​भागलपुर में शादी के दो महीने बाद ही नवविवाहित युवक ने लगाई फांसी, सुल्तानगंज के शिवनंदनपुर गांव में मचा कोहराम

भागलपुर/सुल्तानगंज, 18 मई 2026। बिहार के भागलपुर जिले के अंतर्गत आने वाले सुल्तानगंज थाना क्षेत्र में सोमवार को एक अत्यंत हृदयविदारक और मर्मस्पर्शी घटना प्रकाश में आई है। क्षेत्र के शिवनंदनपुर गांव में एक 26 वर्षीय नवविवाहित युवक ने अपने ही घर के बंद कमरे के भीतर फंदे से लटककर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस अचानक घटित हुई त्रासदी के बाद से संपूर्ण ग्रामीण प्रक्षेत्र में गहरा सन्नाटा पसरा हुआ है और मृतक के परिजनों के बीच कोहराम मचा हुआ है।

​मृतक की पहचान शिवनंदनपुर निवासी 26 वर्षीय रौशन कुमार के रूप में स्थापित की गई है। हृदयविदारक पहलू यह है कि रौशन कुमार का विवाह इसी चालू वर्ष में बीते 14 मार्च 2026 को पड़ोसी जिले बांका के अमरपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत आने वाले जानकीपुर गांव की निवासी साक्षी कुमारी के साथ अत्यंत धूमधाम और सामाजिक विधा के साथ संपन्न हुआ था। दांपत्य जीवन की शुरुआत के महज दो महीने के भीतर ही इस प्रकार के खौफनाक आत्मघाती कदम ने पूरे समाज को झकझोर कर रख दिया है।

वट सावित्री पूजा की खुशियों के बीच अचानक पसरा मातम

​पारिवारिक सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से प्राप्त कड़ियों के अनुसार, विवाह के बाद से ही घर के भीतर का माहौल पूरी तरह से शांतिपूर्ण और खुशनुमा बना हुआ था। नवविवाहित पति-पत्नी के बीच किसी भी प्रकार के प्रत्यक्ष वैचारिक मतभेद या घरेलू कलह की कोई सुगबुगाहट कभी नहीं देखी गई थी। अभी हाल ही में बीते दिनों संपन्न हुई लोक आस्था और सुहाग की लंबी उम्र से जुड़ी वट सावित्री पूजा को भी इस नवविवाहित जोड़े ने आपसी समन्वय और बड़े ही उत्साह के साथ मिलकर मनाया था।

​पत्नी साक्षी कुमारी ने अपने पति रौशन की लंबी आयु और सुखद भविष्य की कामना के लिए निर्जला व्रत रखकर वट वृक्ष की परिक्रमा की थी। ऐसे में इस धार्मिक अनुष्ठान और उत्सव के ठीक बाद अचानक रविवार की रात को रौशन द्वारा उठाए गए इस अप्रत्याशित और जानलेवा कदम से न केवल ससुराल पक्ष बल्कि मायके के लोग भी पूरी तरह स्तब्ध और अवाक हैं। किसी को भी इस बात का तार्किक अंदाजा नहीं मिल पा रहा है कि जो युवक कुछ दिनों पूर्व तक सामान्य रूप से हंस-बोल रहा था, वह अचानक इस कदर मानसिक अवसाद की विधा में कैसे चला गया।

रविवार की रात भोजन परोसने के बाद बंद किवाड़ से उपजा संशय

​घटनाक्रम की कड़ियों को सिलसिलेवार ढंग से बयां करते हुए रोती-बिलखती पत्नी साक्षी कुमारी ने पुलिस के अनुसंधान अधिकारियों को बताया कि रविवार की रात लगभग 9.30 से 10 बजे के बीच सब कुछ सामान्य चल रहा था। साक्षी ने अपने पति रौशन कुमार को रात का भोजन तैयार कर कमरे के भीतर परोसा था। इसके उपरांत, वह अपने वृद्ध ससुर को रात्रि का भोजन हस्तगत कराने के उद्देश्य से घर के दूसरे हिस्से में बने आंगन की तरफ चली गई।

