
भागलपुर। जिले के नाथनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत चौकी नियामतपुर से लापता हुए अधेड़ किशोर कुमार की रहस्यमयी गुमशुदगी का अंत एक बेहद दुखद और सनसनीखेज मोड़ पर हुआ है। बीते कुछ समय से लापता किशोर कुमार का शव मंगलवार को बरारी पुल घाट के समीप नदी किनारे से बरामद किया गया। इस घटना ने पूरे जिले में सनसनी फैला दी है और नाथनगर से लेकर बरारी तक पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। मृतक के परिजनों ने इस मामले को सीधा अपहरण और हत्या का रूप दिया है, जिसका मुख्य कारण करोड़ों की जमीन का विवाद बताया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डीएसपी-2 राकेश कुमार खुद जांच की कमान संभाल रहे हैं और देर रात तक पीड़ित परिवार से पूछताछ कर साक्ष्य जुटाने में लगे रहे। पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती उन चेहरों को बेनकाब करने की है, जिन्होंने एक विवाद को खूनी अंजाम तक पहुँचाया।
लापता होने से शव मिलने तक का घटनाक्रम
चौकी नियामतपुर के निवासी किशोर कुमार के जीवन की अंतिम घड़ी उस वक्त शुरू हुई जब वे रविवार की दोपहर करीब 3:30 बजे अपने घर से किसी काम के लिए निकले थे। परिजनों के अनुसार, वे अक्सर काम के सिलसिले में बाहर जाते थे, लेकिन उस दिन देर शाम तक जब उनका मोबाइल बंद आने लगा और वे घर नहीं लौटे, तो परिवार में घबराहट फैल गई। पत्नी निधि कुमारी ने काफी खोजबीन की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला, तो उन्होंने नाथनगर थाने में पति के अपहरण की आशंका जताते हुए लिखित शिकायत दर्ज कराई।
पुलिस अभी किशोर कुमार की तलाश में छापेमारी और तकनीकी सर्विलांस का सहारा ले ही रही थी कि मंगलवार को बरारी पुलिस को सूचना मिली कि पुल घाट के समीप नदी किनारे एक शव पड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही बरारी पुलिस मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लिया। शव की स्थिति को देखकर ही यह स्पष्ट हो गया था कि वारदात को अंजाम देने के बाद उसे छिपाने की नीयत से नदी किनारे फेंका गया था। शिनाख्त की प्रक्रिया शुरू हुई और जल्द ही यह पुष्टि हो गई कि यह शव चौकी नियामतपुर से लापता किशोर कुमार का ही है। शव मिलने की खबर जैसे ही घर पहुँची, वहां कोहराम मच गया।
जमीन विवाद और ‘बाउंस चेक’ की खूनी कहानी
इस पूरे हत्याकांड के केंद्र में एक जमीन का सौदा बताया जा रहा है। मृतक की पत्नी निधि कुमारी ने पुलिस को दिए अपने आवेदन और डीएसपी के समक्ष दिए गए बयान में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। निधि के अनुसार, किशोर कुमार का जमीन बिक्री को लेकर कहलगांव थाना क्षेत्र के पदमपुर वार्ड संख्या 02 निवासी कोला दास और शिवम कुमार गुप्ता के साथ एक एग्रीमेंट हुआ था। इस एग्रीमेंट के तहत जमीन के बदले भुगतान के रूप में कुछ चेक दिए गए थे।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब उन चेखों में से एक महत्वपूर्ण चेक बैंक में ‘बाउंस’ हो गया। चेक बाउंस होने के बाद किशोर कुमार ने संबंधित पक्षों से अपने पैसे की मांग की, जिसे लेकर दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट बढ़ गई। निधि कुमारी का आरोप है कि पिछले कुछ दिनों से कोला दास और शिवम कुमार गुप्ता द्वारा उनके पति को फोन पर लगातार धमकियां दी जा रही थीं। उन पर दबाव बनाया जा रहा था कि वे बिना भुगतान के ही जमीन की रजिस्ट्री कर दें या फिर गंभीर परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहें। परिजनों को पूरा यकीन है कि इसी रंजिश के तहत किशोर कुमार का पहले अपहरण किया गया और फिर उनकी बेरहमी से हत्या कर शव को बरारी में फेंक दिया गया।
डीएसपी राकेश कुमार की सक्रियता और पुलिसिया जांच
मामले की गंभीरता और जमीन माफियाओं के शामिल होने की आशंका को देखते हुए वरीय पुलिस अधिकारियों ने तुरंत कड़े निर्देश जारी किए। मंगलवार की रात करीब 9:30 बजे डीएसपी-2 राकेश कुमार स्वयं मृतक किशोर कुमार के घर पहुँचे। उन्होंने घंटों तक निधि कुमारी और परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ की। डीएसपी ने उन मोबाइल नंबर्स की भी जानकारी ली जिनसे धमकियां मिलने की बात कही जा रही है।
जांच के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य मिले हैं, जिनमें कॉल रिकॉर्डिंग्स और मैसेज शामिल हो सकते हैं। डीएसपी राकेश कुमार ने बताया कि पुलिस हर उस बिंदु की जांच कर रही है जो इस हत्या से जुड़ा हो सकता है। नाथनगर इंस्पेक्टर राजीव रंजन सिंह ने भी घटनास्थल और मृतक के घर के बीच की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया है। पुलिस अब उन लोगों के लोकेशन को ट्रैक कर रही है जिनका नाम शिकायत में दर्ज किया गया है। बरारी और नाथनगर पुलिस की संयुक्त टीमें अब कहलगांव के उन ठिकानों पर छापेमारी करने की तैयारी कर रही हैं जहाँ नामजद आरोपी छिपे हो सकते हैं।
इलाके में आक्रोश और सुरक्षा पर सवाल
किशोर कुमार की हत्या के बाद चौकी नियामतपुर और आसपास के इलाकों में लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि भागलपुर में जमीन विवाद अब मौत का पर्याय बनता जा रहा है। लोगों ने आरोप लगाया कि अगर पुलिस ने अपहरण की शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई की होती और धमकियों की सूचना को गंभीरता से लिया होता, तो शायद किशोर कुमार की जान बचाई जा सकती थी।
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मामले में किसी भी सफेदपोश या प्रभावशाली व्यक्ति को बख्शा न जाए। जमीन के इस खेल में और भी कई बड़े नाम शामिल हो सकते हैं, जिनका पर्दाफाश होना जरूरी है। फिलहाल, शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जिसकी रिपोर्ट से यह साफ होगा कि हत्या किस प्रकार की गई और क्या मौत से पहले उन्हें प्रताड़ित किया गया था।


