​पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान सपरिवार पहुंचे पटना साहिब, हरिमंदिर जी में मत्था टेककर लिया आशीर्वाद

पटना, 18 मई 2026। सिखों के दसवें गुरु, दशमेश पिता गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज की पावन जन्मस्थली और सिख पंथ के दूसरे सबसे बड़े तख्त हरिमंदिर जी पटना साहिब की आध्यात्मिक धरती पर सोमवार को एक बेहद महत्वपूर्ण धार्मिक और सांस्कृतिक जुटान दर्ज की गई। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान अपने परिजनों और पारिवारिक सदस्यों के साथ एक विशेष धार्मिक यात्रा के तहत राजधानी पटना पहुंचे। इस यात्रा का मुख्य ध्येय गुरु महाराज के ऐतिहासिक अवतरण स्थल पर हाजिरी लगाना, दरबार साहिब के समक्ष शीश नवाना और गुरुघर का विशेष आशीर्वाद प्राप्त करना था।

​मुख्यमंत्री भगवंत मान की इस उच्चस्तरीय धार्मिक यात्रा को लेकर पटना जिला प्रशासन, रेलवे सुरक्षा बल और पटना साहिब प्रबंधन कमेटी की ओर से सुरक्षा और स्वागत प्रणालियों के पुख्ता विन्यास तैयार किए गए थे। पंजाब के मुख्यमंत्री के इस आगमन ने एक बार फिर पंजाब और बिहार के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों की कड़ियों को नई मजबूती प्रदान की है।

पटना हवाई अड्डे पर सांगठनिक कड़ियों के बीच हुई भव्य अगवानी

​सोमवार की सुबह पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान का विशेष विमान जैसे ही पटना के जयप्रकाश नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के रनवे पर उतरा, वैसे ही वहां पहले से कड़ाई के साथ मुस्तैद प्रशासनिक अमले और सिख समुदाय के प्रबुद्ध प्रतिनिधियों के बीच भारी उत्साह देखा गया। हवाई अड्डे के विशेष लाउंज में तख्त हरिमंदिर जी पटना साहिब प्रबंधन कमेटी के शीर्ष नीति-नियंताओं और पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री की अगवानी की।

​अगवानी करने वाले मुख्य विभावों में प्रबंधन कमेटी के प्रधान जगजोत सिंह सोही, महासचिव इंद्रजीत सिंह, कनीय उपाध्यक्ष गुरविंदर सिंह और मुख्य प्रवक्ता सुदीप सिंह शामिल थे। इन सभी वरिष्ठ पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री भगवंत मान को फूलों का गुलदस्ता, पारंपरिक शॉल और बुके भेंट कर मगध की इस ऐतिहासिक धरती पर उनका आत्मीय स्वागत किया। हवाई अड्डे पर संक्षिप्त विधिक औपचारिकताओं और सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री का विशेष काफिला कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पटना सिटी स्थित तख्त साहिब परिसर की ओर अग्रसारित हुआ।

तख्त हरिमंदिर जी के मुख्य दरबार में मत्था टेककर सुनी शबद-कीर्तन की दिव्य ध्वनि

​पटना सिटी स्थित ऐतिहासिक तख्त हरिमंदिर जी परिसर पहुंचने पर मुख्यमंत्री भगवंत मान और उनके परिजनों का स्वागत पारंपरिक वाद्य यंत्रों और धार्मिक जयकारों के साथ किया गया। इसके उपरांत, मुख्यमंत्री पूरे विनीत भाव से मुख्य गुरुद्वारा परिसर के भीतर प्रविष्ट हुए और सिखों के अत्यंत पूजनीय दूसरे तख्त के मुख्य दरबार साहिब के समक्ष पहुंचे। उन्होंने गुरु ग्रंथ साहिब के सामने पूरी कड़ाई और श्रद्धा के साथ साष्टांग दंडवत कर मत्था टेका और देश की एकता, अखंडता तथा सामाजिक समरसता के लिए प्रार्थना की।

​मुख्यमंत्री ने अपने व्यस्त राजनीतिक विन्यासों से अलग हटकर अपनी पत्नी और माता जी सहित परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दरबार साहिब के दीवान हॉल में जमीन पर बैठकर काफी समय व्यतीत किया। इस दौरान उन्होंने रागी जत्थों द्वारा गाए जा रहे गुरुबाणी के पवित्र शबद-कीर्तन को अत्यंत एकाग्रता और शांत चित्त से सुना। शबद-कीर्तन की इस दिव्य और आध्यात्मिक ध्वनि ने वहां उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पावन परिसर के भीतर कदम रखते ही जो असीम मानसिक शांति और रूहानी ऊर्जा की अनुभूति होती है, वह शब्दों के विलेखों में बयान करना असंभव है।

