​बेगूसराय में अंतरजातीय प्रेम विवाह पर बवाल: नाराज माता-पिता ने जीवित बेटी का किया पिंडदान, फिर ससुराल में घुसकर ढाया कहर

बेगूसराय, 18 मई 2026। बिहार के बेगूसराय जिले के छौड़ाही थाना प्रक्षेत्र से सामाजिक ताने-बाने को झकझोर देने वाली और कानून-व्यवस्था को सीधी चुनौती देने वाली एक अत्यंत अमानवीय व विसंगतिपूर्ण वारदात सामने आई है। क्षेत्र की सिहमा पंचायत के वार्ड संख्या-दो में एक प्रेमी युगल द्वारा अपनी स्वेच्छा से किए गए अंतरजातीय प्रेम विवाह को लेकर लड़की के परिवार के भीतर प्रतिशोध और सामाजिक कट्टरता की आग इस कदर भड़क उठी कि उन्होंने जीते जी अपनी ही सगी बेटी का न केवल प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर दिया, बल्कि पवित्र धार्मिक मान्यताओं को ताक पर रखकर उसका पिंड दान तक कर डाला।

​पारिवारिक और सामाजिक मर्यादा के नाम पर किए गए इस अजीबोगरीब कृत्य के बाद भी जब लड़की के स्वजनों का आक्रोश शांत नहीं हुआ, तो उन्होंने सारी विधिक और नैतिक सीमाओं को लांघकर अपनी बेटी के ससुराल पर लाठी-डंडों और हथियारों के साथ धावा बोल दिया। इस हिंसक हमले में नवविवाहिता, उसके पति, सास सहित परिवार के कई अन्य सदस्य गंभीर रूप से चोटिल हुए हैं। घटना के बाद पीड़ित युवती ने छौड़ाही थाने पहुंचकर अपने सगे माता-पिता, भाइयों और चाचा सहित अन्य नामजद लोगों के खिलाफ घर में घुसकर जानलेवा हमला करने, महिलाओं के साथ घोर अभद्रता करने, गला दबाकर मारने का प्रयास करने तथा लाखों रुपये मूल्य के सोने के आभूषण लूट लेने के विलेखों के तहत नियमित प्राथमिकी दर्ज कराई है। इस घटना के बाद से पूरे सिहमा प्रक्षेत्र में भारी सामाजिक तनाव और तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है।

अंतर्जातीय विवाह का सामाजिक विन्यास और दोनों परिवारों की अवस्थिति

​इस पूरे पारिवारिक और विधिक विवाद की जड़ें सिहमा पंचायत के वार्ड संख्या-दो की भौगोलिक अवस्थिति और वहां रहने वाले दो अलग-अलग जातियों के परिवारों के बीच उपजे प्रेम संबंधों से जुड़ी हुई हैं। छौड़ाही थाने में विधिक न्याय की गुहार लगाने पहुंची पीड़ित नवविवाहिता उजाला कुमारी ने अपने आधिकारिक विलेख में स्पष्ट किया है कि वह अत्यंत पिछड़े वर्ग के अंतर्गत आने वाली ‘धानुक’ जाति से संबंध रखती है, जबकि उसके पड़ोस में ही रहने वाला उसका प्रेमी व वर्तमान पति मुरारी कुमार ‘नाई’ जाति से ताल्लुक रखता है। दोनों के विन्यास यानी घर एक ही मोहल्ले में बिल्कुल आसपास अवस्थित हैं, जिसके कारण बचपन से ही दोनों के बीच सामान्य जान-पहचान और आपसी संवाद की प्रविधि बनी हुई थी।

​समय के चक्रव्यूह के साथ यह सामान्य जान-पहचान धीरे-धीरे एक प्रगाढ़ प्रेम संबंध में तब्दील हो गई। दोनों ने सामाजिक बंधनों और जातिवादी रूढ़ियों की परवाह न करते हुए एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का दृढ़ विलेख तैयार किया और कतिपय महीनों पूर्व अपनी पूर्ण स्वेच्छा और विधिक परिपक्वता (उम्र सीमा) के आधार पर आपस में विवाह बंधन में बंध गए। विवाह संपन्न होने के बाद उजाला कुमारी अपने मायके के बंधनों से विमुक्त होकर अपने पति मुरारी कुमार के घर सिहमा में ही एक आदर्श बहू के रूप में रहने लगी। उजाला का स्पष्ट कहना है कि वे दोनों अपने इस वैवाहिक जीवन से आंतरिक रूप से बेहद खुश और संतुष्ट हैं और एक-दूसरे के प्रति पूर्ण वैचारिक निष्ठा रखते हैं।

जीते जी बेटी का प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार और पिंड दान की अजीबो-गरीब विधा

