
पटना। बिहार के प्रशासनिक ढांचे में जवाबदेही और पारदर्शिता को लेकर सोमवार को एक ऐसा क्रांतिकारी अध्याय जुड़ा है, जिसने ‘सरकारी सुस्ती’ पर सीधा प्रहार किया है। राजधानी पटना के देशरत्न मार्ग स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय ‘संवाद’ में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘सहयोग हेल्पलाइन नंबर 1100’ और ‘सहयोग पोर्टल’ का रिमोट दबाकर लोकार्पण किया। यह केवल एक तकनीकी शुरुआत नहीं है, बल्कि उन आम नागरिकों के लिए न्याय की नई उम्मीद है जो अपने छोटे-छोटे कामों के लिए प्रखंडों और थानों के चक्कर काटते-काटते थक जाते थे। अब बिहार की व्यवस्था ‘डेडलाइन’ पर चलेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जनता की समस्याओं के समाधान में कोताही बरतने वाले अधिकारियों के लिए अब बचाव का कोई रास्ता नहीं होगा। यदि किसी आवेदन पर 30 दिनों के भीतर ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पोर्टल पर 31वें दिन संबंधित अधिकारी का निलंबन आदेश स्वतः ही तैयार हो जाएगा।
पंचायत स्तर पर सजेगी ‘सहयोग’ की चौपाल
बिहार सरकार ने प्रशासन को जनता के दरवाजे तक पहुँचाने के लिए ‘सहयोग शिविर’ की एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। सम्राट चौधरी के अनुसार, अब लोगों को अपनी समस्याओं के लिए राजधानी या जिला मुख्यालय भागने की आवश्यकता नहीं होगी। प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को राज्य की सभी पंचायतों में ‘सहयोग शिविर’ का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों का मूल मंत्र ‘सबका सम्मान, जीवन आसान’ निश्चय के तहत तय किया गया है।
पंचायत स्तर पर आयोजित होने वाले इन शिविरों में नागरिक अपनी समस्याओं के लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन, दोनों माध्यमों से आवेदन दे सकेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक लोगों के आवेदन आने बंद नहीं होंगे, तब तक यह सहयोग शिविर का सिलसिला चलता रहेगा। यह शिविर न केवल समस्याओं को सुनेगा, बल्कि उनके त्वरित निष्पादन के लिए एक पारदर्शी मंच के रूप में कार्य करेगा। इन शिविरों की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इनका सीधा जुड़ाव ‘सहयोग पोर्टल’ से होगा, जिससे हर आवेदन की रियल टाइम ट्रैकिंग संभव हो सकेगी।
30 दिनों की ‘लक्ष्मण रेखा’ और स्वतः निलंबन का प्रावधान
प्रशासनिक सुस्ती को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ने एक ऐसी शर्त रखी है जिसने पूरे प्रशासनिक महकमे में हलचल मचा दी है। सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि अब तक आवेदन दिए जाते थे, लेकिन उनके निष्पादन की कोई समय सीमा तय नहीं थी। अब 30 दिनों की सख्त समय सीमा निर्धारित की गई है।
- स्वतः निलंबन प्रणाली: यदि कोई अधिकारी 30 दिनों के भीतर आवेदन पर आदेश पारित नहीं करता या जानबूझकर फाइल अटकाता है, तो वह 31वें दिन स्वतः निलंबित मान लिया जाएगा।
- डिजिटल फॉर्मेट: पोर्टल पर ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि कोताही बरतने वाले अधिकारियों के सस्पेंशन का फॉर्मेट ऑनलाइन ही जेनरेट हो जाएगा।
- जवाबदेही: यह व्यवस्था निचले स्तर के प्रखंड, अंचल और थाना स्तर के अधिकारियों पर विशेष रूप से लागू होगी।
मुख्यमंत्री का मानना है कि जब तक अधिकारियों के मन में कानून और समय सीमा का डर नहीं होगा, तब तक आम जनता को सुशासन का असली लाभ नहीं मिल सकता। 30 दिनों का यह ‘डेडलाइन’ बिहार की कार्य संस्कृति में एक बड़ा बदलाव लाने वाला साबित होगा।
सीसीटीवी की निगरानी में होंगे थाने और प्रखंड
पारदर्शिता को एक कदम और आगे बढ़ाते हुए सम्राट चौधरी ने घोषणा की कि राज्य के सभी प्रखंडों, अंचलों और थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। आईटी विभाग द्वारा संचालित इस परियोजना का उद्देश्य इन सरकारी कार्यालयों की गतिविधियों पर सीधी नजर रखना है। इससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका पर लगाम लगेगी।
