
पटना। बिहार की राजधानी पटना इस समय एक ऐसे ऐतिहासिक राजनीतिक बदलाव की दहलीज पर खड़ी है, जिसकी कल्पना कुछ समय पहले तक असंभव मानी जाती थी। राज्य की सत्ता का केंद्र अब पूरी तरह से बदलने जा रहा है। सोमवार, 13 अप्रैल 2026 की रात होते-होते राजनीतिक गलियारों में यह बात पूरी तरह साफ हो चुकी है कि अगले 24 से 48 घंटों में बिहार को एक नया नेतृत्व मिलने वाला है। पिछले दो दशकों से बिहार की धुरी रहे नीतीश कुमार के इस्तीफे की अटकलें अब महज अफवाह नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक हकीकत बनने की ओर बढ़ रही हैं। प्राप्त जानकारी और ताजा घटनाक्रम के अनुसार, मंगलवार 14 अप्रैल का दिन बिहार के इतिहास में एक बड़े उलटफेर के तौर पर दर्ज होगा। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के खेमे में जबरदस्त उत्साह है, क्योंकि आज़ादी के बाद पहली बार बिहार में भाजपा अपना मुख्यमंत्री बनाने के बेहद करीब है। इस दौड़ में सबसे सशक्त और एकमात्र दावेदार के रूप में उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का नाम सामने आ रहा है। पटना से लेकर खगड़िया तक समर्थक उनके ‘राजतिलक’ की कामना कर रहे हैं।
मंगलवार का ‘काउंटडाउन’: 11 बजे कैबिनेट और 3:30 बजे इस्तीफा
मंगलवार, 14 अप्रैल को सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया एक सुनियोजित समय-सारणी के तहत शुरू होगी। सूत्रों और प्राप्त सूचनाओं के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सुबह 11 बजे अपनी कैबिनेट की अंतिम बैठक बुलाई है। इस बैठक को केवल विदाई की औपचारिकता के तौर पर देखा जा रहा है, जहाँ वे अपने मंत्रियों के साथ आखिरी बार मेज साझा करेंगे। इसके बाद दोपहर का समय बैठकों और रणनीतियों के नाम रहेगा।
सबसे बड़ा क्षण दोपहर 3:30 बजे आने की संभावना है, जब नीतीश कुमार राजभवन जाकर राज्यपाल को अपना इस्तीफा (Resignation) सौंप सकते हैं। इस इस्तीफे के साथ ही बिहार में ‘नीतीश युग’ के एक बड़े अध्याय का समापन होगा और एनडीए (NDA) के नए नेतृत्व का रास्ता साफ हो जाएगा। राजभवन के भीतर भी हलचल बढ़ गई है और अधिकारियों को अलर्ट पर रखा गया है। यह इस्तीफा बिहार में सत्ता के नए संतुलन की पहली आधिकारिक सीढ़ी होगी।
भाजपा और एनडीए की अहम बैठकें: शिवराज सिंह चौहान होंगे ‘किंगमेकर’
मंगलवार की दोपहर पटना के राजनीतिक तापमान को अपने चरम पर ले जाएगी। दोपहर 3 बजे भाजपा विधायक दल की बैठक पार्टी कार्यालय में आयोजित की गई है। इस बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इसमें केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हो रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान का पटना आना यह स्पष्ट संकेत है कि दिल्ली के शीर्ष नेतृत्व ने नाम तय कर लिया है और अब केवल पटना में उसकी आधिकारिक घोषणा बाकी है।
ठीक एक घंटे बाद, यानी शाम 4 बजे विधानसभा के सेंट्रल हॉल में एनडीए विधायक दल की महाबैठक होगी। इस बैठक में एनडीए के सभी घटक दलों के विधायक मौजूद रहेंगे। इसी बैठक में एनडीए का नया नेता चुना जाएगा। संभावना जताई जा रही है कि शिवराज सिंह चौहान ही नए मुख्यमंत्री के नाम का आधिकारिक ऐलान करेंगे। भाजपा विधायक दल के नेता को ही एनडीए का नेता चुना जाना तय है, जिससे सरकार गठन की अगली प्रक्रिया शुरू होगी।
प्रशासनिक संकेत: राज्यपाल के सचिव का सम्राट चौधरी के घर पहुँचना