​उजाला कुमारी और मुरारी कुमार का यह अंतर्जातीय विवाह लड़की के स्वाभिमानी और रूढ़िवादी परिवार को सामाजिक रूप से पूरी तरह नागवार गुजरा। उन्हें लगा कि एक नाई जाति के युवक से उनकी बेटी ने विवाह कर पूरे समाज और बिरादरी में उनके वंश की साख और प्रतिष्ठा को मिट्टी में मिला दिया है। इसी झूठी सामाजिक प्रतिष्ठा के अवसाद में आकर लड़की के पिता जगदीश महतो, चाचा दिनेश महतो, मां सुनैना देवी और उसके सगे भाइयों— दीपक कुमार, सोनू कुमार एवं मोनू कुमार ने मिलकर एक अत्यंत विचलित करने वाली योजना को धरातल पर उतारा।

​इन सभी लोगों ने पूरे सिहमा गांव और अपनी बिरादरी के बीच यह आधिकारिक और सांगठनिक घोषणा कर दी कि उजाला कुमारी ने दूसरी जाति में विवाह करके अपने कुल को कलंकित किया है, इसलिए आज की तिथि से उनके परिवार के लिए वह विधिक और शारीरिक रूप से मृत हो चुकी है। अपनी इस घोषणा को प्रामाणिक रूप देने के लिए पिता जगदीश महतो और भाइयों ने मिलकर गांव के समीप नदी तट पर उजाला कुमारी का एक पुतला बनाकर उसका प्रतीकात्मक दाह-संस्कार (अंतिम संस्कार) संपन्न कर दिया। इतना ही नहीं, सनातन धर्म की पवित्र गरुड़ पुराण की प्रविधियों का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने बाकायदा मुंडन करवाकर अपनी जीवित बेटी के नाम का पिंड दान और श्राद्ध कर्म के विलेख भी पूरे कर लिए। इस अजीबोगरीब और अमानवीय कृत्य की खबर जैसे ही पूरे बेगूसराय प्रक्षेत्र में फैली, वैसे ही यह मामला पूरे जिले में घोर सामाजिक बेइज्जती और वैचारिक विमर्श का मुख्य केंद्र बन गया, जिससे नवविवाहित जोड़े को भारी मानसिक प्रताड़ना और लोक-लाज का सामना करना पड़ा।

16 मई की खूनी वारदात: ससुराल में घुसकर जानलेवा हमला और आभूषणों की लूट

​प्रतीकात्मक रूप से बेटी को मृत घोषित करने के बाद भी मायके पक्ष के लोगों के भीतर सुलग रही प्रतिशोध की अग्नि शांत नहीं हुई। बीते शनिवार, 16 मई 2026 की देर शाम जब मुरारी कुमार के घर के सभी लोग अपने दैनिक कार्यों के उपरांत विश्राम की प्रविधि में थे, तभी अचानक जगदीश महतो, दिनेश महतो, दीपक, सोनू और मोनू कुमार अपने साथ एक दर्जन से अधिक अज्ञात और लाठी-डंडों व धारदार हथियारों से लैस उपद्रवियों को लेकर मुरारी के घर पर पूरी क्रूरता के साथ टूट पड़े।

​अपराधियों ने घर का मुख्य किवाड़ तोड़ दिया और भीतर प्रवेश करते ही गाली-गलौज और तोड़-फोड़ शुरू कर दी। उजाला कुमारी ने आरोप लगाया है कि जब उसके ससुराल के लोगों ने इस अवैध घुसपैठ का विधिक विरोध किया, तो हमलावरों ने उसकी वृद्ध सास उषा देवी को जमीन पर पटक कर बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। बीच-बचाव करने आई मुरारी कुमार की चाची और परिवार की अन्य महिलाओं के साथ भी उपद्रवियों ने घोर अभद्रता की, उनके वस्त्र खींचे और लात-घूंसों से उन पर प्रहार किए।

​मारपीट के दौरान अपराधियों ने उजाला कुमारी का गला दबाकर उसे जान से मारने का सीधा प्रयास किया और चीख-पुकार सुनकर जब आस-पास के लोग जुटने लगे, तो हमलावरों ने घर की अलमारी और महिलाओं के शरीरों से लगभग तीन लाख रुपये से अधिक के मूल्यवान सोने-चांदी के विधिक आभूषण और जेवरात जबरन छीन लिए। जाते-जाते अपराधियों ने पूरे परिवार को यह कड़क घुड़की दी कि यदि उन्होंने इस घटना की शिकायत स्थानीय पुलिस या अदालत से की, तो पूरे कुनबे को डायनामाइट या गोलियों से उड़ाकर सामूहिक रूप से समाप्त कर दिया जाएगा।

