
पटना, 2 मई। बिहार की पंचायतों ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा जारी वित्तीय वर्ष 2023-24 की पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 रिपोर्ट में राज्य की दो ग्राम पंचायतों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ‘फ्रंट रनर’ श्रेणी में स्थान प्राप्त किया है। यह उपलब्धि न केवल बिहार के ग्रामीण विकास मॉडल को मजबूती प्रदान करती है, बल्कि स्थानीय शासन की प्रभावशीलता को भी दर्शाती है।
इस रिपोर्ट में देशभर के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 2,59,867 ग्राम पंचायतों ने भाग लिया। इनमें से 3,635 पंचायतें ‘फ्रंट रनर’ यानी ग्रेड-ए श्रेणी में शामिल हुईं, जबकि 1,18,824 पंचायतों ने ‘परफॉर्मर’ यानी ग्रेड-बी श्रेणी में स्थान हासिल किया। बिहार की 2 पंचायतों का ग्रेड-ए में शामिल होना राज्य के लिए गौरव की बात है।
तेलकप पंचायत बनी राज्य की शान
रोहतास जिले की तेलकप ग्राम पंचायत ने इस रिपोर्ट में शानदार प्रदर्शन किया है। इस पंचायत ने स्थानीयकृत सतत विकास लक्ष्यों (LSDG) से जुड़े सभी 9 थीम्स में उत्कृष्ट कार्य करते हुए राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान प्राप्त किया है।
तेलकप पंचायत की इस उपलब्धि के कारण उसे प्रतिष्ठित “नानाजी देशमुख सर्वोत्तम पंचायत सतत विकास पुरस्कार” के लिए भी चयनित किया गया है। यह पुरस्कार देशभर में पंचायतों द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों को मान्यता देने के लिए दिया जाता है।
इस पंचायत ने गरीबी उन्मूलन, स्वास्थ्य, स्वच्छता, महिला सशक्तिकरण और सुशासन जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य किया है, जिससे यह अन्य पंचायतों के लिए प्रेरणा बन गई है।
पीएआई 2.0: पंचायतों का रिपोर्ट कार्ड
पंचायत उन्नति सूचकांक (PAI) 2.0 को पंचायतों के समग्र विकास का ‘रिपोर्ट कार्ड’ माना जाता है। यह सूचकांक संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के अनुरूप तैयार किया गया है और स्थानीय स्तर पर विकास की प्रगति को मापता है।
इस रिपोर्ट के माध्यम से पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन विभिन्न मानकों पर किया जाता है, जैसे—
- आधारभूत संरचना
- स्वास्थ्य सेवाएं
- स्वच्छता
- सामाजिक सुरक्षा
- महिला सशक्तिकरण
- आजीविका के अवसर
- सुशासन और पारदर्शिता
इन सभी पहलुओं के आधार पर पंचायतों को विभिन्न श्रेणियों में रखा जाता है, जिससे उनकी प्रगति और चुनौतियों का स्पष्ट आकलन किया जा सके।
श्रेणियों में बांटी गई पंचायतें
पीएआई स्कोर के आधार पर पंचायतों को पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
- ए+ (Achiever) – सर्वोच्च प्रदर्शन
- ए (Front Runner) – अग्रणी पंचायत
- बी (Performer) – अच्छा प्रदर्शन
- सी (Aspirant) – सुधार की आवश्यकता
- डी (Beginner) – प्रारंभिक स्तर
बिहार की दो पंचायतों का ‘फ्रंट रनर’ श्रेणी में आना इस बात का संकेत है कि राज्य की पंचायतें तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
बिहार की अन्य पंचायतों का प्रदर्शन
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार की 771 पंचायतें ‘परफॉर्मर’ यानी ग्रेड-बी श्रेणी में शामिल हुई हैं। हालांकि, कुछ पंचायतें अभी भी ग्रेड-सी और ग्रेड-डी में हैं, जो यह दर्शाता है कि राज्य में अभी भी सुधार की गुंजाइश मौजूद है।
फिर भी, बड़ी संख्या में पंचायतों का बेहतर प्रदर्शन यह संकेत देता है कि राज्य में ग्रामीण विकास की दिशा में सकारात्मक बदलाव हो रहा है।
विभिन्न थीम्स में उत्कृष्ट पंचायतें
राज्य स्तर पर विभिन्न विषयों में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों की भी पहचान की गई है। ये पंचायतें अलग-अलग क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं:
- गरीबी मुक्त एवं उन्नत आजीविका – अम्बा उतर, शिवहर
- स्वस्थ पंचायत – कहलावा, सिवान
- बाल अनुकूल पंचायत – डुमरी भागारावा, पश्चिम चंपारण
- पर्याप्त जल युक्त पंचायत – पिपरासी, पश्चिम चंपारण
- स्वच्छ एवं हरित पंचायत – दुल्लाहपुर, बक्सर
- आत्मनिर्भर आधारभूत संरचना – जजुआर मध्य, मुजफ्फरपुर
- सामाजिक न्याय एवं सुरक्षा – बहेरा, बांका
- सुशासन युक्त पंचायत – समोहता, रोहतास
- महिला अनुकूल पंचायत – गौरा-1, बेगूसराय
इन पंचायतों ने अपने-अपने क्षेत्रों में नवाचार और प्रभावी कार्यान्वयन के माध्यम से मिसाल पेश की है।
महिला सशक्तिकरण और सुशासन का प्रभाव
बिहार की पंचायतों के बेहतर प्रदर्शन के पीछे महिला सशक्तिकरण और सामुदायिक भागीदारी का बड़ा योगदान है। पंचायतों में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी ने विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बनाया है।
इसके अलावा, डिजिटल तकनीकों के उपयोग, पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था ने भी पंचायतों की कार्यप्रणाली को मजबूत किया है।
भविष्य की संभावनाएं
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह पंचायतों को सशक्त बनाया जाता रहा, तो बिहार ग्रामीण विकास के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।
सरकार भी पंचायतों को अधिक संसाधन, प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है, ताकि वे और बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 में बिहार की दो पंचायतों का ‘फ्रंट रनर’ श्रेणी में स्थान प्राप्त करना राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। यह दर्शाता है कि ग्रामीण स्तर पर विकास की प्रक्रिया मजबूत हो रही है और पंचायतें अपने दायित्वों को प्रभावी ढंग से निभा रही हैं।
अब जरूरत इस बात की है कि इस सफलता को और व्यापक बनाया जाए, ताकि राज्य की अधिक से अधिक पंचायतें राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकें और बिहार के ग्रामीण विकास को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सके।