​जब वह ससुर को भोजन कराने के बाद वापस अपने शयनकक्ष की ओर लौटी, तो उसने देखा कि कमरे का मुख्य दरवाजा (किवाड़) अंदर से पूरी कड़ाई के साथ बंद था। साक्षी को लगा कि शायद रौशन भोजन करने के बाद आराम करने के मूड में होंगे, इसलिए उसने सामान्य रूप से किवाड़ को थपथपाया और अपने पति को आवाज लगानी शुरू की।

​काफी देर तक लगातार किवाड़ पीटने और बार-बार रौशन का नाम पुकारने के बावजूद जब कमरे के भीतर से किसी भी प्रकार की शारीरिक हलचल या प्रतिक्रिया सामने नहीं आई, तो साक्षी का माथा ठनका और उसके भीतर किसी अनहोनी का संशय गहरा गया। उसने तुरंत शोर मचाकर घर के अन्य सदस्यों और भाइयों को मौके पर इकट्ठा किया।

​परिजनों ने कमरे के पिछले हिस्से में बने दूसरे छोटे कमरे और वेंटिलेशन (झरोखे) के रास्ते जब टॉर्च की रोशनी से भीतर झांककर देखने का प्रयास किया, तो अंदर का खौफनाक दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। कमरे के भीतर रौशन कुमार बेड के ठीक ऊपर लगे लोहे के पंखे की कड़ी से अपनी पत्नी के सूती दुपट्टे के सहारे फंदे पर अटका हुआ था। यह देखते ही पूरे घर के भीतर चीख-पुकार और करुण विलाप का माहौल कायम हो गया।

परिजनों ने किवाड़ तोड़कर फंदे से उतारा, अस्पताल में डॉक्टरों ने तोड़ा ढांचा

​कमरे के भीतर रौशन को फंदे पर लटकता देख भाइयों और पड़ोसियों ने बिना कोई समय गंवाए कड़ा बल प्रयोग करते हुए कमरे के मजबूत लकड़ी के किवाड़ को बीच से तोड़ दिया। परिजन तुरंत कमरे के भीतर दाखिल हुए और फंदे की गांठ को काटकर रौशन के शरीर को नीचे उतारा। परिजनों का दावा है कि जब रौशन को फंदे से नीचे लाया गया था, तब उसकी शारीरिक धड़कनें और सांसें अत्यंत धीमी गति से लेकिन चल रही थीं।

​जीवन की अंतिम उम्मीद को बचाए रखने के लिए परिजन बिना किसी विधिक औपचारिकता या एम्बुलेंस का इंतजार किए, रौशन को अपनी गोदी में उठाकर तुरंत मोटरसाइकिल के माध्यम से भागलपुर शहर स्थित जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (JLNMCH) मायागंज के आपातकालीन वार्ड की तरफ भागे।

​अस्पताल के मुहाने पर तैनात डॉक्टरों की टीम ने तुरंत कैजुअल्टी वार्ड में रोशन को स्ट्रेचर पर लिया और उसकी पल्स व ईसीजी (ECG) प्रणालियों की तकनीकी जांच की। हालांकि, किस्मत को कुछ और ही मंजूर था; डॉक्टरों ने गहन चिकित्सकीय परीक्षण के उपरांत रौशन कुमार को आधिकारिक रूप से ‘ब्रॉट डेड’ यानी अस्पताल पहुंचने से पूर्व ही मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों की इस अंतिम विधिक घोषणा को सुनते ही अस्पताल परिसर के भीतर मौजूद भाई और ससुर फूट-फूटकर रोने लगे, जिससे वहां मौजूद अन्य मरीजों की आंखें भी नम हो गईं।

