
बिहार सरकार में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग की जिम्मेदारी संभालते ही मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने बड़ा संदेश दिया है। शुक्रवार को सचिवालय स्थित विभागीय कार्यालय में पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता समाज के अंतिम पायदान पर बैठे लोगों तक विकास पहुंचाना है। खासकर उन एससी-एसटी बहुल इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा जो अब भी सड़क, शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं के मामले में पिछड़े हुए हैं।
पदभार ग्रहण के दौरान विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों ने मंत्री का स्वागत किया। इस मौके पर विभाग के सचिव संदीप कुमार आर पुडकलकट्टी, निदेशक प्रियंका रानी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने विभागीय योजनाओं की समीक्षा करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक उत्थान के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। आने वाले समय में इन योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा पिछले 100 दिनों में किए गए कार्यों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। खासकर अंबेडकर आवासीय विद्यालयों में छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए गए हैं।
मंत्री ने बताया कि छात्रावासों में रहने वाले छात्रों की छात्रवृत्ति राशि को दोगुना किया गया है ताकि आर्थिक रूप से कमजोर छात्र बेहतर तरीके से अपनी पढ़ाई जारी रख सकें। इसके अलावा ओवरसीज स्कीम जैसी योजनाओं के जरिए भी एससी-एसटी समुदाय के युवाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार चाहती है कि समाज के गरीब और वंचित वर्ग के बच्चे केवल प्राथमिक शिक्षा तक सीमित न रहें, बल्कि उच्च शिक्षा और वैश्विक अवसरों तक भी पहुंच बनाएं।
लखेंद्र कुमार रौशन ने स्पष्ट कहा कि जिन एससी-एसटी बहुल टोलों और गांवों में आज भी सड़क, भवन और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, वहां विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि ऐसे इलाकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार का प्रमुख लक्ष्य है। इसके लिए विभाग विभिन्न योजनाओं के जरिए काम करेगा ताकि पिछड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी बेहतर जीवन सुविधाएं मिल सकें।
मंत्री ने “विकास मित्र” योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विकास मित्रों के माध्यम से सरकार की योजनाओं की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही है ताकि जरूरतमंद लोगों को समय पर लाभ मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में एससी-एसटी समुदाय की बड़ी आबादी अब भी ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में रहती है। ऐसे में शिक्षा, सड़क और सामाजिक योजनाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाना राज्य के विकास के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की लापरवाही न हो। उन्होंने कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि विभागीय कार्यप्रणाली को और अधिक तेज और प्रभावी बनाया जाएगा। इसके लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर सुधार किए जाएंगे ताकि लोगों को कम समय में बेहतर सेवाएं मिल सकें।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार में सामाजिक न्याय और वंचित वर्गों के विकास को लेकर सरकार गंभीर संदेश देने की कोशिश कर रही है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग को इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल योजनाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं होती, बल्कि उनका सही क्रियान्वयन भी उतना ही जरूरी होता है। बिहार में कई बार योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचने में देरी और प्रशासनिक समस्याएं सामने आती रही हैं।
ऐसे में मंत्री लखेंद्र रौशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे विभागीय योजनाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू करें।
मंत्री ने कहा कि शिक्षा सामाजिक बदलाव का सबसे बड़ा माध्यम है। इसलिए सरकार की कोशिश होगी कि एससी-एसटी समुदाय के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
उन्होंने अंबेडकर आवासीय विद्यालयों का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार इन संस्थानों को और मजबूत बनाने पर काम कर रही है ताकि यहां पढ़ने वाले छात्र देश के बड़े संस्थानों और प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि विभाग केवल कल्याणकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि समाज में जागरूकता और आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर भी काम करेगा।
समारोह के दौरान विभागीय अधिकारियों ने मंत्री को विभिन्न योजनाओं और परियोजनाओं की जानकारी दी। मंत्री ने सभी योजनाओं की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा की और अधिकारियों से जमीनी स्तर पर काम तेज करने को कहा।
सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने मंत्री के बयान का स्वागत किया है। उनका कहना है कि अगर सरकार वास्तव में पिछड़े और वंचित इलाकों तक विकास पहुंचाने में सफल होती है तो इसका बड़ा असर समाज के कमजोर वर्गों पर पड़ेगा।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि बिहार जैसे राज्य में जहां सामाजिक और आर्थिक असमानता बड़ी चुनौती है, वहां एससी-एसटी समुदाय के लिए लक्षित योजनाएं बेहद महत्वपूर्ण हैं।
फिलहाल मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन के पदभार ग्रहण के बाद विभाग में नई योजनाओं और कार्यशैली को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में विभाग की योजनाओं का लाभ और अधिक प्रभावी तरीके से जमीन तक पहुंचेगा।
सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत दिया गया है कि अनुसूचित जाति और जनजाति समुदाय के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी और उन्हें शिक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जाएंगे।


