
पटना: बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने का सिलसिला लगातार तेज होता जा रहा है। हाल ही में दो वरिष्ठ अधिकारियों को केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों के लिए रिलीव किया गया है। इस घटनाक्रम को राज्य के प्रशासनिक ढांचे और पुलिस व्यवस्था के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, 2009 बैच के आईपीएस अधिकारी को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा गया है। उन्हें में उप महानिरीक्षक (DIG) के पद पर नियुक्त किया गया है। इसके लिए राज्य सरकार ने उन्हें विधिवत रूप से विरमित कर दिया है।
निगरानी ब्यूरो से ITBP तक का सफर
नवीन चंद्र झा फिलहाल बिहार के निगरानी ब्यूरो में डीआईजी के पद पर तैनात थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई अहम मामलों में भूमिका निभाई और प्रशासनिक अनुभव हासिल किया।
अब उन्हें आईटीबीपी जैसी महत्वपूर्ण केंद्रीय अर्धसैनिक बल में जिम्मेदारी सौंपी गई है, जहां सीमा सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील कार्यों का संचालन होता है। यह नियुक्ति उनके अनुभव और क्षमता को देखते हुए की गई मानी जा रही है।
एक दिन पहले ही राकेश राठी को भी किया गया रिलीव
इससे पहले 29 अप्रैल को 2002 बैच के आईपीएस अधिकारी को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए रिलीव किया गया था। वे बिहार में विशेष शाखा के पुलिस महानिरीक्षक के रूप में कार्यरत थे।
उन्हें केंद्र सरकार में में संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्त किया गया है। यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक पद है, जहां राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण और सुरक्षा से जुड़े मामलों में भूमिका निभानी होती है।
पांच साल तक रहेंगे केंद्रीय सेवा में
राकेश राठी की नियुक्ति पांच वर्षों के लिए या अगले आदेश तक के लिए की गई है। इस दौरान वे गृह मंत्रालय में अपनी सेवाएं देंगे और देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों में योगदान देंगे।
लगातार बढ़ रहा केंद्रीय प्रतिनियुक्ति का ट्रेंड
बिहार कैडर के आईपीएस अधिकारियों का केंद्र में जाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन हाल के दिनों में इसकी रफ्तार बढ़ी है। लगातार वरिष्ठ अधिकारियों का दिल्ली जाना इस बात का संकेत है कि राज्य के अधिकारियों को केंद्र स्तर पर भी अहम जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अधिकारियों को व्यापक अनुभव मिलता है, जो भविष्य में राज्य प्रशासन के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।
राज्य पर भी पड़ता है असर
हालांकि, दूसरी ओर यह भी माना जा रहा है कि लगातार अधिकारियों के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने से राज्य की पुलिस व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। वरिष्ठ पदों पर खाली जगह बनने से प्रशासनिक संतुलन बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
ऐसे में राज्य सरकार को नए अधिकारियों की तैनाती और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण पर ध्यान देना होगा, ताकि कानून-व्यवस्था पर कोई असर न पड़े।
अनुभव और अवसर का संतुलन
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति को अधिकारियों के करियर के लिए एक बड़ा अवसर माना जाता है। इससे उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर काम करने का अनुभव मिलता है और वे नई नीतियों और प्रक्रियाओं को समझ पाते हैं।
वहीं, राज्य के लिए यह जरूरी होता है कि वह अपने प्रशासनिक ढांचे को संतुलित बनाए रखे और खाली पदों को समय पर भरे।
आगे भी जारी रह सकता है सिलसिला
सूत्रों की मानें तो आने वाले समय में बिहार कैडर के और भी अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जा सकते हैं। केंद्र सरकार में अनुभवी अधिकारियों की मांग लगातार बनी रहती है, जिसके चलते राज्यों से अधिकारियों को बुलाया जाता है।
कुल मिलाकर, बिहार के दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाना एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक घटनाक्रम है। जहां एक ओर यह अधिकारियों के लिए नई जिम्मेदारियों और अवसरों का द्वार खोलता है, वहीं दूसरी ओर राज्य के प्रशासनिक ढांचे के लिए संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी हो जाता है।


