
पटना, 18 जुलाई 2026: बिहार के मुख्यमंत्री ने शनिवार को बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय (BEU), पटना के तृतीय दीक्षांत समारोह में भाग लेते हुए कहा कि राज्य का भविष्य तकनीकी शिक्षा, नवाचार, स्टार्टअप और डिजिटल विकास पर आधारित होगा। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार युवाओं को केवल नौकरी पाने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने शैक्षणिक सत्र 2024-25 के बी.टेक एवं एम.टेक के मेधावी विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक, प्रशस्ति पत्र तथा ₹50,001 की पुरस्कार राशि प्रदान कर सम्मानित किया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को भी स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक देकर उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना की गई।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री वितरण का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बिहार के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखने का अवसर है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और तकनीकी कौशल का उपयोग समाज और देश के विकास के लिए करें। उनका कहना था कि आज के दौर में किसी इंजीनियर की पहचान केवल उसकी डिग्री से नहीं, बल्कि उसके नवाचार, तकनीकी दक्षता और समाज के लिए किए गए योगदान से होती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार देश का ऐसा राज्य है, जहां सभी 38 जिलों के इंजीनियरिंग कॉलेजों में मात्र ₹10 तथा पॉलिटेक्निक संस्थानों में केवल ₹5 शुल्क पर तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल बताते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं को भी गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि 21वीं सदी की अर्थव्यवस्था ज्ञान, डेटा, विज्ञान और तकनीक पर आधारित है। यदि बिहार के युवा आधुनिक तकनीक, अनुसंधान और नवाचार के साथ आगे बढ़ेंगे तो राज्य भी तेजी से विकसित होगा। इसी सोच के तहत राज्य सरकार उच्च शिक्षा और अनुसंधान के क्षेत्र में बड़े निवेश कर रही है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बिहार की गौरवशाली शैक्षणिक विरासत को पुनर्जीवित करने के लिए प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय के पुनर्स्थापन की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है। इसके लिए भारत सरकार द्वारा 220 एकड़ भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना बिहार को वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
उन्होंने यह भी घोषणा की कि मुजफ्फरपुर में आर्किटेक्चर एवं सिविल इंजीनियरिंग विश्वविद्यालय तथा भागलपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं कंप्यूटर साइंस विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी। इन संस्थानों के शुरू होने से आधुनिक तकनीकी शिक्षा, अनुसंधान और उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप मानव संसाधन तैयार करने में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उभरती हुई प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने युवाओं से “बिहार टेक” के लिए अपने सुझाव देने की अपील करते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा, स्टार्टअप संस्कृति और डिजिटल विकास ही राज्य को नई गति देंगे। नवाचार और स्टार्टअप के माध्यम से ही विकसित भारत और समृद्ध बिहार का सपना साकार होगा।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया। इनमें जमुई स्थित राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय में लगभग ₹3.49 करोड़ की लागत से निर्मित अतिरिक्त बालिका छात्रावास, किशनगंज इंजीनियरिंग कॉलेज में लगभग ₹77.58 करोड़ की विकास परियोजनाएं तथा सुपौल इंजीनियरिंग कॉलेज में लगभग ₹26.02 करोड़ की लागत से बने 300 बेड वाले अतिरिक्त छात्रावास भवन का लोकार्पण शामिल है। इन परियोजनाओं से राज्य में तकनीकी शिक्षा का आधार और मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री ने बिहार अभियंत्रण विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया और विद्यार्थियों द्वारा विकसित नवाचारों की सराहना की। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, मंत्रीगण, शिक्षाविद, प्रोफेसर, छात्र-छात्राएं तथा बड़ी संख्या में गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि राज्य सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक, स्टार्टअप और डिजिटल अवसरों से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बिहार के युवा अपनी प्रतिभा और नवाचार के बल पर राज्य को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।


