बिहार में अब दिन में सस्ती और शाम में महंगी बिजली: टीओडी टैरिफ से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ नहीं, बल्कि होगी ₹90 तक की बचत

  • ​बिहार की बिजली कंपनी ने “टाइम ऑफ डे” (ToD) टैरिफ को उपभोक्ता हित में बताते हुए इसके फायदों को सार्वजनिक किया है।
  • ​नई व्यवस्था के तहत यदि उपभोक्ता अपनी बिजली खपत का कुछ हिस्सा शाम के व्यस्त समय (पीक ऑवर्स) से हटाकर दिन के समय कर देते हैं, तो वे हर महीने लगभग ₹90 की बचत कर सकते हैं।
  • ​देश के 22 राज्यों में यह व्यवस्था पहले से लागू है और बिहार में इसे केंद्रीय विद्युत मंत्रालय के उपभोक्ता अधिकार (संशोधन) नियम, 2023 के तहत अनिवार्य किया गया है।
  • सरकार बिजली की दरों को नियंत्रित रखने के लिए भारी अनुदान दे रही है, जिसे वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹23,165 करोड़ प्रस्तावित किया गया है।
  • ​स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ता और 10 केवी से अधिक की मांग वाले वाणिज्यिक व औद्योगिक संस्थानों के लिए यह नियम 1 अप्रैल 2026 तक या उससे पहले अनिवार्य कर दिया गया है।

पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।

बिजली खपत के समय में बदलाव कर बिल कम करने का नया फॉर्मूला

बिहार में बिजली उपभोक्ताओं के लिए अब अपने मासिक बजट को नियंत्रित करने का एक नया और प्रभावी तरीका सामने आया है। राज्य की बिजली कंपनियों ने स्पष्ट किया है कि “टाइम ऑफ डे” (ToD) टैरिफ व्यवस्था से घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि यह बचत का एक सुनहरा अवसर है। इस व्यवस्था का मूल मंत्र यह है कि बिजली तब खर्च करें जब वह सस्ती हो और तब कम उपयोग करें जब उसकी मांग और कीमत दोनों अधिक हों। कंपनी का दावा है कि उपभोक्ताओं को नियमानुसार बिजली मिलेगी और यदि वे अपने दैनिक कार्यों का थोड़ा सा हिस्सा पीक समय से हटाकर ऑफ-पीक समय में ले जाते हैं, तो उनके बिजली बिल में उल्लेखनीय गिरावट आएगी। यह बदलाव बिना कुल खपत को घटाए, केवल उपयोग के समय में मामूली फेरबदल करके संभव है।

पीक और ऑफ-पीक अवधि का गणित: कब सस्ती और कब महंगी होगी बिजली

नई टैरिफ व्यवस्था के तहत पूरे 24 घंटे को तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है ताकि मांग और आपूर्ति के संतुलन को बेहतर बनाया जा सके। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि को “ऑफ-पीक” माना गया है, जिसमें बिजली की दरें सबसे सस्ती होंगी। इसके विपरीत, शाम 5 बजे से रात 11 बजे तक का समय “पीक अवधि” है, जहां बिजली की मांग सबसे अधिक होती है, इसलिए इस दौरान दरें भी अधिक रहेंगी। रात 11 बजे से सुबह 9 बजे तक की शेष अवधि के लिए सामान्य दरें लागू रहेंगी। इस व्यवस्था का लाभ यह है कि जो काम दिन के समय किए जा सकते हैं, जैसे कपड़े धोना, पानी की मोटर चलाना या अन्य भारी उपकरणों का उपयोग, उन्हें ऑफ-पीक समय में शिफ्ट करके उपभोक्ता सीधे तौर पर अपनी लागत कम कर सकते हैं।

मात्र 2 यूनिट के हेरफेर से महीने भर में बचेंगे ₹90

कंपनी ने उपभोक्ताओं को समझाने के लिए एक व्यावहारिक उदाहरण भी पेश किया है। यदि एक शहरी घरेलू उपभोक्ता प्रतिदिन मात्र 2 यूनिट बिजली का उपयोग शाम की पीक अवधि (5 PM – 11 PM) से हटाकर दिन की ऑफ-पीक अवधि (9 AM – 5 PM) में करने लगे, तो उसे प्रतिदिन ₹2.96 की बचत होगी। यह छोटी सी बचत महीने के अंत में लगभग ₹89.00 से ₹90.00 बन जाती है। गणना के अनुसार, रोजाना 10 घंटे की खपत पर सामान्य दर लागू होगी, जबकि 8 घंटे की ऑफ-पीक खपत पर सामान्य दर का केवल 80 फीसदी ही भुगतान करना होगा। वहीं, मात्र 6 घंटे की पीक अवधि में खपत करने पर सामान्य दर से मात्र 10 फीसदी अधिक का भुगतान करना होगा। यह पारदर्शी व्यवस्था उपभोक्ताओं को अपनी बिजली खपत के प्रबंधन का पूरा नियंत्रण प्रदान करती है।

वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए 1 अप्रैल से अनिवार्यता

बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने इस नई व्यवस्था को कुछ श्रेणियों के लिए अनिवार्य कर दिया है। 1 अप्रैल 2026 तक या उससे पहले उन सभी वाणिज्यिक और औद्योगिक उपभोक्ताओं के लिए टीओडी टैरिफ लागू हो जाएगा जिनकी अनुबंधित बिजली मांग 10 केवी से अधिक है। इसके अलावा, राज्य भर में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ताओं को भी इसी नियमानुसार बिजली मिलेगी। हालांकि, कृषि क्षेत्र को फिलहाल इस व्यवस्था से बाहर रखा गया है ताकि किसानों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े। स्मार्ट मीटर वाले उपभोक्ता अपने मोबाइल ऐप के जरिए “पीक” और “ऑफ-पीक” समय की मांग को ट्रैक कर सकते हैं और उसके अनुसार अपने उपकरणों के उपयोग को बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सकते हैं।

सरकार की सब्सिडी और मुफ्त बिजली की सुविधा का सुरक्षा कवच

टीओडी टैरिफ लागू होने के बीच राज्य सरकार ने यह भी आश्वस्त किया है कि वह उपभोक्ताओं को सस्ती बिजली देने के लिए अपने अनुदान में निरंतर वृद्धि कर रही है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में सरकार ने ₹13,114 करोड़ का अनुदान दिया था, जो 2024-25 में बढ़कर ₹15,343 करोड़ हो गया। वर्तमान वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए यह राशि ₹19,792 करोड़ है और अगले वर्ष 2026-27 के लिए इसे बढ़ाकर ₹23,165 करोड़ करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही, राज्य में 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने की योजना पहले की तरह ही प्रभावी रहेगी। कंपनी के अनुसार, इस मुफ्त सुविधा के कारण बिहार के लगभग 90 फीसदी घरेलू उपभोक्ताओं का मासिक बिजली बिल पहले से ही शून्य होता है, इसलिए टीओडी टैरिफ से उन पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा।

ग्रिड प्रबंधन और राष्ट्रीय टैरिफ नीति का हिस्सा है यह बदलाव

यह बदलाव केवल बिहार तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यापक राष्ट्रीय नीति का हिस्सा है। कंपनी ने सोमवार को जानकारी दी कि टीओडी टैरिफ वर्तमान में देश के 22 राज्यों में पहले से ही सफलतापूर्वक लागू है। बिहार में इसे राष्ट्रीय टैरिफ नीति 2016 के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अपनाया गया है। इस व्यवस्था का एक बड़ा उद्देश्य बिजली ग्रिड पर पड़ने वाले अचानक दबाव को कम करना है। जब सभी उपभोक्ता एक ही समय में (शाम के समय) बिजली का उपयोग करते हैं, तो ग्रिड पर भार बढ़ जाता है। टीओडी के माध्यम से मांग को पूरे दिन में समान रूप से वितरित करने का प्रयास किया जाता है, जिससे बिजली कटौती की संभावना कम होती है और ऊर्जा की बर्बादी को रोका जा सकता है।

स्मार्ट मीटरिंग और भविष्य की ऊर्जा बचत

जैसे-जैसे बिहार में स्मार्ट मीटर का दायरा बढ़ रहा है, टीओडी टैरिफ का महत्व और भी अधिक होता जा रहा है। स्मार्ट मीटर वास्तविक समय में खपत के आंकड़ों को रिकॉर्ड करते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को यह पता चलता है कि वे किस समय कितनी बिजली खर्च कर रहे हैं। कंपनी का मानना है कि इस डिजिटल पारदर्शिता और नई टैरिफ नीति के मेल से न केवल बिजली चोरी पर लगाम लगेगी, बल्कि लोग ऊर्जा संरक्षण के प्रति भी अधिक जागरूक होंगे। 10 केवी से अधिक मांग वाले संस्थानों के लिए समय रहते इस प्रणाली को अपनाना भविष्य की लागतों को कम करने के लिए एक बुद्धिमानी भरा कदम होगा। अंततः, यह व्यवस्था उपभोक्ताओं को केवल “उपयोगकर्ता” से बदलकर “प्रबंधक” बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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