राजनीति में मुलाकातें कभी बिना किसी ठोस कारण के नहीं होतीं। सोमवार को पटना की सड़कों पर उस समय हलचल मच गई जब राज्यपाल के सचिव गोपाल मीणा अचानक उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के आवास पर पहुँचे। दोनों के बीच लगभग 30 मिनट तक एकांत में बातचीत हुई। इस मुलाकात को सत्ता परिवर्तन की दिशा में सबसे बड़ा और पुख्ता संकेत माना जा रहा है।
प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि राज्यपाल के सचिव का संभावित मुख्यमंत्री के आवास पर जाना शपथ ग्रहण समारोह और सरकार गठन की प्रारंभिक तैयारियों का हिस्सा हो सकता है। यह मुलाकात उस समय हुई है जब सम्राट चौधरी के नाम पर मुहर लगने की संभावनाएं 99 प्रतिशत तक पहुँच चुकी हैं। इस बैठक के बाद सम्राट चौधरी के आवास पर समर्थकों और नेताओं की आवाजाही और अधिक बढ़ गई है।
धार्मिक अनुष्ठान और समर्थकों का उत्साह: पटना से खगड़िया तक हवन
सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग अब केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और धार्मिक भी हो गई है। उनके समर्थकों ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में जीत के लिए पूजा-अर्चना शुरू कर दी है। पटना के प्रसिद्ध शीतला मंदिर में सोमवार को सम्राट चौधरी के समर्थन में विशेष हवन का आयोजन किया गया। समर्थकों का मानना है कि उनकी तपस्या और मेहनत का फल अब उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में मिलने वाला है।
इधर, सम्राट चौधरी के पैतृक जिले खगड़िया में भी उत्साह चरम पर है। वहां के ऐतिहासिक काली मंदिर में महायज्ञ का आयोजन किया गया है। खगड़िया की सड़कों पर उनके पोस्टर लग चुके हैं और लोग एक-दूसरे को अग्रिम बधाई दे रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि बिहार को अब एक आक्रामक और युवा नेतृत्व की जरूरत है, जो सम्राट चौधरी के रूप में मिलने जा रहा है। राज्य के अन्य इलाकों से भी धार्मिक अनुष्ठानों की खबरें आ रही हैं, जो यह बताती हैं कि भाजपा कार्यकर्ताओं में इस ताजपोशी को लेकर कितनी गहरी आकांक्षा है।
नई सरकार का ढांचा: क्या होगा बदलाव का स्वरूप?
सत्ता परिवर्तन की चर्चा केवल मुख्यमंत्री पद तक सीमित नहीं है। नई सरकार के पूरे ढांचे को लेकर भाजपा और जदयू के बीच सहमति लगभग बन चुकी है। सूत्रों का कहना है कि इस बार भाजपा केवल मुख्यमंत्री पद ही नहीं, बल्कि गृह और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विभागों पर भी अपना नियंत्रण चाहती है। जदयू की भूमिका अब ‘जूनियर पार्टनर’ के रूप में होगी, जहाँ उनके मंत्रियों की संख्या कम हो सकती है।
नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद जदयू विधायक दल का नेता किसे चुना जाता है, यह भी एक बड़ा सवाल है। चर्चा है कि नीतीश कुमार के करीबी मंत्रियों में से ही किसी को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है ताकि पार्टी के भीतर समन्वय बना रहे। दूसरी ओर, भाजपा इस बार सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए दो या तीन उपमुख्यमंत्री भी बना सकती है।
बिहार की जनता इस समय एक मिश्रित कौतूहल और उम्मीद के बीच खड़ी है। मंगलवार की शाम 4 बजे जब सेंट्रल हॉल से नए नेता का नाम गूँजेगा, तो वह बिहार के लिए एक नई सुबह की शुरुआत होगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की रणनीति ने बिहार में भाजपा को उस मुकाम पर पहुँचा दिया है, जहाँ वह अब खुद के दम पर नेतृत्व करने जा रही है। मंगलवार के पूरे घटनाक्रम पर The Voice of Bihar की नजर बनी रहेगी। कल का दिन केवल सरकार बदलने का नहीं, बल्कि बिहार के राजनीतिक भविष्य की नई लकीर खींचने का दिन है।