इसके साथ ही, भूमि विवादों के निपटारे के लिए भी मुख्यमंत्री ने कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी प्रकार की जमीनों का रिकॉर्ड पारदर्शी होना चाहिए। स्वामित्व के रिकॉर्ड के साथ-साथ सरकारी जमीन का ब्योरा भी अपडेट रखा जाए। मुख्यमंत्री ने उन लोगों के प्रति भी संवेदनशीलता दिखाई जो 20, 30 या 40 वर्षों से सरकारी जमीन पर बसे हुए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह जनता की सरकार है, इसलिए ऐसे लोगों की चिंता करना और उनका ब्योरा रखना भी शासन का दायित्व है। भूमि विवादों के निष्पक्ष निपटारे के लिए भी वही 30 दिनों की समय सीमा प्रभावी रहेगी।
रियल टाइम मॉनिटरिंग और मुख्यमंत्री कार्यालय का डैशबोर्ड
सहयोग कार्यक्रम की सफलता केवल शिविरों के आयोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी निगरानी के लिए एक त्रिस्तरीय ढांचा तैयार किया गया है।
- जिला स्तर: जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक इस पूरी प्रक्रिया की रियल टाइम मॉनिटरिंग करेंगे। उन्हें निर्देश दिया गया है कि वे रोस्टर बनाकर कम से कम 5 पंचायतों का स्वयं निरीक्षण करें ताकि व्यवस्था की हकीकत पता चल सके।
- राज्य स्तर: मंत्रियों और उच्चाधिकारियों को भी इन शिविरों में शामिल होने और समस्याओं के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया गया है।
- मुख्यमंत्री कार्यालय: मुख्यमंत्री सचिवालय (CMO) में एक विशेष डैशबोर्ड स्थापित किया गया है, जहाँ से राज्य भर के आंकड़ों और लंबित मामलों को सीधे देखा जा सकेगा।
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव बी० राजेन्दर ने इस पोर्टल की तकनीकी खूबियों के बारे में बताते हुए कहा कि नागरिकों को मामले के निष्पादन के बाद ऑनलाइन ऑर्डर देखने की भी सुविधा मिलेगी। हेल्पलाइन नंबर 1100 के जरिए लोग अपनी शिकायतों की स्थिति जान सकेंगे और सहायता प्राप्त कर सकेंगे।
विकास और समृद्धि का ‘संकल्प’
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के विजन और नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के सपने का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सुशासन को बनाए रखना और विकास की गति को बढ़ाना ही प्राथमिकता है। बिहार में उद्योग लाने और निवेश बढ़ाने के लिए एक शांतिपूर्ण और न्यायपूर्ण वातावरण की आवश्यकता है।
- अपराध पर प्रहार: मुख्यमंत्री ने अपराधियों को भी कड़ी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि पुलिस को चुनौती देने वाले अपराधियों को 48 घंटे के भीतर जवाब दिया जाएगा। अपराधी चाहे किसी भी जाति या धर्म का हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
- बुनियादी सुविधाएं: सड़क, बिजली, पानी और कचरा प्रबंधन जैसी स्थानीय समस्याओं का निपटारा अब स्थानीय स्तर पर ही पंचायत सरकार भवनों के माध्यम से करने की कोशिश की जाएगी।
कार्यक्रम के दौरान सहयोग पोर्टल और हेल्पलाइन पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने भी संबोधन दिया। कार्यक्रम में ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप कुमार जायसवाल, नगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी जैसे दीपक कुमार, प्रत्यय अमृत और विनय कुमार उपस्थित रहे। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक भी इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक क्षण से जुड़े।
पटना के इस ‘संवाद’ कक्ष से निकला संदेश स्पष्ट है कि अब बिहार की जनता की समस्याओं का समाधान केवल फाइलों में नहीं, बल्कि धरातल पर समय सीमा के भीतर होगा। 11 तारीख को शुरू हुआ यह ‘1100’ हेल्पलाइन नंबर बिहार की जनता के लिए सहयोग का एक नया द्वार खोलने जा रहा है।


