सुलह संभव हो पाई है। राजस्व पदाधिकारियों ने भी सरकार को आश्वस्त किया है कि वे अब दुगुनी ऊर्जा के साथ काम करेंगे ताकि जनगणना और भूमि सर्वेक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सके। सम्राट चौधरी का यह फैसला उन अधिकारियों के लिए एक ‘संजीवनी’ की तरह है, जिनका करियर निलंबन के कारण अधर में लटका हुआ था।

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