
पटना। बिहार में नई सरकार के गठन के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस का रुख काफी सख्त नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में बनी सरकार के शुरुआती दिनों में ही अपराधियों के खिलाफ तेज कार्रवाई देखने को मिली है। हाल के घटनाक्रमों से यह संकेत साफ मिलता है कि पुलिस अब अपराध पर “जीरो टॉलरेंस” नीति के साथ आगे बढ़ रही है।
सबसे ताजा मामला जिले से सामने आया, जहां पुलिस ने कुख्यात अपराधी सोनू यादव को मुठभेड़ में ढेर कर दिया। इस कार्रवाई को राज्य में बदलते पुलिस तेवर के तौर पर देखा जा रहा है।
18 दिन में 4 एनकाउंटर, सख्त संदेश
15 अप्रैल को शपथ ग्रहण के बाद से लेकर अब तक महज 18 दिनों में बिहार पुलिस ने चार एनकाउंटर किए हैं। इनमें दो “फुल एनकाउंटर” और दो “हाफ एनकाउंटर” शामिल हैं।
यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि पुलिस अब अपराधियों के खिलाफ तेजी से और आक्रामक तरीके से कार्रवाई कर रही है।
इसके अलावा पिछले छह महीनों में राज्यभर में कुल 18 एनकाउंटर दर्ज किए गए हैं, जो अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस की रणनीति को दर्शाता है।
सिवान एनकाउंटर: मुख्य आरोपी ढेर
रविवार तड़के करीब 4 बजे जामो थाना क्षेत्र के लद्दी गांव में वाहन जांच के दौरान पुलिस को बड़ी सफलता मिली।
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान संदिग्ध गतिविधि के आधार पर सोनू यादव को घेरने की कोशिश की गई। खुद को घिरता देख उसने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी।
जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी गोली चलाई, जिसमें सोनू यादव मौके पर ही मारा गया।
सोनू यादव भाजपा के पूर्व विधान पार्षद के भांजे की हत्या का मुख्य आरोपी था। उस पर 25 हजार रुपये का इनाम भी घोषित था।
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, उसके खिलाफ हत्या, लूट और अन्य गंभीर मामलों में कई केस दर्ज थे। मौके से हथियार भी बरामद किए गए हैं।
हर्ष हत्याकांड से जुड़ा था मामला
यह एनकाउंटर हाल ही में हुए चर्चित हर्ष हत्याकांड से जुड़ा है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी थी।
इस मामले में पहले भी पुलिस ने छोटू यादव नामक अपराधी को “हाफ एनकाउंटर” में गिरफ्तार किया था, जिसमें उसके दोनों पैरों में गोली लगी थी।
इसके बाद मुख्य आरोपी सोनू यादव को भी मुठभेड़ में ढेर कर दिया गया।
लगातार एक्शन में पुलिस
अगर पिछले कुछ दिनों की घटनाओं पर नजर डालें, तो पुलिस की सक्रियता साफ दिखाई देती है:
- 22 अप्रैल: पटना में ज्वेलरी शॉप लूटकांड के आरोपी को पैर में गोली मारकर गिरफ्तार किया गया।
- 29 अप्रैल: में नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी की हत्या के आरोपी रामधनी सिंह यादव को एनकाउंटर में मारा गया।
- 30 अप्रैल: सिवान हर्ष हत्याकांड में एक आरोपी को हाफ एनकाउंटर में पकड़ा गया।
- 3 मई: मुख्य आरोपी सोनू यादव को मुठभेड़ में ढेर किया गया।
इन घटनाओं से स्पष्ट है कि पुलिस अब लगातार सक्रिय कार्रवाई कर रही है और अपराधियों को तेजी से पकड़ने या निष्क्रिय करने की रणनीति पर काम कर रही है।
बदलती रणनीति या दबाव का असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव दो कारणों से हो सकता है—
एक, नई सरकार की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था को मजबूत करना है।
दूसरा, हाल के बड़े अपराधों के बाद पुलिस पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा है।
इसलिए पुलिस अब तेजी से रिस्पॉन्स दे रही है और अपराधियों के खिलाफ सख्त कदम उठा रही है।
जीरो टॉलरेंस की नीति
राज्य सरकार की ओर से स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि अपराध के खिलाफ किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
पुलिस अधिकारियों को भी निर्देश दिया गया है कि वे संगठित अपराध, हत्या और लूट जैसे मामलों में तेजी से कार्रवाई करें।
इस नीति का असर अब जमीनी स्तर पर दिखाई देने लगा है, जहां अपराधियों के खिलाफ तुरंत और निर्णायक कार्रवाई हो रही है।
बढ़ती बहस भी
हालांकि, लगातार हो रहे एनकाउंटर को लेकर बहस भी तेज हो सकती है।
कुछ लोग इसे कानून-व्यवस्था सुधारने का सख्त कदम मान रहे हैं, तो वहीं कुछ इसे मानवाधिकार और न्यायिक प्रक्रिया के नजरिए से भी देख रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अपराध नियंत्रण जरूरी है, लेकिन हर कार्रवाई कानून के दायरे में और पारदर्शिता के साथ होनी चाहिए।
आम लोगों में बढ़ा भरोसा
इन कार्रवाइयों का एक सकारात्मक असर यह भी देखा जा रहा है कि आम लोगों में पुलिस के प्रति भरोसा बढ़ा है।
लोगों का मानना है कि अगर इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रही, तो अपराधियों के मन में डर पैदा होगा और कानून-व्यवस्था मजबूत होगी।
बिहार में नई सरकार के गठन के बाद पुलिस का बदला हुआ तेवर साफ दिखाई दे रहा है।
सिवान एनकाउंटर समेत हालिया घटनाएं यह संकेत देती हैं कि राज्य में अपराध के खिलाफ सख्त नीति लागू की जा रही है।
हालांकि, इस सख्ती के साथ पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होगा।
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह अभियान लंबे समय तक जारी रहता है और राज्य में अपराध दर पर इसका क्या असर पड़ता है।


