
पटना, 29 अप्रैल 2026। बिहार सरकार ने महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल का जल’ योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही को लेकर सख्त रुख अपनाया है। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जो अभियंता अपने दायित्वों के निर्वहन में विफल या उदासीन पाए जाएंगे, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (CRS) देकर सेवा से हटाया जा सकता है।
सरकार की इस सख्ती से विभागीय अधिकारियों और अभियंताओं के बीच हलचल मच गई है और सभी को अपने कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं।
समीक्षा बैठक में दिखी सख्ती
मंगलवार को पीएचईडी विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने पटना में मुंगेर, लखीसराय और जमुई प्रमंडलों में योजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की।
बैठक के दौरान उन्होंने साफ कहा कि ‘हर घर नल का जल’ योजना सरकार की प्राथमिक योजनाओं में से एक है, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
लक्ष्य पूरा करने का सख्त निर्देश
सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि लंबित योजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
उन्होंने मुंगेर प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता को विशेष रूप से निर्देशित किया कि वे सभी अधूरे कार्यों को तेजी से पूर्ण करें और जलापूर्ति व्यवस्था को सुचारू बनाएं।
शिकायतों के त्वरित निपटारे पर जोर
बैठक में केंद्रीकृत शिकायत निवारण केंद्र (CGRC) में लंबित मामलों को लेकर भी नाराजगी जताई गई।
सचिव ने निर्देश दिया कि सभी शिकायतों का त्वरित समाधान किया जाए, ताकि आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
फील्ड विजिट नहीं करने पर कार्रवाई
समीक्षा के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ सहायक अभियंता, जिन्हें निरीक्षण के लिए नामित किया गया था, वे फील्ड विजिट पर गए ही नहीं।
इस पर सचिव ने कड़ी नाराजगी जताते हुए संबंधित अभियंताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी अधिकारियों को नियमित रूप से क्षेत्र भ्रमण करना होगा और योजनाओं की जमीनी स्थिति की निगरानी करनी होगी।
लापरवाही पर CRS की चेतावनी
पीएचईडी सचिव पंकज पाल ने दोहराया कि जो अभियंता अपने काम के प्रति गंभीर नहीं हैं या जिनकी कार्यक्षमता कमजोर है, उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी जा सकती है।
यह कदम विभाग में जवाबदेही सुनिश्चित करने और कार्य संस्कृति में सुधार लाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
तकनीकी समस्याओं के समाधान का निर्देश
सचिव ने पाइपलाइन लीकेज, जलापूर्ति में बाधा और अन्य तकनीकी समस्याओं को तुरंत ठीक करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि जहां भी समस्या सामने आए, उसे प्राथमिकता के आधार पर दूर किया जाए, ताकि लोगों को निरंतर पानी की आपूर्ति मिल सके।
अधीक्षण अभियंताओं की जिम्मेदारी बढ़ी
बैठक में अधीक्षण अभियंताओं को भी निर्देश दिया गया कि वे नियमित रूप से फील्ड विजिट करें और कार्यों की निगरानी करें।
उनकी जिम्मेदारी तय की गई है कि वे सुनिश्चित करें कि सभी योजनाएं समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरी हों।
योजना का महत्व
‘हर घर नल का जल’ योजना बिहार सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसका उद्देश्य हर घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाना है।
इस योजना के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पाइपलाइन के माध्यम से जलापूर्ति की व्यवस्था की जा रही है।
जनता को मिलने वाला लाभ
यदि योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो इससे लाखों लोगों को साफ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध होगा।
इससे न केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं कम होंगी, बल्कि लोगों के जीवन स्तर में भी सुधार होगा।
प्रशासनिक सुधार की दिशा में कदम
सरकार की यह सख्ती इस बात का संकेत है कि अब योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के कदमों से प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार आएगा और योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच सकेगा।
‘हर घर नल का जल’ योजना में लापरवाही पर बिहार सरकार का सख्त रुख प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
अयोग्य और लापरवाह इंजीनियरों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति की चेतावनी देकर सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अब काम में ढिलाई की कोई जगह नहीं है।
अब यह देखना अहम होगा कि इस सख्ती का जमीन पर कितना असर पड़ता है और योजना का लाभ कितनी तेजी से आम लोगों तक पहुंचता है।