भाड़े का ऑटो और विवाह के कर्ज का संदेहास्पद कोण

​इस अचानक हुई आत्मघाती घटना के पीछे छिपे वास्तविक कारणों को लेकर यद्यपि अभी तक कोई आधिकारिक विलेख सामने नहीं आया है, परंतु मृतक के करीबियों और पारिवारिक सूत्रों से आर्थिक तंगी का एक संदेहास्पद कोण जरूर उभरकर सामने आ रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि रोशन कुमार एक बेहद परिश्रमी युवक था और वह प्रतिदिन दूसरे की ऑटो गाड़ी को किराए (भाड़े) पर लेकर सुल्तानगंज और भागलपुर रूट पर चलाता था। इसी दैनिक जीविकोपार्जन के बल पर वह अपने पूरे परिवार का भरण-पोषण पूरी कड़ाई से कर रहा था।

​चूंकि वह तीन भाइयों में सबसे बड़ा था, इसलिए पूरे परिवार की सामाजिक और आर्थिक जिम्मेदारियों का मुख्य बोझ उसी के कंधों पर संधारित था। परिजनों के मुताबिक, इसी वर्ष मार्च महीने में संपन्न हुए उसके विवाह के आयोजन, कपड़ों, गहनों और सामाजिक लेन-देन की प्रणालियों को पूरा करने के लिए रौशन को स्थानीय स्तर पर कतिपय महाजनों और साहूकारों से भारी ब्याज पर कुछ विधिक कर्ज (उधार) लेना पड़ा था।

​विवाह संपन्न हो जाने के बाद से ही ऑटो की दैनिक कमाई से उस कर्ज की किश्तों और ब्याज की राशि को चुकाने में रौशन को काफी व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। लॉकडाउन के बाद से और हाल ही में विक्रमशिला पुल संकट के कारण ऑटो के परिचालन और कमाई में भी आंशिक विसंगति आई थी। आशंका जताई जा रही है कि लेनदारों द्वारा पैसे वापस करने को लेकर बनाए जा रहे मानसिक दबाव के कारण रौशन पिछले कुछ दिनों से आंतरिक रूप से गहरे अवसाद (स्ट्रेस) की विधा से गुजर रहा था, जिसके कारण उसने यह आत्मघाती रास्ता चुन लिया। हालांकि, पुलिस को घटना स्थल की सघन जांच के दौरान मृतक के पास से या कमरे के भीतर से कोई भी सुसाइड नोट (आत्महत्या विलेख) बरामद नहीं हुआ है, जिससे इस दावे की शत-प्रतिशत आधिकारिक पुष्टि होना अभी शेष है।

बरारी पुलिस की विधिक प्रविष्टि और सुल्तानगंज प्रक्षेत्र में अनुसंधान की प्रविधि

​मायागंज अस्पताल प्रशासन की आधिकारिक सूचना के विलेख पर कार्रवाई करते हुए अस्पताल परिसर में ही स्थापित बरारी थाना आउटपोस्ट (टीओपी) की पुलिस टीम ने सक्रियता दिखाई। बरारी पुलिस ने मृत युवक के शव को अपने विधिक नियंत्रण में लेते हुए पंचनामा की प्रविष्टि तैयार की। इसके उपरांत, शव को आधिकारिक अंत्यपरीक्षण (पोस्टमार्टम) के लिए जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विंग को हस्तगत करा दिया गया है ताकि मृत्यु के वास्तविक समय और आंतरिक कारणों का वैज्ञानिक साक्ष्य संकलित किया जा सके।

​चूंकि मूल घटना स्थल सुल्तानगंज थाना प्रक्षेत्र के अंतर्गत आता है, इसलिए बरारी पुलिस द्वारा इस अपमृत्यु (यूडी केस) के प्राथमिक दस्तावेजों को सुल्तानगंज थाने के मुख्य विंग को स्थानांतरित करने की विधा पूरी की जा रही है। सुल्तानगंज पुलिस की एक विशेष टीम ने शिवनंदनपुर गांव पहुंचकर घटना स्थल वाले कमरे का भौतिक निरीक्षण किया है और वहां मौजूद साक्षी कुमारी व अन्य भाइयों के प्रारंभिक बयान दर्ज किए हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने और मायके पक्ष के लोगों के लिखित बयानों की समीक्षा के बाद ही इस मामले में आगे की विधिक धाराएं निर्धारित की जाएंगी और गहन अनुसंधान के जरिए सच को सामने लाया जाएगा।

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