डायल-112 की त्वरित दबिश और बेगूसराय सदर अस्पताल में घायलों का उपचार

​जब अपराधियों द्वारा घर के भीतर तांडव मचाया जा रहा था और पीड़ित परिवार की जान पूरी तरह से खतरे में पड़ी हुई थी, तभी उजाला कुमारी ने सूझबूझ का परिचय देते हुए किसी तरह कमरे के कोने में छिपकर अपने मोबाइल फोन से बिहार पुलिस की आपातकालीन सेवा हेल्पलाइन नंबर डायल-112 (Dial-112) पर इस खूनी हमले की गुप्त सूचना फ्लैश की। मामले की संवेदनशीलता और महिलाओं से जुड़े होने के कारण डायल-112 की गश्ती गाड़ी ने त्वरित प्रशासनिक रिस्पॉन्स दिखाते हुए महज कुछ ही मिनटों के भीतर सायरन बजाते हुए सिहमा वार्ड संख्या-दो के घटना स्थल पर अपनी कड़क दबिश दी।

​पुलिस के भारी सुरक्षा वाहनों की आहट और सायरन की आवाज सुनते ही हमलावर जगदीश महतो और उसके सभी सगे संबंधी अपनी लाठियों और लूटे गए आभूषणों को समेटकर अंधेरे और तंग गलियों के रास्ते मौके से फरार होने में सफल रहे। पुलिस टीम ने घटना स्थल का विधिक निरीक्षण करने के बाद खून से लथपथ और कराह रहे घायलों को स्थानीय ग्रामीणों के सक्रिय शारीरिक सहयोग से तुरंत रेस्क्यू किया और उन्हें प्राथमिक उपचार के लिए छौड़ाही सामूहिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंचाया।

​सीएचसी के डॉक्टरों ने प्राथमिक पट्टियां करने और आंतरिक चोटों की जांच के बाद बताया कि कुछ पीड़ितों की शारीरिक स्थिति, विशेषकर सास उषा देवी की हालत अत्यधिक नाजुक है क्योंकि उनके सिर और संवेदनशील अंगों पर गहरे प्रहार किए गए थे। डॉक्टरों के विधिक परामर्श पर गंभीर रूप से घायल सदस्यों को बेहतर न्यूरो और सर्जिकल प्रबंधन के लिए तुरंत बेगूसराय सदर अस्पताल के आपातकालीन वार्ड में रेफर कर दिया गया, जहां वर्तमान समय में कड़ी पुलिस निगरानी के बीच घायलों का विधिक उपचार और चिकित्सीय अनुसंधान जारी है।

छौड़ाही पुलिस की विधिक कार्रवाई और ग्रामीणों का वैचारिक दृष्टिकोण

​इस भयंकर सामाजिक और पारिवारिक विचलनों को लेकर छौड़ाही थाना पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गई है। अस्पताल से प्राथमिक उपचार कराने के बाद पीड़िता उजाला कुमारी द्वारा थाने में दिए गए लिखित विलेख और आवेदन के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए छह मुख्य नामजद आरोपियों (पिता, मां, चाचा और तीन भाइयों) सहित कुल एक दर्जन से अधिक अज्ञात हमलावरों के खिलाफ घर में अनधिकृत प्रवेश करने, जानलेवा हमला करने, गला दबाने, चोरी-लूटपाट और स्त्री की लज्जा भंग करने जैसी संगीन विधिक धाराओं के तहत नियमित प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। छौड़ाही के थानाध्यक्ष ने मामले के संदर्भ में आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस की एक विशेष खोजी टीम साक्ष्यों के वैज्ञानिक संकलन और नामजद अभियुक्तों की विधिक गिरफ्तारी के लिए सिहमा और उसके आस-पास के संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी अभियान संचालित कर रही है।

​दूसरी ओर, इस पूरे जघन्य कृत्य को लेकर सिहमा पंचायत के स्थानीय ग्रामीणों और प्रबुद्ध नागरिकों के बीच एक गहरा आक्रोश और वैचारिक असंतोष देखने को मिल रहा है। गांव के बुजुर्गों और युवाओं का सामूहिक रूप से मानना है कि चूंकि प्रेमी युगल एक ही गांव के मूल निवासी हैं और लड़की पूरी तरह से बालिग व अपनी विधिक समझ रखती है, ऐसी परिस्थिति में अपनी स्वेच्छा से किए गए विवाह को स्वीकार न करना और जीते जी अपनी ही बेटी का पिंडदान कर उसके ससुराल पर खूनी हमला बोलना किसी भी सभ्य और प्रगतिशील समाज के विलेखों में कतई स्वीकार्य नहीं ठहराया जा सकता। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से जिला पुलिस कप्तान और स्थानीय प्रशासन से यह पुरजोर मांग उठाई है कि इस नवविवाहित जोड़े को अविलंब पर्याप्त सामाजिक और विधिक सुरक्षा कवच प्रदान किया जाए ताकि वे बिना किसी भय और आतंक के अपने दांपत्य जीवन का निर्वाह कर सकें।

  • ये भी पढ़े..

    होर्मुज क्षेत्र में बढ़ता समुद्री संकट: चार दिनों में तीसरे पोत पर हमला, भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता

    Share Add as a preferred…

    बिहार में सरकारी शिक्षकों पर सख्ती, कोचिंग और निजी ट्यूशन में पढ़ाने पर तत्काल प्रभाव से लगा प्रतिबंध

    Share Add as a preferred…