जत्थेदार ज्ञानी बलदेव सिंह ने सिरोपा भेंट कर किया सम्मानित, दुर्लभ शस्त्रों के हुए दर्शन

​धार्मिक अनुष्ठानों की अगली कड़ियों के तहत तख्त हरिमंदिर जी पटना साहिब के मुख्य जत्थेदार ज्ञानी बलदेव सिंह ने गुरुघर की स्थापित मर्यादाओं और विधियों के अनुसार मुख्यमंत्री भगवंत मान को अंगवस्त्र के रूप में पवित्र ‘सिरोपा’ भेंट किया। जत्थेदार ने गुरु महाराज की विशेष कृपा का विलेख पढ़ते हुए मुख्यमंत्री के सिर पर हाथ रखकर उनके सुखद और सफल जीवन की कामना की।

​इसके उपरांत, मुख्यमंत्री और उनके परिवार को तख्त साहिब के तोशखाने में सुरक्षित रखे गए गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज के बचपन और उनके जीवन काल से जुड़े अत्यंत दुर्लभ, ऐतिहासिक और पवित्र शस्त्रों व विलेखों के विशेष भौतिक दर्शन कराए गए। इन पवित्र वस्तुओं में गुरु महाराज का छोटा धनुष, तीर, उनकी पावन खड़ाऊं और कतिपय हस्तलिखित विलेख शामिल हैं। इन ऐतिहासिक धरोहरों को देखकर मुख्यमंत्री भावुक नजर आए और उन्होंने इसे मानव इतिहास का सबसे गौरवशाली अध्याय बताया।

प्रबंधन कमेटी द्वारा प्रतीक चिन्ह और पवित्र साहिब का हस्तगत विलेख

​इस विशिष्ट धार्मिक यात्रा के समापन के अवसर पर तख्त हरिमंदिर जी पटना साहिब की मुख्य प्रबंधन कमेटी के कार्यालय कक्ष में एक विशेष विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कमेटी के प्रधान जगजोत सिंह सोही और महासचिव इंद्रजीत सिंह ने संयुक्त रूप से मुख्यमंत्री भगवंत मान को तख्त साहिब की भव्य कलाकृति वाला एक सुंदर सुनहरी प्रतीक चिन्ह (मोमेंटो) भेंट किया। इसके साथ ही, सिख मर्यादा के सर्वोच्च प्रतीक के रूप में उन्हें एक पवित्र ‘साहिब’ (कृपाण) भी आधिकारिक रूप से हस्तगत कराई गई।

​मुख्यमंत्री ने इस सम्मान को सहर्ष और अत्यंत आदर के साथ स्वीकार करते हुए कहा कि यह कृपाण उनके लिए न्याय और जन-सेवा के पथ पर बिना डरे चलने का एक शाश्वत संबल साबित होगी। इस दौरान कमेटी के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री से पटना साहिब प्रक्षेत्र के विकास, तीर्थयात्रियों की सुविधाओं के विस्तार और पंजाब से आने वाले जत्थों के लिए परिवहन प्रणालियों को और अधिक सुलभ बनाने के कतिपय प्रशासनिक बिंदुओं पर भी विचार-विमर्श किया।

देश-दुनिया में सुख, शांति और समृद्धि की कामना: मुख्यमंत्री का संदेश

​गुरुघर का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त करने के बाद परिसर के बाहर पत्रकारों और मीडिया विभावों से औपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान ने अपनी इस यात्रा के आध्यात्मिक और सामाजिक निहितार्थों को विस्तार से साझा किया। उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी महाराज ने अपने पूरे जीवन काल में अत्याचार के खिलाफ लड़ने, धर्म की रक्षा करने और संपूर्ण मानवता को समानता का संदेश देने की जो अद्भुत विधा स्थापित की थी, वह आज के आधुनिक युग में भी प्रासंगिक है।

​मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उन्होंने गुरु महाराज के चरणों में किसी राजनीतिक आकांक्षा के तहत नहीं, बल्कि एक साधारण सेवक के रूप में शीश नवाया है। उन्होंने अरदास के दौरान देश के समस्त नागरिकों, विशेष रूप से पंजाब और बिहार के किसानों, नौजवानों और मेहनतकश अवाम के जीवन में सुख, शांति, आपसी भाईचारे और आर्थिक समृद्धि की मंगल कामना की है। उन्होंने पटना साहिब प्रबंधन कमेटी द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रबंधों और बिहार की जनता द्वारा मिले अपार स्नेह के प्रति अपना गहरा आभार प्रकट किया। इस सफल और गरिमापूर्ण यात्रा के बाद मुख्यमंत्री का काफिला वापस हवाई अड्डे की ओर रवाना हो गया।

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